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पंजाब का रुख कर रहे खिलाड़ी:खिलाड़ी हमारे, शुरुआती ट्रेनिंग राजस्थान में, खेल सुविधाओं और नौकरी की कमी कर रही पलायन को मजबूर

श्रीगंगानगर

राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर पंजाब से महज छह किलोमीटर की दूरी पर है। जिले के लोगों के व्यावसायिक और सामाजिक संबंध पंजाब से हैं। ऐसे में प्रदेश के बहुत से खिलाड़ी शुरुआती ट्रेनिंग तो श्रीगंगानगर में लेते हैं, लेकिन प्रदेश में सुविधाओं की कमी जब उन्हें अखरने लगती है तो पंजाब का रुख कर लेते हैं।

वर्तमान में श्रीगंगानगर के कई खिलाड़ी पंजाब पुलिस में ऊंचे पदों पर हैं। यानी राजस्थान के खिलाड़ियों की धाक पंजाब में भी जमी हुई है। खेल कोटे में पंजाब में नौकरी पाने वाले राजस्थान के कई खिलाड़ी श्रीगंगानगर में खेलने के बाद पंजाब गए और वहां ऊंचे पदों पर सेवा भी दे रहे हैं।

राजस्थान में रही है नौकरी की कमी

श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर क्षेत्र के गांव बारांवाली के मूल निवासी जगदीश बिश्नोई अभी पंजाब पुलिस में तरनतारन में एसपी के तौर पर तैनात है। वे श्रीगंगानगर में एथलेटिक्स के खिलाड़ी रहे हैं।बिश्नोई ने बताया कि कई वर्ष पहले जब उन्होंने पंजाब का रुख किया तो राजस्थान में खिलाड़ियों को नौकरी नहीं मिलती थी। अब नौकरियां तो मिलने लगी लेकिन अब भी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी तो राजस्थान में है, इसी कारण बहुत से खिलाड़ी पंजाब का रुख कर रहे हैं। हमारे यहां पटियाला, लुधियाना और जालंधर में स्पोटर्स एकेडमी है। वहीं पंजाब में खिलाड़ियों को सुविधाएं भी ज्यादा मिलती हैं। इसी कारण खिलाड़ी वहां आने में रुचि रखते हैं।

ये खिलाड़ी गए पंजाब

श्रीगंगानगर के खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि जगदीश बिश्नोई हमारे यहां के खिलाड़ी रहे और पंजाब पुलिस में उन्हें नौकरी मिल गई, जबकि राजस्थान में कुछ वर्ष पहले तक खिलाड़यों को नौकरी की सुविधा नहीं थी। ऐसे ही पंजाब में एसपी लेवल पर काम कर रहे एक अन्य खिलाड़ी सतवीर सिंह ने भी राजस्थान के श्रीगंगानगर से ही ट्रेनिंग ली। इसके अलावा गुरविंद्र सिंह भी एक अन्य नाम है जो पंजाब पुलिस में सेवा दे रहे हैं। वे मूल रूप से हैं श्रीगंगानगर के ही निवासी हैं। गुरविंद्र सिंह चार सौ मीटर दौड़ के खिलाड़ी रहे हैं। ये नाम तो उदाहरण हैं, लेकिन सैकड़ों ऐसे खिलाड़ी हैं जो नौकरी और उच्च ट्रेनिंग की कमी के कारण पंजाब चले गए और वहां के स्पोर्ट्स और अपने डिपार्टमेंट को आगे बढ़ा रहे हैं।

हॉकी, हैंडबॉल, वॉलीबॉल में हो रहा पलायन

श्रीगंगानगर के लोग मजबूत कदकाठी के हैं। ऐसे में हॉकी, हैंडबॉल और वॉलीबाल के खेल की नेचर के कारण यहां के लोग इनमें ज्यादा रुचि लेते हैं। ऐसे में यहां इन खेलों के खिलाड़ियों की संख्या ज्यादा है, लेकिन इन खेलों की सुविधाएं यहां अपेक्षाकृत कम है। जिला खेल अधिकारी सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि हमारे यहां एस्ट्रोटर्फ की सुविधा प्रदेश में एक या दो जगह ही है। ऐसे में श्रीगंगानगर जैसे इलाके के खिलाड़ी पंजाब जाना चाहते हैं जहां नजदीक में इन खेलों के ट्रेनिंग सेंटर हैं।

वे बताते हैं कि वर्तमान दौर में खिलाड़ियों के पलायन का बड़ा कारण नौकरी से ज्यादा पंजाब में मिलने वाले संसाधन हैं। नौकरी में तो अब हमारे यहां भी दो प्रतिशत तक खिलाड़ियों का कोटा तय हो गया है, लेकिन यह सही है कि हमारे यहां संसाधनाें की कमी है। इसी कारण बहुत से खिलाड़ी यहां से पंजाब चले जाते हैं। एथलेटिक्स में अब हमारे यहां स्टेट एकेडमी और सिंथेटिक ट्रैक बनने से पलायन रुका है।

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