जोधपुर
मारवाड़ में गैंगवार की एंट्री हो गई है। आनंदपाल और अनुराधा चौधरी के बाद लॉरेंस अपना नेटवर्क फैला चुका है। गैंगवार का ही नतीजा है कि जोधपुर में शनिवार को दिन दहाड़े पुलिस कस्टडी में बदमाश सुरेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये हमला पाली के हिस्ट्रीशीटर जब्बर सिंह ने करवाया था।
दरअसल, सुरेश आनंदपाल जैसा बड़ा गैंगस्टर बनकर पाली में दहशत फैलाना चाहता था। यहां पहले से हिस्ट्रीशीटर जब्बर सिंह सक्रिय था। एक साल पहले जब वो लॉरेंस के कॉन्टैक्ट में आया तो काला जठेड़ी को जब्बर सिंह की सुपारी दी। लेकिन फायरिंग में जब्बर सिंह बच गया। हिस्ट्रीशीटर ने इसी का बदला लेने के सुरेश को पुलिस कस्टडी में ही मरवा दिया।
नेतागिरी और रंगदारी के बाद हथियार तस्करी का सरगना
सुरेश सिंह पाली के डरी गांव का रहने वाला था। पहले नेतागिरी करता था। फिर आरटीआई कार्यकर्ता बन गया। आरटीआई के नाम से लोगों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पाली के ही एक फोरेस्ट अफसर से आरटीआई के नाम पर रंगदारी मांगी। इसके बाद सरपंच का चुनाव लड़ा। इस बीच एक लड़की के साथ रेप के मामले में जेल हुई और उसे जोधपुर शिफ्ट किया गया। जोधपुर सेंट्रल जेल में उसकी मुलाकात कई गैंगस्टर से हुई। इससे वो प्रभावित हो गया और आनंदपाल जैसा गैंगस्टर बनने के सपने देखने लगा। जेल से छूटते ही उसने अवैध हथियारों की सप्लाई का कारोबार शुरू किया।
पाली में अपना डर दिखा मनिहारी के पास अपने नाम की माइंस अलॉट करवा दी। लेकिन, मनिहारी की माइनिंग एरिया में जब्बर सिंह का दबदबा था। सुरेश उसके प्रभाव को कम कर खुद डॉन बनना चाहता था। ऐसे में उसने जब्बर सिंह के दुश्मनों को अपने साथ शामिल किया। उसकी हत्या के लिए उन्हीं से मोटी राशि वसूली। इसके बाद हरियाणा के गैंगस्टर और लॉरेंस गैंग से जुड़े काला जठेड़ी को हिस्ट्रीशीटर को मारने की सुपारी दी। एक साल पहले करीब जब्बर सिंह और उसके साथियों पर काला जठेड़ी गैंग के बदमाशों ने 20 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर दी। लेकिन जब्बर सिंह बच गया। इसी दौरान इस मामले में सुरेश का नाम आया। इसके बाद अप्रैल में गुड़ा एंदला पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार किया।