मुंबई
समाज निर्माण में टीचरों की भूमिका आदि काल से अहम रही है। बॉलीवुड में टीचरों के रोल से सितारों को खासी लोकप्रियता भी दशकों से मिलती रही है। वह चाहे ‘चुपके चुपके’, ‘दिल्लगी’, ‘परिचय’, ‘इम्तिहान’, ‘प्रोफेसर’ हो, या फिर हाल के बरसों में ‘आरक्षण’, ‘मैं हूं ना’, ‘तारे जमीं पर’, ‘थ्री ईडियट्स’, ‘सुपर 30’ और ‘हिचकी’ हो। इस साल तो साउथ की ‘मास्टर’ में प्रोफेसर बने विजय ने अलग रिकॉर्ड ही कायम किया। नेटफ्लिक्स की ‘मनी हाईस्ट’ का पांचवा सीजन टीचर्स डे से ठीक एक दिन पहले स्ट्रीम हुआ है और इसमें मेन विलेन को उसके साथी प्रोफेसर के नाम से पुकारते हैं।

बहरहाल, टीचर की भूमिका निभा रहे हीरो हीरोइनों के लिहाज से बॉलीवुड को सबसे सफल फिल्में ऋतिक रोशन और रानी मुखर्जी ने दी हैं। रानी मुखर्जी ‘हिचकी’ में टीचर के रोल में थीं। उसके डायरेक्टर सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने कहा, “यह कहानी सच्ची घटना पर बेस्ड है। अटलांटा में ब्रैड कोएन की जिंदगी से इंस्पायर्ड है। वो टूरेंट सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। वो अब मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। उनकी जिंदगी पर एक किताब लिखी गई थी ‘फ्रंट ऑफ द क्लास’। मेरे मामा राज मेहता ने वह किताब पढ़ने को कही थे। फिर ब्रैड कोएन से हम मिले। वह कहानी पहले मेल स्टार के साथ हम करना चाहते थे। पूरे छह साल मैंने इंडस्ट्री के सारे सितारों को वह कहानी सुनाई। मगर सबने मना कर दिया। फिर पत्नी के कहने पर मैंने आदित्य चोपड़ा को नैरेट किया। सितारों ने तो फिल्में करने से मना कर दिया था, मगर आदित्य चोपड़ा ने कहा कि इसे बचाकर कर रखो। इस पर कमाल की फिल्म बनेगी।”

मल्होत्रा ने आगे कहा, “फिर मेल स्टार के बजाय हमने फीमेल स्टार रानी मुखर्जी को बोर्ड पर लिया। ‘बालक पालक’ लिख चुके गणेश और अंबर को साथ लिया। 30 ड्राफ्ट के बाद हमने इसकी स्क्रिप्ट फाइनल की। रानी मुखर्जी भी ब्रैड कोएन से मिलीं। वह इसमें टूरेंट सिंड्रोम से ग्रस्त टीचर के रोल में थीं। कहानी का फलसफा था कि हम अपने कमजोर पहलुओं, जो हमारे दुश्मन हैं उनसे दोस्ती कर लें तो फिर हमारी जिंदगी आसान हो जाएगी।”

डायरेक्टर ने बताया, “शूट को लेकर रानी मुखर्जी की सिर्फ एक ही शर्त थी। उनका शूट शेड्यूल सुबह सात से 12 का रहे। वह इसलिए कि उस दौरान उनकी बिटिया अदीरा सोई रहती है। उस दौरान वह शूट पूरा कर फिर अदीरा के जगने से पहले घर चली जाया करती थीं। उनका साफ कहना था कि अदीरा के बचपन वाले एक भी पल को वो किसी हाल में मिस नहीं कर सकतीं। हम फिर 12 बजे के बाद बाकी कलाकारों के साथ शूट करते थे। इस तरह भी हमने महज 35 दिनों में फिल्म कंप्लीट कर ली। उसकी मेकिंग 12 से 15 करोड़ की थी, पर अकेले इंडिया में इसने 60 करोड़ किए। चाइना में फिल्म का बिजनेस 160 करोड़ रहा। बेहद सफल रही यह।”

