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पोस्ट कोविड का असर:रिकवरी के 30 दिन बाद मरीजों में बाल टूटने के मामले बढ़ रहे, इसकी वजह हार्मोन में बदलाव, वजन घटना और पोषक तत्वों की कमी

पोस्ट कोविड का असर:रिकवरी के 30 दिन बाद मरीजों में बाल टूटने के मामले बढ़ रहे, इसकी वजह हार्मोन में बदलाव, वजन घटना और पोषक तत्वों की कमी

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कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में हेयरफॉल के मामले बढ़ रहे हैं। दूसरी लहर में वायरस को मात देने वाले लोगों में स्किन एलर्जी, रैशेज, कमजोरी, थकान, ड्राय आइस के बाद अब बालों के टूटने के लक्षण भी दिख रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है, ऐसे मरीजों में रिकवरी के 30 दिन बाद बालों में कमी आ रही है। वहीं, कुछ मरीजों में कोविड के दौरान भी ऐसे मामले सामने आए थे। कुछ मरीजों के खानपान में पोषक तत्वों की कमी, बुखार, तनाव, बेचैनी और हार्मोन में बदलाव भी हेयरफॉल की वजह हो सकती है। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जन डॉ. शाहीन नूरेएजदान कहती हैं, ऐसे मरीजों की संख्या में दोगुनी हो गई है। इसकी वजह पोस्ट कोविड इंफ्लेमेशन है। वजन में बदलाव, विटामिन-डी और बी-12 की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। डाइट में प्रोटीन जरूर लेंसीनियर कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह क...
सुई और साइड इफेक्ट के डर ने बढ़ाई बेचैनी:वैक्सीन लगने के बाद 30% तक साइडइफेक्ट की वजह है बेचैनी, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा; भारतीय इम्युनाइजेशन कमेटी की रिसर्च

सुई और साइड इफेक्ट के डर ने बढ़ाई बेचैनी:वैक्सीन लगने के बाद 30% तक साइडइफेक्ट की वजह है बेचैनी, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा; भारतीय इम्युनाइजेशन कमेटी की रिसर्च

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वैक्सीन लगने के बाद 30 फीसदी से अधिक लोगों में साइड इफेक्ट की वजह है बेचैनी। यह खुलासा वैक्सीन के साइड इफेक्ट पर रिसर्च करने वाली नेशनल एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्युनाइजेशन कमेटी ने किया है। कमेटी ने ऐसे 88 मामलों पर स्टडी की। इनमें से 22 मामलों में साइड इफेक्ट की वजह बेचैनी सामने आई। 28 जून को स्टडी पूरी होने के बाद नतीजे जारी किए गए हैं। महिलाओं में बेचैनी के मामले ज्यादारिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बेचैनी के मामले अधिक सामने आए हैं। इस बेचैनी की एक बड़ी वजह है सुई से लगने वाला डर। इसे नीडिल फोबिया कहते हैं। जिन 22 लोगों को बेचैनी की शिकायत हुई उनमें से 16 लोगों ने कोविशील्ड लगवाई और बाकियों ने कोवैक्सीन का डोज लिया था। एक्सपर्ट कहते हैं, इस तरह की बेचैनी को पोस्ट वैक्सीनेशन का साइड इफेक्ट नहीं मानना चाहिए। कोविड की वैक्सीन अभी नई है इसके कितने साइड इफेक...
सुई और साइड इफेक्ट के डर ने बढ़ाई बेचैनी:वैक्सीन लगने के बाद 30% तक साइडइफेक्ट की वजह है बेचैनी, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा; भारतीय इम्युनाइजेशन कमेटी की रिसर्च

सुई और साइड इफेक्ट के डर ने बढ़ाई बेचैनी:वैक्सीन लगने के बाद 30% तक साइडइफेक्ट की वजह है बेचैनी, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा; भारतीय इम्युनाइजेशन कमेटी की रिसर्च

