श्रीगंगानगर। जिले में मूंग, ग्वार की बिजाई के दिनों में पंजाब से गंग कैनाल भी निर्धारित हिस्से का लगभग आधा पानी मिलने से उद्वेलित किसान संगठनों द्वारा कल गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट पर पड़ाव डाला जाएगा। सभी किसान संगठन एकजुट होकर इस महापड़ाव के लिए अधिक से अधिक किसानों को जुटाने के लिए गांवों में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान सभा,ग्रामीण मजदूर किसान समिति (जीकेएस) और जय किसान आंदोलन, गुरूबलपालसिंह संधू आदि संगठनों के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता दो दिन से अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर गांवों में सफाई कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अमरसिंह बिश्नोई ने बताया कि जिला कलेक्ट्रेट पर भी दो दिन से लगातार धरना चल रहा है। सभी संगठनों के पदाधिकारी गांवों में जनसंपर्क करने गए हुए हैं। इसलिए धरने पर कुछ ही लोग मौजूद रहते हैं। आज भाजपा के प्रदर्शन के दौरान भी इसीलिए कम ही लोग काले झंडे लेकर उनका विरोध दर्ज करवा पाए। आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा किसानों की मांगों का समर्थन किया जा रहा है। आप के जिलाध्यक्ष शंकर मेघवाल और शमशेरसिंह बराड़ भी गांव में जनसंपर्क करने निकले हुए हैं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष है पृथ्वीपालसिंह संधू भी गांवों के दौरे पर हैं। किसान सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य वह माकपा के जिला सचिव श्योपतराम मेघवाल, कालूराम थोरी, रविंद्र तरखान आदि श्रीविजयनगर और रायसिंहनगर क्षेत्र के किसानों से संपर्क करने में लगे हैं। जीकेएस के संयोजक रणजीतसिंह राजू और प्रवक्ता संतवीरसिंह मोहनपुरा ने आज कई इलाकों में जनसंपर्क किया। किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने श्रीगंगानगर के आसपास के गांवों के किसानों से संपर्क साधने की कमान संभाल रखी है। जय किसान आंदोलन के रमन रंधावा भी अपनी टीम के साथ बींझबायला,घमूडवाली चूनाववढ और पदमपुर इलाके में सक्रिय हैं। गौरतलब है कि जुलाई माह में गंग कैनाल में 2600 क्यूसेक पानी दिया जाना तय है, लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की पिछले दिनों हुई बैठक में 2300 पानी का इंडेंट दिया। पंजाब से यह पानी भी नहीं मिल रहा। किसानों के मुताबिक गंग कैनाल में 1500 से 2000 क्यूसेक पानी पंजाब से छोड़ा जाता है,जो राजस्थान की सीमा पर पहुंचते-पहुंचते 11-12 सौ क्यूसेक रहा जाता है। इससे गंग कैनाल की सभी नहरों को पानी नहीं मिल रहा और किसान फसल की बिजाई करने से वंचित हैं। पिछले सप्ताह जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने किसान संगठनों से लिखित में वायदा किया था कि राजस्थान सीमा पर कम से कम 1950 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा।यह लिखित समझौता 24 घंटे में ही टूट गया। इसी के खिलाफ किसान कल पड़ाव डालने जा रहे हैं ।अमरसिंह बिश्नोई ने बताया कि अगर पानी की मात्रा नहीं बढ़ी और प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाया तो महापड़ाव को अनिश्चितकाल में तब्दील कर दिया जाएगा।