‘तारे जमीं पर’ के मुख्य कलाकार दर्शील सफारी ने भी दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कैसे आमिर खान ने बतौर डायरेक्टर और टीचर सेट पर उन्हें ट्रेन भी किया। दर्शील ने कहा, “मैं उस वक्त तो महज 9 साल का था। एक्टिंग की जो बारह खड़ी होती है, वह मुझे सीखने को मिली। आमिर सर के लिए वह आसान नहीं था, क्योंकि वह चीज भी उन्हें हमें एक बच्चे को समझ आने वाली भाषा में सिखाना था। जब मैं उसके पांच साल बाद थिएटर जॉइन करने के बाद महसूस हुआ कि आमिर अंकल ने कितनी स्मार्टली हमें सब सिखाया था। वह भी तब, जब बतौर डायरेक्टर ‘तारे जमीं पर’ उनकी पहली फिल्म थी। कई बार सनसेट सिर पर होता था और बच्चों के साथ शॉट्स लेने बाकी रहते थे, फिर भी आमिर अंकल कभी बच्चों पर नहीं झल्लाते थे। आमिर अंकल ने एक बार हमें पंचगनी में अपने बंग्लो पर बुलाया। सबके लिए अपने हाथों से खाना बनाया। मैं तो जैन हूं तो मेरे लिए अलग डिश बनाए। हमने साथ में लगान देखी। क्रिकेट भी खेला। सच कहूं तो उनमें उम्दा एक्टर के साथ-साथ बेहतरीन टीचर भी है।”

चेतन भगत ने ‘थ्री इडियट्स’ के संदर्भ में कहा, “यह हमारे एजुकेशन सिस्टम पर एक टेक था। दोस्ती, जुनून, उद्यमशीलता पर एक सोच जाहिर की गई थी। उसने लोगों को कनेक्ट किया और फिल्म ने इतिहास कायम किया। बाकी मैं टीचर्स डे के मौके पर देश के सारे टीचरों को मुबारकबाद देता हूं। टीचर्स डे हर बार खास होता है। इस बार वो भी डॉक्टर्स, हेल्थ वर्कर्स की तरह हमारे असल हीरो बनकर उभरे। टीचर्स ने खुद को कोविड काल में बिना किसी ट्रेनिंग के नई परिस्थितियों से खुद को एडेप्ट किया। अपना टीचींग पैटर्न रातोंरात बदल देश की भविष्य बिरादरी का भविष्य हैंपर नहीं करने दिया। उनसे जो उम्मीद की जाती है, उनसे आगे बढ़कर उन्होंने अपना फर्ज निभाया।”

टीचरों पर सबसे सफल फिल्मों में ऋतिक रोशन की ‘सुपर 30’ भी है। इसमें उन्होंने पटना के मशहूर टीचर आनंद कुमार का रोल प्ले किया था। खुद आनंद कुमार ने कहा, ” ऋतिक रोशन पहली मुलाकत से लेकर अब तक हमेशा मुझे आनंद सर ही पुकारते हैं। न सिर्फ वो, बल्कि विकास बहल के माता पिता भी मुझे आनंद सर ही पुकारते हैं। इस फिल्म की उपलब्धि यह रही कि जो बच्चे कंप्यूटर गेम में बिजी रहें हैं, वो ‘सुपर 30’ देख कहते हैं कि उन्हें भी आगे चलकर टीचर बनना है। ऋतिक ने कभी भी मुझे आनंद कुमार या आनंद जी नहीं पुकारा। एक शिक्षक को ऋतिक जैसे सुपरस्टार भी सर से संबोधित करे तो यह बहुत बड़ी बात है। हालिया मुलाकात में ऋतिक ने कहा था मेरी वजह से उन्हें अपने पिता में भी छिपे हुए टीचर को जानने का मौका मिला। ऋतिक ने पहले मेरे उस जमाने के कपड़े मंगवाए थे। हमने बिहार से उन्हें पुराने स्वेटर वगैरह मंगवाकर दिए थे। वह किरदार में ऐसे डूबे कि उन्हें आगे फिर ‘वॉर’ के लिए तैयार होने में बहुत वक्त लगा था। साथ ही बरसों बाद उन्हें अपने बचपन के दिनों का खाना खाने का मौका मिला। समोसे पकौड़े वगैरह उन्होंने खूब खाए थे।”