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कांग्रेस के मंत्री और विधायकों में तकरार:विधायक निगम में ज्यादा समितियां बनाकर पार्षदों को खुश करना चाहते हैं, लेकिन मंत्री जी इससे सहमत नहीं; पार्षदों में भी असंतोष

जयपुर

जयपुर ग्रेटर नगर निगम में हुई मेयर की उठापटक के बाद अब हैरिटेज में भी विधायक और मंत्री आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। जहां विधायक ज्यादा से ज्यादा समितियां बनाकर पार्षदों को खुश करना चाहते हैं। वहीं, मंत्री इससे सहमत नहीं है। इसके कारण सभी नेता एक राय नहीं हो पा रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने जयपुर में पहली बार निर्दलियों की मदद से अपना बोर्ड बनाया है। इसके बावजूद अब नगर में संचालन समितियों के गठन पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं में आपसी राय नहीं बन पा रही है। सात माह से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन अब तक संचालन समितियां नहीं बन पाई। जबकि सरकार कांग्रेस की है। जिन 4 विधानसभा क्षेत्रों के ज्यादातर पार्षद हैरिटेज नगर निगम में आते हैं, वहां विधायक भी कांग्रेस पार्टी के ही है।

मेयर के पति पर विधायक ने लगाए थे आरोप

वहीं, समितियां नहीं बनने से 9 निर्दलीय पार्षदों के साथ-साथ कांग्रेस के अपने ही पार्षदों में भी असंतोष बढ़ रहा है। इसका उदाहरण पिछले दिनों देखने को भी मिला, जब अमीन कागजी ने एक अतिक्रमण को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद किशनपोल विधायक अमीन कागजी के पक्ष में 23 पार्षद लामबंद हो गए थे। कार्रवाई नहीं होने पर विधायक ने मेयर पति पर ही अतिक्रमण में लिप्त होने का आरोप लगाया था।

विधायकों के प्रस्ताव से यूडीएच मंत्री नाखुश

नगर निगम हैरिटेज क्षेत्र में सिविल लाइंस, किशनपोल, हवामहल, आदर्श नगर और आमेर विधानसभा क्षेत्र का कुछ हिस्सा है। इनमें से 4 विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के विधायक है, जिनमें अपने-अपने क्षेत्र के पार्षदों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही। विधायक ज्यादा से ज्यादा समितियां बनाना चाहते हैं, ताकि वे अपने क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा पार्षदों को खुश रख सकें। इधर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ज्यादा समितियां बनाने के पक्ष में नहीं है। बताया जा रहा है कि निगम की ओर से 36 समितियां बनाने का प्रस्ताव धारीवाल के समक्ष रखा था, जिसे धारीवाल ने सिरे से खारिज कर दिया था।

बड़ी समितियों पर ज्यादा लड़ाई, इसलिए एक समिति के 3-3 टुकड़े

भवन मानचित्र, सफाई, लाईट, अतिक्रमण निरोधक, लाइसेंस, गैराज, वित्त और उद्यान समितियां ऐसी है, जो काफी महत्व की है। इन समितियों पर क्षेत्रीय विधायक अपने-अपने क्षेत्र के पार्षदों के पास रखवाना चाहते हैं। ऐसे में कई समितियां तो ऐसी है, जिनके तीन-तीन टुकड़े वार्डवार किए गए। सूत्रों का कहना है कि भवन मानचित्र समिति को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी है, जिसे देखते हुए इसके तीन भाग करते हुए तीन अलग-अलग समितियां बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था।

ये है बोर्ड की स्थिति

वर्तमान में 100 वार्डों वाले नगर निगम हैरिटेज में 46 पार्षद कांग्रेस के, 42 भाजपा के और 11 निर्दलीय है, जबकि कांग्रेस की एक पार्षद का निधन पिछले दिनों हो गया था। कांग्रेस ने 9 निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से बोर्ड बना रखा है। जयपुर में 1994 में नगर निगम बनने के बाद यह पहला मौका है, जब राजधानी में कांग्रेस का बोर्ड बना है। हैरिटेज में समितियां नहीं बनने के कारण एक तरफ जहां जनता के काम अटक रहे हैं, वहीं अब पार्षदों में अपनी ही पार्टी के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। लोग डेयरी बूथ के लाइसेंस, बिल्डिंग प्लान की मंजूरी, आवासों के नाम ट्रांसफर, पट्‌टे जैसे कार्यों के लिए नगर निगम के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समितियां नहीं बनने के कारण ये काम अटक रहे हैं।

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