विराट कोहली ने अगले महीने टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टीम इंडिया की टी-20 फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ना का फैसला किया है। भारतीय कप्तान ने वर्कलोड का हवाला देते हुए टी-20 की कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया, लेकिन इससे यह संकेत मिलते हैं कि वनडे में भी उन्हें इस तरह की चीजों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या हाथों से जाएगी वनडे की कप्तानी?
विराट कोहली ने कहा है कि वह अन्य दो फॉर्मेट में कप्तान बने रहेंगे लेकिन कोई भी स्पष्ट तौर पर यह नहीं कह सकता कि वह 2023 में होने वाले एकदिवसीय वर्ल्ड कप में भारत की 50 ओवर की टीम के कप्तान होंगे या नहीं। वर्कलोड मैनेजमेंट को टी-20 कप्तानी छोड़ने का कारण माना जा सकता है, लेकिन 2023 तक भारत के शेड्यूल को देखा जाए तो वर्ल्ड कप के अलावा टीम को लगभग 20 द्विपक्षीय टी-20 मुकाबले खेलने हैं।
विराट कोहली को 2017 में भारतीय वनडे टीम का कप्तान बनाया ग था।
विराट के लिए अच्छा प्रदर्शन जरूरी
BCCI के एक सूत्र ने PTI से कहा- विराट को पता है कि अगर टीम UAE में टी-20 वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो उन्हें वनडे, टी20 टीम की कप्तानी से हटाया जा सकता था। जहां तक सीमित ओवरों की कप्तानी का सवाल है तो उसने हटकर अच्छा किया है। उन्होंने कहा- उसने अपने ऊपर से थोड़ा दबाव कम किया है, क्योंकि ऐसा लग रहा है कि वह अपनी शर्तों पर यह काम कर रहा था। अगर टी-20 में प्रदर्शन में गिरावट आती है तो शायद 50 ओवर में फॉर्मेट में ऐसा नहीं हो।
BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को जारी बोर्ड के बयान के रोचक पहलू के बारे में PTI से कहा- अगर आप सौरव और जय शाह के बयान देखो, दोनों ने शुभकामनाएं दी हैं, लेकिन एक भी शब्द नहीं कहा कि वह 2023 विश्व कप तक कप्तान रहेगा या नहीं। इसलिए वह कप्तान रहेगा इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
BCCI अगर भविष्य में कोहली से वनडे की कप्तानी भी ले लेता है तो यह हैरानी भरा नहीं होगा। टी-20 वर्ल्ड कप में ट्रॉफी जीतने में नाकाम रहने के बाद कोहली को 50 ओवर में फॉर्मेट में भी एक बल्लेबाज के रूप में उतरना पड़ सकता है।
युवाओं को साथ लेकर चलते हैं रोहित
इसमें कोई शक नहीं कि ड्रेसिंग रूम में भी उपकप्तान रोहित शर्मा को ‘नेतृत्वकर्ता’ माना जाता है, जिन्होंने युवा खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना सीख लिया है और वह IPL में मुंबई इंडियन्स के साथ साल दर साल ऐसा करते आए हैं। वहीं कोहली को युवाओं का समर्थन हासिल नहीं है। उनको करीब से देखने वालों का मानना है कि उनकी कार्यशैली में लचीलापन नहीं है। साउथेम्पटन में WTC फाइनल में दो स्पिनरों के साथ उतरना हो, या 2019 विश्व कप से पहले चौथे स्थान पर किसी खिलाड़ी को स्थापित नहीं होने देना, उनके अंदर लचीलेपन की कमी देखने को मिलती है।
भारत ने इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में भले ही 2-1 की बढ़त बनाई हो, लेकिन दुनिया के नंबर एक ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को एक भी टेस्ट में मौका न देने पर भी विराट की कप्तानी पर काफी सवाल उठे थे।
2017 में पाकिस्तान और 2019/2021 में न्यूजीलैंड ने भारत को हराया था।
युवा खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं करते कोहली
PTI से बात करते हुए एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा- विराट के साथ समस्या संवाद की है। धोनी का कमरा 24 घंटे खुला रहता था और कोई भी खिलाड़ी अंदर जा सकता था। उनके साथ वीडियो गेम खेल सकता था, खाना खा सकता था और जरूरत पड़ने पर क्रिकेट के बारे में बात भी कर सकता था, लेकिन मैदान के बाहर कोहली से संपर्क कर पाना बेहद मुश्किल काम है।
पूर्व क्रिकेटर ने कहा- रोहित में धोनी की झलक है, लेकिन अलग तरीके से। वह जूनियर खिलाड़ियों को खाने पर ले जाता है, जब वह निराश होते हैं तो उनकी पीठ थपथपाता है और उसे खिलाड़ियों के मानसिक पहलू के बारे में पता है।
जहां तक जूनियर खिलाड़ियों का सवाल है तो कोहली के खिलाफ सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वह मुश्किल समय में उन्हें मझधार में छोड़ देते हैं।
एक अन्य क्रिकेटर ने कहा- ऑस्ट्रेलिया में पांच विकेट के बाद कुलदीप यादव योजनाओं से बाहर हो गया। ऋषभ पंत जब फॉर्म में नहीं था तो उसके साथ भी ऐसा ही हुआ। भारतीय पिचों पर ठोस प्रदर्शन करने वाले सीनियर गेंदबाज उमेश यादव को कभी यह जवाब नहीं मिला कि किसी के चोटिल नहीं होने तक उनके नाम पर विचार क्यों नहीं किया जाता।
चयन समिति से भी है कोहली की नाराजगी
रिपोर्ट्स की मानी जाए तो कैप्टन कोहली चेतन शर्मा की अध्यक्षता वाली चयन समिति से भी नाराज है। दरअसल, इस साल इंग्लैंड के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में विराट कोहली टीम में शिखर धवन को शामिल करना चाहते थे और इसके लिए उन्हें चयन समिति के साथ कड़ी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। वहीं, चयनकर्ता धवन की जगह विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले किसी युवा खिलाड़ी को टीम में मौका देना चाहते थे। मगर विराट ने जोर देकर कहा था कि धवन टीम के लिए जरूरी है।