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नेशनल हाईवे पर स्थित ग्राम पंचायत अर्जुनसर स्टेशन में सरकारी जमीन हड़पने का पर्दाफाश

तत्कालीन तहसीलदार, सरपंच और ग्राम सेवक समेत 13 व्यक्तियों पर षडयंत्रपूर्वक धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज
बीकानेर.
जिले में महाजन थाना अंतर्गत नेशनल हाईवे 62 पर स्थित ग्राम पंचायत अर्जुनसर स्टेशन में सरकारी भूमि को हड़पने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। एक तथाकथित भूमि आबादी क्रय विक्रय समिति गठित कर अर्जुनसर की सरकारी जमीन पर पट्टे काट दिए गए। पट्टों की आड़ में जमीन को हड़प लिया गया। इस आरोप में तत्कालीन तहसीलदार,सरपंच और ग्राम सेवक सहित 13 व्यक्तियों के खिलाफ षडयंत्र पूर्वक धोखाधड़ी कूटरचित दस्तावेज बनाने और जालसाजी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार ग्राम पंचायत के गांव सहनीवाला निवासी दिनेश ज्याणी द्वारा दी गई रिपोर्ट पर वर्ष 2016 में महाजन में तहसीलदार नियुक्त रहे जयदीप मित्तल, अर्जुनसर के तत्कालीन सरपंच मघाराम मारोठिया, उसकी पत्नी विमला देवी, पुत्र नरेंद्र कुमार, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी सतवीरसिंह समेत 13 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। दिनेश ज्याणी ने दर्ज करवाए मुकदमे में बताया है कि तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने मिलीभगत एवं सांठगांठ कर एक फर्जी आबादी भूमि क्रय विक्रय समिति बनाई।इसका अध्यक्ष तत्कालीन एट वार्ड पंच रामदयाल को बनाया गया। उसके नाम की रबड़ स्टैंप और उसके फर्जी हस्ताक्षर कर इन लोगों ने अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पीछे की तारीख में फर्जी पट्टे बनाकर सरकार को भारी राजस्व की हानि पहुंचाई है।

पुलिस के अनुसार मुकदमे में दिनेश ज्याणी ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत अर्जुनसर स्टेशन, पंचायत समिति लूणकरणसर के तत्कालीन सरपंच मघाराम मारोठिया, ग्राम विकास अधिकारी सतवीरसिंह ने षडयंत्रपूर्वक एक तत्कालीन वार्ड पंच के कूटरचित हस्ताक्षर कर 6 जून 2016 को एक ही दिन में पीछे की तारीख में कई पट्टे बनाए। तत्कालीन तहसीलदार जयदीप मित्तल की मिलीभगत होने के कारण इन पट्टों की रजिस्ट्री भी एक ही दिन हो गई। जानकारी के अनुसार जिस जगह के यह फर्जी पट्टे काटे गए हैं, उसकी कीमत बहुत ज्यादा है। कुछ समय पहले नेशनल हाईवे 62 को फोरलेन में तब्दील करने का कार्य
पूरा हुआ है।थाना प्रभारी रमेश कुमार खुद इस मामले की जांच कर रही है।

इन लोगों के नाम बने हैं फर्जी पट्टे

दिनेश ने मुकदमे में बताया है कि ग्राम पंचायत की बुक नंबर 2017 में पट्टा नंबर 18 विमला देवी पत्नी मघाराम मारोठिया के नाम से फर्जी तरीके से काटा गया है। इस पर ग्राम सेवक सतवीरसिंह ने हस्ताक्षर किए हैं। साथ में मघाराम मारोठिया ने तत्कालीन वार्ड पंच रामदयाल के फर्जी हस्ताक्षर करवाए हैं। इस पट्टे की उसी दिन ही रजिस्ट्री हो गई। पट्टे की असल के रूप में पहचान मघाराम का पुत्र नरेंद्र और पत्नी विमला देवी ने की है। इसी दिन बुक नंबर 217 में पट्टा नंबर 14 विकास पुत्र बनवारीलाल के नाम से काटा गया। इस पर भी ग्रामसेवक सतवीरसिंह, मघाराम मारोठिया और रामदयाल के हस्ताक्षर हैं। असल के रूप में इसकी पहचान अलादीन और ओमप्रकाश ने की है। 6 जून को ही बुक नंबर 217 में हरपालसिंह पुत्र करतार सिंह के नाम से पट्टा नंबर 13 काटा गया। इसकी पहचान करने वालों में विकास पुत्र बनवारीलाल तथा जसविंदरसिंह पुत्र जगराजसिंह है। 6 जून को ही बुक नंबर 217 में सरोजबाला पत्नी मनीष के नाम से पट्टा नंबर 15 जारी किया गया। सरोज बाला मघाराम की पुत्री है। इस पट्टे की पहचान विकास और मनीष पुत्र बनवारी लाल ने की है। मुख्य आरोपी पूर्व सरपंच मघाराम भाजपा का नेता बताया जा रहा है।

प्रक्रिया को रखा ताक पर

सरकारी भूमि पर यह फर्जी पट्टे काटने के लिए तत्कालीन सरपंच ग्राम सेवक ने सारी प्रक्रिया को ताक पर रख दिया। तहसीलदार ने भी आंखें मूंद कर रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर कर दिए। प्रक्रिया के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा जब भूमि या भूखंड का आवंटन किया जाता है, तो उसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाया जाना भी जरूरी होता है।दैनिक समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करवा कर ग्राम पंचायत की कौरम से और ग्राम वासियों से आपत्ति मांगी जाती है।ग्राम पंचायत अर्जुनसर के इस मामले में सरपंच और ग्राम सेवक ने पंचायत राज अधिनियम के नियमों और प्रक्रियाओं की बिल्कुल अनदेखी कर दी गई। दिनेश ज्याणी ने बताया है कि विगत एक जुलाई को पंचायत कार्यालय अर्जुनसर स्टेशन में पत्तों से संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण किया तो उसे इन फर्जी पट्टों की जानकारी हुई।

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