रविवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कैबिनेट का विस्तार हो गया। मंत्रिपरिषद में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए बड़े प्रतिनिधित्व पर जोर देकर पार्टी ने 2023 के चुनाव की मजबूत बुनियाद रखने की कवायद की है। दूसरी तरफ पार्टी हाईकमान ने सचिन पायलट की लंबी मांग को मानते हुए उनकी मर्जी के मुताबिक गहलोत कैबिनेट में उनके गुट के नेताओं को मंत्री बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की है।
सचिन पायलट ने करीब एक साल पहले अपने करीबी विधायकों के साथ सीएम गहलोत के खिलाफ बागी रुख अपना लिया, जिसके बाद गहलोत सरकार पर बड़ा संकट गहरा गया था। जिसके बाद पायलट के हाथ से उपमुख्यमंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी चली गई थी। लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार से पायलट खुश नजर आ रहे हैं, दूसरी तरफ गहलोत ने यह जताया है कि वे पार्टी आलाकमान से ऊपर नहीं है। लेकिन इस मंत्रिमंडल विस्तार में गहलोत और पायलट दोनों के लिए संदेश छिपे हैं।