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वैक्सीन लगने के बाद 30 फीसदी से अधिक लोगों में साइड इफेक्ट की वजह है बेचैनी। यह खुलासा वैक्सीन के साइड इफेक्ट पर रिसर्च करने वाली नेशनल एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्युनाइजेशन कमेटी ने किया है। कमेटी ने ऐसे 88 मामलों पर स्टडी की। इनमें से 22 मामलों में साइड इफेक्ट की वजह बेचैनी सामने आई। 28 जून को स्टडी पूरी होने के बाद नतीजे जारी किए गए हैं। महिलाओं में बेचैनी के मामले ज्यादारिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बेचैनी के मामले अधिक सामने आए हैं। इस बेचैनी की एक बड़ी वजह है सुई से लगने वाला डर। इसे नीडिल फोबिया कहते हैं। जिन 22 लोगों को बेचैनी की शिकायत हुई उनमें से 16 लोगों ने कोविशील्ड लगवाई और बाकियों ने कोवैक्सीन का डोज लिया था। एक्सपर्ट कहते हैं, इस तरह की बेचैनी को पोस्ट वैक्सीनेशन का साइड इफेक्ट नहीं मानना चाहिए। कोविड की वैक्सीन अभी नई है इसके कितने साइड इफेक...
कनाडा में दुर्लभ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का मामला:12 साल के बच्चे की जुबान पीली पड़ी, रोगों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम हुआ बेकाबू; जांच में एप्सटीन-बार वायरस की पुष्टि हुई

कनाडा में दुर्लभ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का मामला:12 साल के बच्चे की जुबान पीली पड़ी, रोगों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम हुआ बेकाबू; जांच में एप्सटीन-बार वायरस की पुष्टि हुई

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कनाडा में 12 साल के एक बच्चे में दुर्लभ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर 'कोल्ड एग्लूटीनिन' का मामला सामने आया है। इससे जूझ रहे बच्चे की जुबान चटक पीली हो गई है। डॉक्टर्स का कहना है, इस बीमारी में रोगों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम ही शरीर पर हमला करने लगता है और लाल रक्त कोशिकाओं को खत्म करने लगता है। इस बीमारी की वजह एप्सटीन-बार वायरस का संक्रमण हो सकता है। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के गले में खराश, पीली पेशाब, पेट में दर्द और स्किन पीली पड़ने पर उसे कनाडा के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स के मुताबिक, जब बच्चे हो हॉस्पिटल लाया गया तो पीलिया होने की आशंका जताई गई थी। बेकाबू हुए इम्यून सिस्टम को कंट्रोल किया गयाजांच करने के बाद पता चला कि बच्चे में एनीमिया के साथ एप्सटीन-बार वायरस का संक्रमण भी हुआ है। एप्सटीन-बार ऐसा वायरस है जो आमतौर पर बच्चो...
शराब है खराब:10 साल तक अल्कोहल लेने वालों में खतरनाक वायरस हेपेटाइटिस-सी के संकमण का खतरा 2 गुना और लिवर कैंसर की आशंका 5 गुना ज्यादा

शराब है खराब:10 साल तक अल्कोहल लेने वालों में खतरनाक वायरस हेपेटाइटिस-सी के संकमण का खतरा 2 गुना और लिवर कैंसर की आशंका 5 गुना ज्यादा

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देश में हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट इसे साइलेंट किलर कहते हैं क्योंकि इसका संक्रमण होने पर लक्षण कई सालों बाद दिखते हैं। इस वायरस को इसलिए भी खतरनाक कहा जाता है क्योंकि यह दूसरी कई बीमारियों को जन्म देता है। हेपेटाइटिस-सी का अगर समय पर इलाज नहीं कराते हैं तो लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ता है। ऐसे मरीजों की हालत बिगड़ने के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर है शराब। रिसर्च में साबित हुआ है कि जो लोग दस साल तक रोजाना 80 एमएल से अधिक अल्कोहल लेते हैं उनमें लिवर कैंसर होने का खतरा 5 गुना ज्यादा होता है। संक्रमण होने का खतरा दोगुना ज्यादा आज वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे है, इस मौके पर फोर्टिस कैंसर इंस्टीट्यूट में ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राजीव बेदी ने बताया, अल्कोहल हेपेटाइटिस-सी के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। जो मरीज संक्रमित हो चुके हैं, उसमें अल्कोहल हिपेटोसैल्युलर कार्सि...
हजारों साल पुरानी बीमारी के लिए वैक्सीन बनी:कोरोना वैक्सीन के मॉडल पर तैयार हुआ प्लेग का टीका, एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के गांवों में इसके मामले सबसे ज्यादा

