जयपुर
राजस्थान में एक बार फिर कोयले की कमी से बिजली संकट गहराने के आसार बनते जा रहे हैं। दरअसल, प्रदेश को फरवरी के बाद पारसा ईस्ट कांटा बेसिन ब्लाॅक से कोयले की आपूर्ति नहीं मिल पाने की आंशका है। ऐसे में अतिरिक्त कोयला आंवटन के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों ने कोल इंडिया लिमिटेड से अतिरिक्त कोयला आंवटन के लिए संपर्क साधना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 2021 के नबंवर महीने में कोयले की कमी के चलते प्रदेश की 7 बिजली यूनिट बंद हो गई थी। जिसके कारण गहलोत सरकार को गांवों के साथ-साथ शहरों में भी बिजली कटौती करनी पड़ी थी।
ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी बोले- केंद्र से संपर्क में
ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने कहा कि केंद्र सरकार से कोयला संकट दूर करने के लिए निरंतर संपर्क में है। फिलहाल पारसा ईस्टर एवं कांटा बेसिन कोल ब्लाॅक से 8 से 9 रैक प्रतिदिन आपूर्ति हो रही है। प्रदेश में कोयला संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसे देखते हुए केंद्र सरकार एवं कोल माइंस से निरंतर समन्वय बनाया जा रहा है। रेलवे से भी रैक की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी तरह का प्रदेश में बिजली संकट नहीं है। राज्य की प्रतिदिन 23 से 25 रैक प्रतिदिन की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि एक रैक में 4 हजार टन कोयला आता है। राज्य के उर्जा विभाग के अनुसार राज्य को कुल एक लाख आठ हजार टन कोयला प्रतिदिन चाहिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया की सहायक एनसीएल, एसईसीएल द्वारा तापीय विद्युत घरों को 9 रैक प्रतिदिन आपूर्ति की जा रही है। फिलहाल पारसा ईस्ट एवं कांटा बेसिन कोल ब्लाॅक से 8 से 9 रैक प्रतिदिन आपूर्ति हो रही है।