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ग्राम विकास अधिकारियों ने दिया पंचायत समिति मुख्यालय पर धरना

  • ग्राम विकास अधिकारियों ने प्रशासन गांव के संग अभियान के प्री-कैम्प एवं गांव सभाओं के बहिष्कार का किया निर्णय
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ के 11 सूत्री मांग पत्र को लेकर 1 सितम्बर से चल रहे आंदोलन के तृतीय चरण में शनिवार को प्रदेश की 352 पंचायत समिति में 10 हजार ग्राम विकास अधिकारियों की ओर से धरना-प्रदर्शन कर सरकार का ध्यानाकर्षण किया गया। इसी क्रम में राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रेम कुमार के नेतृत्व में ग्राम विकास अधिकारियों ने टाउन स्थित पंचायत समिति कार्यालय में धरना देकर विरोध दर्ज कराया। ब्लॉक अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ अपने 11 सूत्री मांग पत्र को लेकर विगत 3 वर्षों से लगातार ज्ञापन देकर शासन एवं सरकार का ध्यान आकर्षण कर रहा है लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के निदेर्शों एवं नौ लिखित समझौतो के बाद भी शासन एवं सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जा रही है। शासन एवं सरकार के उपेक्षात्मक रवैए से आहत होकर प्रदेश के ग्राम विकास अधिकारियों ने प्रशासन गांव के संग अभियान से ठीक पहले सरकार एवं शासन पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन प्रारंभ किया है। आंदोलन के तहत 16 अगस्त को प्रदेश के सभी ब्लॉक एवं जिला स्तरीय अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम आग्रह पत्र दिया गया। 26 अगस्त को प्रदेश के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आग्रह पत्र भेटकर मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही की मांग की गई। इसके पश्चात भी कार्रवाई नहीं होने पर ग्राम विकास अधिकारियों ने 1 सितम्बर से आॅनलाइन कार्यों का बहिष्कार कर रखा है। 8 सितम्बर को ग्राम विकास अधिकारी सभी राजकीय व्हाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट हो गए। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 352 पंचायत समितियों में धरना प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे ग्राम विकास अधिकारियों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए शनिवार को धरना स्थल से ही प्रशासन गांवों के संग अभियान के प्री-कैंपस एवं गांव सभाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है। धरने को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के ग्राम विकास अधिकारी सरकार की सर्वाधिक जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करते हैं लेकिन राज्य सरकार एवं पंचायती राज विभाग रिक्त पदों पर भर्ती एवं 5 वर्षांे से लंबित पदोन्नति, जिला कैडर परिवर्तन नीति जैसी सामान्य प्रशासनिक मांग भी पूर्ण नहीं कर रहा है। इससे प्रदेश के ग्राम विकास अधिकारियों में आक्रोश है। यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों का शीघ्र निस्तारण नहीं किया जाता है तो ग्राम विकास अधिकारी संघ आर-पार का संघर्ष करेगा एवं 2 अक्टूबर से आयोजित होने वाले प्रशासन गांवों के संग अभियान का पूर्ण बहिष्कार करेगा। धरने में उपशखा हनुमानगढ़ के ग्राम विकास अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
    इन मांगों को लेकर आंदोलन
    ग्राम विकास अधिकारियों की वेतन विसंगति दूर कर ग्रेड पे 3600 करना, 9, 18 एवं 27 वर्ष की सेवा पर एसीपी के स्थान पर पदोन्नति पद का चयनित वेतनमान स्वीकृत करना, 4000 रिक्त पदों पर भर्ती करना, जिला केडर परिवर्तन नीति लागू करना, 5 वर्षों से लंबित पदोन्नतियां करना, केडर स्ट्रैंथन के लिए उच्च पद स्वीकृत करना, डीआरडीए कार्मिकों को नियमित करना, नौ लिखित समझौते लागू करना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर आॅनलाइन जटिलताओं को दूर करना, पट्टों के नामांतरण, रूपांतरण, हस्तांतरण एवं बंटवारा की प्रक्रिया जारी करना, जटिल निर्माण नीति को सरल करना एवं पावर आॅफ शेड्यूल को संशोधित करना।
    यह कार्य होंगे प्रभावित
    ग्राम विकास अधिकारियों के आंदोलन से सर्वाधिक प्रभाव प्रशासन गांव के संघ अभियान पर पड़ेगा क्योंकि इन अभियानों की समस्त व्यवस्थाएं व व्यक्तिगत लाभ के अधिकांश कार्य ग्राम विकास अधिकारी की ओर से ही संपादित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में महानरेगा योजना में नियोजित होने वाले लाखों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे। सात लाख से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी प्रभावित होंगे। स्वच्छ भारत मिशन योजना पूरी तरह प्रवाहित होगी। केंद्रीय वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की ओर से किए जाने वाले सभी विकास कार्य ठप हो जाएंगे। जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, विवाह पंजीयन, जनाआधार सत्यापन, खाद्य सुरक्षा योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समस्त योजनाएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी।

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