हजारों साल पुरानी बीमारी के लिए वैक्सीन बनी:कोरोना वैक्सीन के मॉडल पर तैयार हुआ प्लेग का टीका, एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के गांवों में इसके मामले सबसे ज्यादा

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हजारों साल पुरानी बीमारी प्लेग के लिए ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाई है। कोरोना वैक्सीन के मॉडल पर तैयार हुई इस वैक्सीन के पहले फेज का ट्रायल जल्द शुरू होगा। इसमें 18 से 55 साल की उम्र के 40 लोगों को शामिल किया जाएगा। ट्रायल के दौरान वैक्सीन के साइड इफेक्ट और बीमारी से लड़ने के लिए बनने वाली एंटीबॉडी कितनी असरदार है, इसे समझा जाएगा। प्लेग की वैक्सीन इसलिए जरूरी है क्योंकि आज भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। प्लेग के सबसे ज्यादा मामले अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में देखे जाते हैं। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के डायरेक्टर, सर एंड्रयू पोलार्ड का कहना है, महामारी ने लोगों को वैक्सीन का महत्व समझाया है और बताया है कि बैक्टीरिया-वायरस के खतरों से बचना कितना जरूरी है। हजारों सालों से इंसान प्लेग से जूझते आए हैं और आज भी इसका खौफ जारी है। इसलिए इससे बचाने के...
बढ़ रही भूलने की बीमारी:2050 तक दुनिया में तीन गुना बढ़ जाएंगे डिमेंशिया के मरीज, 15 करोड़ से अधिक हो जाएगी मरीजों की संख्या; अमेरिकी वैज्ञानिकों का अनुमान

बढ़ रही भूलने की बीमारी:2050 तक दुनिया में तीन गुना बढ़ जाएंगे डिमेंशिया के मरीज, 15 करोड़ से अधिक हो जाएगी मरीजों की संख्या; अमेरिकी वैज्ञानिकों का अनुमान

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दुनियाभर में चीजों को भूलने यानी याद्दाश्त घटने की बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे डिमेंशिया कहते हैं। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2050 तक दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीज तीन गुना बढ़ जाएंगे। ऐसे मरीजों की संख्या बढ़कर 15 करोड़ से अधिक हो जाएगी। इसके सबसे ज्यादा मामले ईस्टर्न, सब-सहारा अफ्रीका, नॉर्थ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, हर साल डिमेंशिया के 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च के मुताबिक, लोगों को शिक्षित करके 2050 तक इसके 60.2 लाख मामलों को बढ़ने रोका भी जा सकता है। इस रिसर्च के परिणाम पॉलिसीमेकर्स को नई रणनीति बनाने में मदद करेंगे ताकि इसके मामलों को बढ़ने से रोका जा सके। 2019 में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 5 करोड़ से अधिक थी। अगले तीन दशकों बाद यह आंकड़ा 15 कर...
लिवर को डैमेज कर रहा कोरोना:हेपेटाइटिस के मरीजों में कोरोना का संक्रमण हुआ तो मौत का खतरा बढ़ता है, एक्सपर्ट से जानिए कोविड के दौर में इस बीमारी से कैसे बचें

लिवर को डैमेज कर रहा कोरोना:हेपेटाइटिस के मरीजों में कोरोना का संक्रमण हुआ तो मौत का खतरा बढ़ता है, एक्सपर्ट से जानिए कोविड के दौर में इस बीमारी से कैसे बचें

