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दुर्घटना के कुछ ही पलों में पहुंच जाएगी एम्बुलेंस

बीकानेर.
दुर्घटना के घंटों बाद भी मौके पर एम्बुलेंस नहीं पहुंचने की शिकायत अब सुनने को नहीं मिलेगी। राज्य सरकार ने एम्बुलेंस में लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम लगाने पर काम करना शुरू कर दिया है।

यह सिस्टम लगने के बाद दुर्घटना स्थल के सबसे नजदीक वाले एम्बुलेंस संचालक को फोन कर दुर्घटना स्थल पर पहुंचने के लिए कहा जाएगा। इस प्रक्रिया से जहां दुर्घटना स्थल पर तुरंत पहुंचा जा सकेगा, वहीं घायल को जल्द उपचार मिलने से उसकी जान भी बचाई जा सकेगी। परिवहन विभाग लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम को लगाने के लिए जगह-जगह शिविर भी लगा रहा है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम नहीं लगाने वालों के खिलाफ ७ जुलाई के बाद अभियान चलाया जाएगा।

मृत्युदर में आएगी कमी
एम्बुलेंस वाहनों में लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम लगाने के बाद जहां दुर्घटना स्थल तक पहुंचने के लिए कुछ ही समय लगेगा, वहीं दुर्घटना से होने वाली मौतों की संख्या में भी कमी आएगी। वर्तमान में दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है। बीकानेर में पचास से अधिक एम्बुलेंस वाहनों में लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम को लगाया जा चुका है। इस सिस्टम को वाहन में लगाए जाने के बाद परिवहन विभाग उसका रजिस्ट्रेशन करता है। इसी रजिस्ट्रेशन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा संचालित है, जिसे फोन करने पर वह दुर्घटना स्थल पर पहुंचती है।

कई बार उसके समय पर नहीं पहुंचने के कारण दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। एम्बुलेंस वाहनों में मोबाइल ट्रेकिंग सिस्टम लगने के बाद ऐसा नहीं होगा। जिस स्थान पर दुर्घटना होगी, वहां के नजदीकी एम्बुलेंस संचालक की जानकारी कंट्रोल रूम को रहेगी, जहां से संबंधित एम्बुलेंस संचालक को फोन कर सूचित किया जाएगा। बाजार में फिलहाल लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम की कीमत साढ़े चार हजार रुपए से नौ हजार रुपए तक है।

बेहतरीन प्रणाली साबित होगी

एम्बुलेंस वाहनों में लोकेशन ट्रेकिंग सिस्टम को लगाने की प्रणाली के सुगम परिणाम सामने आएंगे। फिलहाल बीकानेर की पचास से अधिक एम्बुलेंस में सिस्टम को लगाया जा चुका है। सिस्टम मोबाइल इन्टरनेंट से जुड़ा होने के कारण प्रदेश में संचालित प्रत्येक एम्बुलेंस की लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा। इस योजना के चलते दुर्घटना में आकस्मिक मौत के आंकड़ों में भी कमी आएगी।
जुगल किशोर माथुर, जिला परिवहन अधिकारी बीकानेर

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