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रोजाना साढ़े सात घंटे से कम नींद लेने पर सोचने-समझने की क्षमता और याद्दाश्त घट सकती है

जरूरत से कम और जरूरत से ज्यादा नींद लेना, दोनों ही सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे लोगों में सोचने-समझने की क्षमता घटती है। यह दावा वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ता और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ब्रेंडेन लूसी का कहना है, अधूरी नींद या ठीक से नींद न आने पर सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

दिमाग पर पड़ने वाला यह असर आपकी सोचने-समझने की क्षमता और याद्दाश्त पर दिखता है।

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