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उपचुनाव में टिकट बना परेशानी:वल्लभनगर और धरियावद विधायकों के निधन के बाद परिवारों से मजबूत दावेदारी, बागी और निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं समीकरण

जयपुर

राजस्थान में 2 विधानसभा सीटों उदयपुर में वल्लभनगर और प्रतापगढ़ में धरियावद के लिए विधानसभा उपचुनाव होने हैं। दोनों जगहों पर इस बार परिवारवाद के आधार पर ही टिकट देने की संभावना बन रही है। सहानुभूति के वोट लेने के लिए दोनों ही सियासी पार्टियों ने मन बना लिया है। क्योंकि पिछले विधानसभा उपचुनाव का रिकॉर्ड इसी ओर इशारा करता है। ऐसे में बागी प्रत्याशी भी निर्दलीय ताल ठोकने की तैयारी में जुट गए हैं।

वल्लभनगर से कांग्रेस विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत और धारियावाड़ से भाजपा विधायक गौतम मीणा का कोरोना संक्रमण काल में निधन हो जाने से ये दोनों सीटें खाली हुई हैं। यहां उपचुनाव करवाने पड़ रहे हैं, लेकिन दोनों ही पार्टियां सहानुभूति के वोट लेने और गढ़ को मजबूत रखने के लिए उन विधायकों के परिजनों को ही टिकट देने के मूड में नजर आ रही हैं। हालांकि दिवंगत विधायकों के परिजन भी अलग-अलग दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो बागी और निर्दलीयों की चिंता ने भी कांग्रेस और बीजेपी के पसीने छुड़ा रखे हैं।

प्रीति शक्तावत

प्रीति शक्तावत

वल्लभनगर में दोनों पार्टियों के लिए टिकट वितरण बड़ी चुनौती
कांग्रेस में वल्लभनगर से गजेन्द्र शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत और उनके बड़े भाई देवेन्द्र सिंह शक्तावत टिकट के लिए प्रबल दावेदार हैं। हालांकि गजेन्द्र सिंह शक्तावत के निधन के बाद परिवार में सियासी दावेदारी खुलकर सामने भी आ चुकी है। पिछले दिनों नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रहे देवेन्द्र सिंह शक्तावत ने टिकट की दावेदारी जताते हुए साफ कह दिया था कि अगर मुझे टिकट नहीं दिया, तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ लूंगा। उनके बयान के सियासी मायने यह भी निकाले गए कि यदि उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय चुनाव लड़कर कांग्रेस का वोट बैंक का गणित दो फाड़ कर सकते हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस में प्रीति शक्तावत या देवेन्द्र सिंह शक्तावत, जिसका भी टिकट कटा, बीजेपी उसे भी टिकट दे सकती है। इन दोनों बड़े दावेदारों के अलावा गजेन्द्र सिंह शक्तावत के ही भांजे राज सिंह झाला ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। राज सिंह सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। परिवार के बाहर से दावेदारी की बात करें तो पीसीसी सदस्य रह चुके भीम सिंह चूंड़ावत और कांग्रेस नेता ओंकार लाल मेनारिया भी टिकट मांग रहे हैं।

उदयलाल डांगी

उदयलाल डांगी

बीजेपी के नेताओं में गुटबाजी और आपसी विवाद
दूसरी ओर बीजेपी में भी गुटबाजी और सियासी विवाद चरम पर है। बीजेपी के 4 दावेदार तो पिछले दिनों अपनी दावेदारी में यह तक कह चुके हैं कि हम चारों में से ही किसी एक को टिकट दिया जाए। हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे। वरना पार्टी के लिए मुश्किल होगी। बीजेपी की ओर से टिकट के प्रबल दावेदार उदयलाल डांगी हैं। इनके खिलाफ धनराज अहीर, ललित मेनारिया, महावीर वया और आकाश वागरेचा ने मोर्चा खोल रखा है। दूसरी ओर बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी रहे उदयलाल डांगी सक्रिय तौर पर क्षेत्र में जनसंपर्क में जुटे हैं। डांगी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 46 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे। डांगी नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की भी पहली पसंद बताए जाते हैं। पिछले दिनों बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया उदयलाल डांगी की डबोक में होटल पर भी पहुंचे थे। सूत्रों के मुताबिक़ पूनिया ने उनसे संगठन के मुद्दों और चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की थी।

