सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर। नगर परिषद बोर्ड गठन के 18 माह बाद एक बार नगरपरिषद की राजनीति फिर से गर्मा रही है। बोर्ड गठन के बाद आॅटोटीपर,भू-रूपान्तरण, निर्माण कार्य टेण्डर सहित कई मामलों में हुई शिकायत के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष की आपसी खींचतान और बढ गई। पिछले कुछ माह से नगरपरिषद द्वारा लगाए टेंडरों में हुई शिकायतों के बाद आयुक्त ने कुछ टेंडर निरस्त कर दिए। इसमें से अधिकांश टेंण्डर सत्तापक्ष के पार्षदों के थे। ऐसे में यह खींचतान और बढ गई। शिकायतों के बाद टेण्डर निरस्त करने की प्रक्रिया से नाराज सत्ता पक्ष के पार्षदों ने आनन फानन में बुधवार को प्रेस वार्ता कर इस सबके के लिए पूर्व पार्षद पवन गौड़ और निर्दलीय पार्षद विजेन्द्र स्वामी को जिम्मेवार ठहराया। प्रेस वार्ता में सबसे रोचक बात यह रही है कि इस मामले में मुख्यमंत्री को भेजे जाने वाले पत्र पर भाजपा पार्षदों के भी हस्ताक्षर है। नगर परिषद सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्षदों ने आरोप लगाया कि पूर्व पार्षद पवन गौड़ और निर्दलीय पार्षद विजेन्द्र स्वामी की शिकायतों के कारण शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनकी शिकायतों पर डीएलबी अधिकारी भी तत्काल एक्शन लेते हुए कार्रवाई कर देते हैं। यह सब इनके द्वारा व्हाटसएप पर भेजी शिकायत मात्र से हो जाता है। पार्षदों ने सभी शिकायतों के मामले में जांच किसी ईमानदार अधिकारी से करवाने की बात कही है। इस दौरान 38 जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पार्षद 31 जुलाई को बीकानेर में डीएलबी अधिकारियों की होने वाली बैठक में इस मुद्दे को लेकर शिकायत दर्ज करवाएंगे।