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ऊपर करतार नीचे पटवार…काम पड़े तो तलाशते रहो हर बार…

बीकानेर. ‘ऊपर करतार नीचे पटवारÓ। लोक प्रचलित इस कहावत से हम सभी परिचत हैं। माना यह गया है कि वही होता है जो ऊपर बैठा भगवान लिख देता है। काश्तकारों के बीच इसी आशय पर यह कहावत चलन में आई है। नीचे पटवार अर्थात आकाश में जो भी होता हो, नीचे धरती पर तो वही होता है जो पटवारी चाहता या लिख देता है, उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता।
इस कहावत को सुना तो लगा यह पटवारियों की कारगुजारियों पर अतिशयोक्ति पूर्ण प्रहार है। परन्तु जिले में पटवारियों की तलाश में भटकते किसानों के दर्द को जाना तो लगा यह कहावत निराधार नहीं है। जिले में पटवारियों के ३४१ पद स्वीकृत हैं लेकिन, इनमें से ४५ फीसदी पद रिक्त है। यानि जिले में १५० पटवारियों का अतिरिक्त काम १९१ पटवारी कर रहे हैं।
यह तो है एक पहलू, दूसरा पहलू है कि पटवारियों को पटवार सर्किल पर ही रहकर किसानों के काम करने होते हैं। सालों पहले पटवार सर्किल मुख्यालय पर पटवारघर बने, वह आज जीर्णशीर्ण हालत में है। एेसे में पटवारी अधिकतर समय तहसील मुख्यालयों पर ही रहते है। सभी ने अपने ऑफिस निजी किराया पर लिए आवास अथवा सरकारी क्वार्टर में बना रखे हैं। किसान को जब काम पड़ता है तो वह सबसे पहले पटवारी का ठिकाना ढूंढता है। फिर वह जहां मिले वहां काम से संबंधित रेकार्ड है तो ठीक अन्यथा पटवारी जितने दिन का समय देता है, किसान को उतने दिन इंतजार करना पड़ता है।

यह कार्य हो रहे प्रभावित
मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र के लिए रिपोर्ट का कार्य
जमाबंदी, नक्शा प्रतिलिपि आदि कार्य
सीमा ज्ञान, सहमति विभाजन के काम
खाता दुरस्तीकरण व नाम शुद्धिकरण
गिरदावरी, राजस्व संग्रहण, इंतकाल दर्ज

समस्या है…करेंगे समाधान
पटवारियों के कामकाज को लेकर कई तरह की समस्याएं हैं। सौ से अधिक पद रिक्त होने के चलते पटवारियों के पास एक से ज्यादा मंडलों का काम है। एेसे में उनके बैठने की जगह को लेकर परेशानी की शिकायत आती है। पटवार भवनों की मरम्मत आदि कराने की आवश्यकता है तो सरकार को लिखेंगे।

नमित मेहता, जिला कलक्टर, बीकानेर

नाल १२ साल से पटवार भवन खुलने का इंतजार
नाल संवाददाता ओमप्रकाश सोनी के अनुसार नाल गाव में महत्वपूर्ण वायुसेना स्टेशन, सिविल एयरपोर्ट होने के बावजूद पटवार भवन १२ साल से बंद पड़ा है। पदस्थापित पटवारी ने इसे कभी खोला ही नहीं। सार सम्भाल नहीं होने से भवन में झाड़ झंखाड़ उग गए और यह एक खंडहर बनकर रह गया है। नाल के पटवारी का 14 अगस्त को तबादला हो गया लेकिन जिला प्रशासन ने अन्य पटवारी को यहां लगाया नहीं।

कोलायत तहसील के आस-पास ही ठिकाना
कोलायत संवाददाता वीरेन्द्र पुरोहित के अनुसार यहां पुराना पटवार
घर तहसील के काफी दूरी पर बना हुआ है। वहां पर पटवारी कम ही
जाते है। कोलायत में ३० पटवार सर्किल है। अधिकांश पटवारियों ने तहसील के पास आस-पास सरकारी आवासों और निजी किराया के भवनों में अपने दफ्तर बना रखे है। पटवारियों ने बताया कि एक के पास कई मंडलों का काम है। एसडीएम-तहसीलदार आदि को जब काम पड़ता है, तो पटवारी को तुरंत आने के लिए कहते हैं। सरकार की ओर से तहसील मुख्यालय पर कोई भवन नहीं है। एेसे में निजी स्तर पर व्यवस्था कर रहते हैं।

नोखा ५७ पटवार मंडल, ३५ पटवार भवन जीर्ण-शीर्ण
नोखा संवाददाता राजेश बुलानिया के अनुसार उपखंड क्षेत्र में पटवार घर सरकारी उपेक्षा के चलते जर्जर हो रहे हैं। यहां 57 पटवार मंडल हैंं लेकिन, पटवारी का हर दूसरा पद रिक्त है। ऐसे में अधिकांश पटवार घरों में महीनों से ताले लगे हुए हैं। पुराने और सार-संभाल के अभाव में ये भवन खंडहर हो रहे हैं। वर्तमान में २७ पटवारी कार्यरत है और ३० पद रिक्त हैं। उपखंड के 57 पटवार हलकों में बने 35 पटवार घरों की हालत खराब है। इनकी मरम्मत नहीं हो सकती, नया ही बनाना होगा। तीन भवन ही मरम्मत योग्य हैं। वहीं 10 भवन निवास योग्य हैं। पटवारी किराए के निजी भवन में कार्यालय चला रहे हैं।

श्रीडूंगरगढ़ गांवों से मुख्यालय आते हैं किसान
श्रीडूंगरगढ़ संवाददाता संजय पारीक के अनुसार उपखण्ड में ४३ पटवार सर्किल है। पटवार मुख्यालयों पर बने पटवार घर देख-भाल के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो रहे है। अधिकांश पटवारी अपने स्तर पर घर अथवा निजी भवन में अपना काम करते है। किसानों को दूर-दराज के गांवों से अपना काम कराने के लिए श्रीडूंगरगढ़ आना पड़ता है। फिर वह पटवारियों के ठिकाने की तलाश करते हैं।

लूणकरनसर आरपीसी कॉलोनी में पटवारी मिलेगा
लूणकरनसर संवाददाता चेतराम ज्याणी के अनुसार जब किसी किसान को पटवारी से काम पड़ता है तो वह तहसील मुख्यालय आता है। यहां पर पटवारी का पता पूछता है तो जवाब मिलता है आरसीपी कॉलोनी में मिलेगा। फिर वह पटवारी का निजी कार्यालय ढूंढता है। कुछ पटवारी इधर-उधर निजी भवनों में बैठते हैं।

खाजूवाला १० के भरोसे २२ का काम
खाजूवाला संवाददाता रितेश यादव के अनुसार उपखण्ड में पटवारियों के २२ पद स्वीकृत है लेकिन अभी १० ही पटवारी है। एेसे में दो से अधिक मंडलों का काम भी पटवारियों को देखना पड़ रहा है। चालीस साल पहले बना पटवार घर अब उपयोग में लेने लायक नहीं रहा। एेसे में सरकारी आवासों में पटवारी बैठते है।

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