रणधीर सिंह भीण्डर

रणधीर सिंह भीण्डर

रणधीर सिंह भीण्डर मुकाबले को बना रहे त्रिकोणीय
वल्लभनगर के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले यहां जनता सेना से इकलौते दावेदार रणधीर सिंह भीण्डर हैं। भीण्डर दो बार के विधायक रह चुके हैं। 2003 और 2013 में भीण्डर जनता सेना से विधायक रह चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के धुर विरोधी माने जाने वाले रणधीर सिंह भींडर और कटारिया में सियासी लड़ाई और जुबानी हमले चलते रहते हैं। पिछले दिनों गुलाबचन्द कटारिया ने कहा था कि वे बीजेपी से भीण्डर को टिकट नहीं लेने देंगे।

वल्लभनगर में काम करता है राजपूत फैक्टर
वल्लभनगर में ये चर्चाएं आम हैं कि इस विधानसभा सीट पर राजपूत फैक्टर ही काम करता है। यहां गैर राजपूत का विधायक चुनाव मे जाना मुश्किल ही है। हालांकि यहां एसटी के वोट ज्यादा हैं और राजपूत वोट कम हैं, लेकिन एसटी वोट भी राजपूत प्रत्याशी को जाता रहा है।

धरियावद सीट पर भी दोनों पार्टियों के लिए टिकट बंटवारा नहीं आसान
धरियावाद की सीट बीजेपी विधायक गौतमलाल मीणा के निधन से खाली हुई है। ऐसे में सहानुभूति फैक्टर के बूते बीजेपी यहां मजबूती से ताल ठोकती नजर आ रही है। स्व गौतमलाल मीणा के बेटे कन्हैया लाल मीणा यहां टिकट के सबसे मजबूत दावेदार हैं। कन्हैयालाल मीणा पर बीजेपी में पूर्व सीएम रहीं वसुंधरा राजे का भी आशीर्वाद माना जाता है। इसके अलावा पंचायत समिति सदस्य रहे कुलदीप सिंह मीणा और खेत सिंह मीणा ने भी दावेदारी जताई है।

परिवार के बाहर नगराज मीणा, नाथूलाल मीणा, केबी मीणा, रूपालाल मीणा की दावेदारी
धरियावद में कांग्रेस से पूर्व विधायक नगराज मीणा अबकी बार फिर से प्रबल दावेदार हैं। नगराज मीणा पूर्व में यहां से 2 बार चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 3 बार हार का मुंह भी देखना पड़ा है। पिछले दो बार के चुनावों में उनकी लगातार हार हो रही है। ऐसे में अगर पार्टी ने दो बार चुनाव हार चुके नेता को टिकट नहीं देने के फॉर्मूले पर अमल किया, तो नगराज मीणा के लिए मुश्किल हो सकती है। इनके अलावा नाथूलाल मीणा, केसर भाई उर्फ केबी मीणा और रूपलाल मीणा की भी दावेदारी है। केबी मीणा धरियावद से 2 बार के सरपंच हैं। जबकि रूपलाल मीणा लसाड़िया से 4 बार के सरपंच हैं। ऐसे में लगता है कि धरियावाद में बीजेपी के लिए टिकट तय करना आसान है, लेकिन कांग्रेस के लिए यह बहुत मुश्किलों भरा रहने वाला है।

पिछला रिकॉर्ड- तीनों दिवंगत विधायकों के परिजनों ने जीते उपचुनाव
राजस्थान में पिछले दिनों 3 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों से पता चलता है। तीनों ही सीटें दिवंगत विधायकों के परिजनों ने जीती और सिम्पैथी फैक्टर हावी रहा। इसलिए ऐसी संभावनाएं फिर हैं कि दिवंगत विधायकों के परिजनों को ही दोनों पार्टियां टिकट दे सकती हैं, लेकिन पार्टी के कई नेता पार्टी और परिवारवाद के खिलाफ अलग से अपनी दावेदारी कर चुनाव में निर्दलीय ताल ठोक सकते हैं। ऐसे बागी समीकरण भी बिगाड़ सकते हैं। दोनों पार्टियों के लिए यह भी बड़ी चिंता की बात है।

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