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हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण के कारण लिवर का बीमार हो जाना आम है। हेपेटाइटिस के 5 वायरस हैं और इसे ए, बी, सी, डी और ई नाम दिया गया है। महामारी के इस दौर में कोरोना और हेपेटाइटिस के मरीजों के बीच कनेक्शन को समझना जरूरी है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी कहती है, हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों में अगर कोरोना का संक्रमण हुआ तो हालत बेहद नाजुक बन सकती है। मौत का खतरा बढ़ता है। इतना ही नहीं, कोविड के कई मरीजों में कोरोना उनके लिवर को अस्थायी तौर पर डैमेज कर देता है। इसलिए लिवर के मरीज और स्वस्थ लोगों, दोनों को इसका ख्याल रखना जरूरी है। लिवर और कोरोना की बात इसलिए क्योंकि आज वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे है। चूंकि, हेपेटाइटिस के वायरस 5 तरह के होते हैं, इसलिए इनके संक्रमण का तरीका और लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल के गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल कंसल्टेंट डॉ. विवेक शेट्टी से जा...
महिलाओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:मोटापे से परेशान गर्भवती महिलाओें के बच्चों में मानसिक रोग होने का खतरा 60 फीसदी तक ज्यादा, फिनलैंड के शोधकर्ताओं का दावा

महिलाओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:मोटापे से परेशान गर्भवती महिलाओें के बच्चों में मानसिक रोग होने का खतरा 60 फीसदी तक ज्यादा, फिनलैंड के शोधकर्ताओं का दावा

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मोटापे से परेशान गर्भवती महिलाओं के बच्चों को 60 फीसदी तक मानसिक रोग होने का खतरा रहता है। 1950 से 1999 के बीच 68,571 बच्चे और मां पर हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च करने वाली फिनलैंड की हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, 1975 से 1999 के बीच ओवरवेट महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। जब ये बच्चे वयस्क बने तो इनमें से 60 फीसदी में सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां देखी गईं। सिर्फ ओवरवेट ही नहीं अंडरवेट महिलाओं के बच्चों में भी ऐसा देखा गया। ऐसी अंडरवेट महिलाएं जिनका प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी मास इंडेक्स 18.5 से कम था, उनके बच्चों में मेंटल डिसऑर्डर होने का खतरा 74 फीसदी तक था। हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी की सायकोलॉजिस्ट मारियस लाहटी का कहना है, रिसर्च के दौरान हमें बीएमआई, प्रेग्नेंसी और उनके बच्चों को होने वाली मानसिक बीमारी के बीच एक कनेक्शन मिला। गर्भवती में बढ़ते ...
अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा:दुनियाभर में हर साल 9 लाख लोग समय से पहले दम तोड़ देते हैं, इसकी वजह पेंट और कीटनाशकों के कारण बढ़ने वाला एयर पॉल्यूशन

अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा:दुनियाभर में हर साल 9 लाख लोग समय से पहले दम तोड़ देते हैं, इसकी वजह पेंट और कीटनाशकों के कारण बढ़ने वाला एयर पॉल्यूशन

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पेंट और कीटनाशकों के कारण से हर साल दुनियाभर में 9 लाख लोग समय से पहले दम तोड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, पेंट और कीटनाशकों से बढ़ने वाले एयर पॉल्युशन के बारीक कण नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह दावा अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। इन कणों के कारण हर साल 3.4 लाख से लेकर 9 लाख तक लोगों की प्री-मैच्योर डेथ हो रही है। शोधकर्ता बेंजामिन नॉल्ट का कहना है, जितनी मौतों का अनुमान लगाया गया था यह आंकड़ा उससे कई गुना ज्यादा है। ऑर्गेनिक एयरोसॉल को रोकने की जरूरतइससे पहले हुई रिसर्च में कहा गया था कि प्रदूषण के बारीक कण (पीएम 2.5) के कारण हर साल दुनियाभर में 30 से 40 लाख मौतें हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए कई देशों ने अपने यहां गाइडलाइन में बदलाव किया था। इन कणों के लिए एक लिमिट तय की थी। इन गाइडलाइन में पॉवर प्लांट, डीजल एक्लॉस्ट और जीवाश्म ईधन से...