पाली।
पाली जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर बोरनड़ी गांव में दो माह पूर्व एक किशोर कुंए में गिर गया था। 23 दिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसका शव निकाला गया था। इसके लिए कुएं के पास 35 फीट गहरा गड्ढा खोदना पड़ा था। तब जाकर उसे निकाला गया था। रेस्क्यू के 43 दिन बीत जाने के बाद भी गड्ढे को प्रशासन ने नहीं भरवाया है। इसके आसपास 5 परिवार रहते हैं। बच्चों को लेकर ये परिवार अब चिंतित रहने लगे हैं। बाकायदा किसी न किसी को तालाब के आसपास रखवाली करनी पड़ रही है, ताकि कोई बच्चा उस तरह न आ जाए। इस तालाब को भरवाने के लिए यहां के निवासियों ने कई प्रशासनिक अधिकारियों के यहां गुहार लगाई। डीएम, एडीएम, विधायक हर चौखट पर गए, फिर भी राहत नहीं मिली। इन परिवारों की पीड़ा जानने भास्कर बोरनड़ी गांव पहुंचा। प्रस्तुत है ग्राउंड रिपोर्ट…
पानी के कनेक्शन तक कटे
बोरनड़ी में रेस्क्यू वाली जगह पर कुएं के चारों तरफ करीब 35 फीट गहरा गड्डा बना हुआ है। इन गड्ढों की वजह से गांव के कई घरों के पानी का कनेक्शन तक कट गए हैं। कई घरों का रास्ता ब्लॉक हो चुका है। यहां कृषि कुएं पर रहने वाले 5 परिवारों से भास्कर टीम ने बात की तो उनका दर्द जुबां पर आ गया।

प्रशासन से कुएं के चारों तरफ खोदे गड्ढे को भरने की विनती करते बोरनड़ी निवासी वृद्ध हरीसिंह व उनकी पत्नी।
कोई नहीं सुन रहा
यहां रहने वाले बुजुर्ग हरी सिंह ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान हमारा कुछ पक्का निर्माण भी तोड़ा है। फिर भी हम कुछ नहीं बोले। आश्वासन दिया था कि रेस्क्यू पूरा होते ही कुएं के चारों तरफ खोदे गए गड्ढे भरवा देंगे। डेढ़ माह से ज्यादा समय बीत गया। इसे अभी तक नहीं भरा गया। एक बार जेसीबी आई भी थी, पर कोई काम नहीं हुआ। गांव वाले अपनी समस्या लेकर बीते दिनों एडीएम पाली चंद्रभान सिंह से मिले थे। जिला कलेक्टर अंशदीप, मारवाड़ जंक्शन विधायक खुशवीर सिंह जोजावर, तहसीलदार मारवाड़ जंक्शन रामलाल मीणा के समक्ष भी समस्या रख चुके हैं। अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। गांव के सरपंच से तो कई बार शिकायत कर चुके हैं। हरिसिंह कहते हैं, लगता है हादसे के बाद ही जिम्मेदार बोरनड़ी में फिर से आएंगे। उनकी पत्नी बोली- चौकीदार की तरह दिन भर बैठी रहती हूं। बच्चे या जानवर इस गड्ढे में गिर कर हादसे का शिकार न हों, इसका ध्यान रखती हूं।

बोरनड़ी में कुएं के निकट खोदे गए गड्ढे के निकट खेलते बच्चे, जिनका इनमें गिरने का डर हर समय परिवार के लोगों को रहता हैं।
पड़ोसी के खेत से होकर कब तक आएंगे
यहां रहने लक्ष्मण सिंह ने बताया कि रेस्क्यू तो पूरा हो गया, लेकिन घर में आने का रास्ता नहीं बचा। पड़ोसी के खेत से होकर कब तक आएंगे। पेयजल कनेक्शन रेस्क्यू के दौरान कट गया था। उसे अब तक नहीं जोड़ा गया। खुद के लिए और पशुओं के लिए रोज पानी का टैंकर मंगवाना पड़ता हैं। एक टैंक मंगवाने में करीब 500 रुपए खर्च होते हैं।
पानी नहीं होने से सूख रही फसल
यहां रहने वाले महेन्द्र सिंह ने बताया कि खुदाई के दौरान कटे पेयजल कनेक्शन वापस नहीं जोड़ा गया। कुआं बंद पड़ा है। ऐसे में फसलों की सिंचाई कहां से करें। हमारी आय का मुख्य स्रोत खेती है। गत दिनों कुछ बरसात होने से कुछ फसल बची हुई है। यही स्थिति रही तो फसल सूख जाएगी।

इतने बड़े तालाब में तब्दील हो गया है गड्ढा। कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा?
पांच परिवारों के 25 सदस्य रहते हैं
हरी सिंह राजपूत, लक्ष्मण सिंह राजपूत, महेन्द्र सिंह राजपूत, कल्याण सिंह व राम सिंह के घर इसी गड्ढे के पास हैं। पांचों परिवारों में 25 सदस्य हैं। इनमें कई वृद्ध व बच्चे शामिल हैं। कुएं के चारों तरफ खोदे गए गड्ढे नहीं भरने से हमेशा अनहोनी का डर बना रहता है। पूरे पांच परिवार कई तरह की परेशानियों का रोज सामना करते हैं।
परिवार का दावा- रेस्क्यू के बाद खर्च किए 3 लाख
परिवार के लोगों का दावा है कि रेस्क्यू पूरा होने के बाद कुएं के फरमे भरवाने सहित अन्य कार्य को लेकर उन्होंने करीब 3 लाख रुपए खर्च किए। कुआं करीब 40 फीट तक खुदा हुआ था, जिसकी 7 राउंड तक आरसीसी से मरम्मत कराई गई। एक राउंड आरसीसी भरवाने में 10 हजार तो मजदूरी लगती है। बाकी मटेरियल का खर्चा अलग से। गांव वालों का कहना है कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि यह राशि उन्हें सरकार की ओर से वापस दिलाई जाएगी। फूटी कौड़ी नहीं मिली है।

खेत में जमा पड़ी मिट्टी जिसे कुएं के चारों तरफ भरने को लेकर प्रशासन कुछ नहीं कर रहा।
यहां रहने वाले परिवार की समस्या
– कुएं के चारों तरफ खोदे गए गड्ढे को नहीं भरने से हादसे की आशंका।
– कुआं खराब हो गया, नल कनेक्शन भी वापस नहीं जोड़ने से पेयजल समस्या।
– पेयजल नहीं होने से खेत में खड़ी फसल खराब हो रही।
– गड्ढा भरे तो खेत में आने का रास्ता मिले।
– मकान क्षतिग्रस्त होने का खतरा।

23 दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन की एक तस्वीर। (फाइल फोटो)
23 दिन तक सेना ने खोजा शव
पाली जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर बोरनड़ी गांव दो माह पूर्व प्रदेश भर में चर्चा में रहा था। यहां 22 जून 2021 को एक खेत में बने 180 फीट गहरे कुए में मरम्मत के दौरान कुएं का कुछ हिस्सा ढहने से गांव का 16 साल का नरेन्द्र नायक मलबे में दब गया था। संकरे कुएं से नरेन्द्र का शव निकालने के लिए पुलिस-प्रशासन ने जोधपुर से आए सेना के एक्सपर्ट दल की मदद से यहां 23 दिन रेस्क्यू चलाया। तब जाकर 13 जुलाई को नरेन्द्र नायक का शव निकालने में कामयाब हो सके थे।