हनुमानगढ़ जिले में राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) में एक अभ्यर्थी के आधार कार्ड पर लगी फोटो धुंधली होने एडमिट कार्ड पर लगी फोटो से मिलान नहीं होने पर उसके डमी होने का भांडा फूट गया। परीक्षा केंद्रों के प्रभारियों और वीक्षकों ने परीक्षा समाप्त होते ही डमी अभ्यर्थी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने असली अभ्यर्थी और उसके पिता को भी गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ मामला दर्ज कर आगे गहन छानबीन की जा रही है।
हनुमानगढ़ जिले में गोगामेड़ी थाना अंतर्गत रामगढ़ गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रविवार दोपहर को रीट की द्वितीय पारी की परीक्षा में डमी अभ्यर्थी का यह खुलासा हुआ। थाना प्रभारी बिशनसहाय ने बताया कि डमी अभ्यर्थी विक्रम बिश्रोई (20) पुत्र बुधराम बिश्नोई, वास्तविक अभ्यर्थी मनोज बिश्नोई 19 और उसके पिता जगमालाराम (50)निवासी रणोदर थाना चितलवाना, जिला जालौर के विरुद्ध केंद्राधीक्षक विजयसिंह ख्यालिया द्वारा दी गई रिपोर्ट पर भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420 और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का प्रयोग) अधिनियम 1992 की धारा 5)6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अदालत में पेश करने पर रिमांड मिला है।पूछताछ में कुछ और खुलासे होने की संभावना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामगढ़ के सरकारी विद्यालय के कमरा नंबर 7 में मोनिका और सुमन बतौर वीक्षक तैनात थीं। उन्होंने इस कमरे में परीक्षा दे रहे सभी अभ्यर्थियों की आईडी तथा एडमिट कार्ड को चैक किया। इसी दौरान विक्रम पर शक हो गया। इन दोनों केंद्र ने आंतरिक उड़नदस्ता के सदस्य बेगराज, अर्शदीपकौर, सुपरवाइजर बसंत, मोनिका, जगदीश पर्यवेक्षक फकीरचंद सहू को जानकारी दी।केंद्राधीक्षक विजयसिंह ख्यालिया द्वारा सूचना दिए जाने पर तहसीलदार जय कौशिक, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भादरा ओमपालसिंह भी कुछ ही देर में इस परीक्षा केंद्र में पहुंच गए। विक्रम बिश्रोई से जहां पूछताछ की गई, वहीं उसके आईडी प्रूफ तथा एडमिट कार्ड पर लगी तस्वीरों का मिलान किया गया आधार कार्ड पर धुंधली तस्वीर होने के कारण एडमिट कार्ड पर लगी फोटो से मिलान नहीं हुआ। दोनों में अंतर दिख रहा था। तत्पश्चात इन कर्मचारियों और अधिकारियों ने निर्णय किया कि द्वितीय पारी की परीक्षा समाप्त होने के बाद विक्रम को पुलिस के हवाले कर दिया जाए।
इस बीच परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद असली अभ्यर्थी मनोज बिश्नोई और उसके पिता जगमालाराम को जरा भी भनक नहीं लगी कि अंदर विक्रम पकड़ा जा चुका है। परीक्षा समय समाप्त होने पर पुलिस को सूचना दी गई थाना प्रभारी बिशनसहाय दलबल सहित इस परीक्षा केंद्र में पहुंचे। केंद्र में ही विक्रम से शुरुआती पूछताछ करने के दौरान पता चला कि मनोज और जगमालाराम बाहर कहीं मौजूद होंगे। कुछ ही देर में इन दोनों को भी काबू कर लिया गया। थाने में लाकर देर रात तक पूछताछ चलती रही। केंद्र अधीक्षक विजयसिंह ख्यालिया द्वारा दी गई रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पांच लाख में डील, 50 हजार एडवांस
थाना प्रभारी बिशनसहाय ने बताया कि विक्रम और मनोज जयपुर के एक कोचिंग संस्थान में एक साथ ही कोचिंग करते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।महज 19 वर्षीय विक्रम पढ़ाई में काफी होशियार है।प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के साथ ही वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आर ए एस) की तैयारी कर रहा है। पढ़ाई में होशियार होने के कारण वह अपनी तैयारी के साथ-साथ दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाता है। इसी दौरान मनोज से संपर्क हुआ जो पढ़ाई में कमजोर है। दोनों की कद काठी और शक्लों में काफी फर्क होते हुए भी विक्रम और मनोज में रीट परीक्षा के लिए 5 लाख में डील हो गई। 50 हजार रूपए विक्रम को अग्रिम दे दिए गए। बाकी 4लाख 50 हजार परिणाम आने पर रीट में चयनित होने पर मनोज और उसके पिता ने विक्रम को देने थे। थाना अधिकारी के अनुसार मनोज ने रीट का फॉर्म भरते समय अपनी तस्वीर लगाई थी।मगर अब परीक्षा के समय ऑनलाइन डाउनलोड किए गए एडमिट कार्ड पर फोटो विक्रम की लगा दी।इसी एडमिट कार्ड पर विक्रम मनोज की जगह परीक्षा दे रहा था। विक्रम का आधार कार्ड करीब 10 वर्ष पहले का बना है। तब वह छोटा था और तस्वीर भी उसमें साफ नहीं है। इसी कारण यह मामला पकड़ में आ गया।थाना अधिकारी ने कहा कि अभी तक की जांच पड़ताल में इन तीनों को ही प्रथम द्रष्टया दोषी मानते हुए हिरासत में लिया गया है। पूछताछ कर पता लगाया जा रहा है कि इस गोरखधंधे में इनके साथ कोई और तो संलिप्त नहीं है।