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आचार्य तुलसी का व्यक्तित्व इतना विशाल की उन्हें हम केवल धर्म गुरु की सीमा में नहीं बांध सकते : मुनि विजय

सीमा सन्देश न्यूज
नोहर।
यहां तेरापंथ भवन के प्रांगण में शासन श्री मुनि विजय कुमार के सानिध्य में विकास महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा एक सुदर्शन व्यक्तित्व की पहचान थे आचार्य तुलसी। एक ओजस्वी व्यक्तित्व का नाम था आचार्य तुलसी। जो बाहर से जितने आकर्षक भीतर से उतने ही पावन। एक बहुत बड़े समुदाय के सक्षम अधिशास्ता पर भीतर में प्रदीप्त आत्मानुशासन की आलोकिक आभा। आचार्य तुलसी का व्यक्तित्व इतना विशाल एवं व्यापक कि उन्हें हम केवल धर्म गुरु की सीमा में नहीं बांध सकते। आचार्य तुलसी ने कई बार कहा करते थे धर्मगुरु तो आप मुझे कहे या ना कहे लेकिन मैं साधक हूं और समाज सुधारक हूं । आचार्य तुलसी ने एक संप्रदाय के आचार्य होते हुए भी अपने आपको धर्मगुरु कहाने के बजाय साधना पुरूष कहाना ज्यादा उचित समझा। उन्होंने अणुव्रत आंदोलन, प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान जैसे उपक्रमो के साथ-साथ अनेक संस्थाएं एवं रचनात्मक उपक्रम प्रारंभ किए। आचार्य तुलसी की साधना का ही प्रतिफल है कि न केवल शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, साधना एवं योग के क्षेत्र में बल्कि राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अनेक नए-नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। पूर्व में इस दिवस को पटटोत्सव के रूप में मनाया जाता था। बाद में आचार्य महाप्रज्ञ ने इस विकास की गंगा को देखते हुए इस दिवस को विकास महोत्सव के रूप में मनाने के निर्देश दिये। कार्यक्रम का सुनियोजित संचालन आंचलिक समिति के सुशील सिपानी ने किया। इस मौके पर मुनि रमणीय कुमार, महिला मंडल के अध्यक्ष किरण देवी छाजेड़, सरला देवी सिपानी, पुष्पा सिपानी,महेंद्र सिपानी, चंद्रकला देवी सिंघी, तारा देवी बांठिया, चैनरुप बांठिया, यासिता सिपानी, यासिता छाजेड़, पुजा कोचर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

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