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चावल के शौकीनों को अलर्ट करने वाली रिसर्च:हड़बड़ी में बनाए गए चावल खाने से हो सकता है कैंसर, इंग्लैंड के वैज्ञानिकों की रिसर्च; जानिए कब और कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा

चावल के शौकीनों को अलर्ट करने वाली रिसर्च:हड़बड़ी में बनाए गए चावल खाने से हो सकता है कैंसर, इंग्लैंड के वैज्ञानिकों की रिसर्च; जानिए कब और कैसे बढ़ता है कैंसर का खतरा

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अगर आप चावल के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए है। इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने चावल से कैंसर होने का खतरा जताया है। वैज्ञानिकों का कहना है, मिट्टी में पहुंचने वाले कीटनाशक और जहरीले केमिकल चावल खाने वालों के लिए नया खतरा पैदा कर रहे हैं। मिट्टी के जरिए चावल में पहुंचने वाला आर्सेनिक तत्व कैंसर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, अधपके या देर तक पानी में न भीगे चावल खाने से कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसे हड़बड़ी में तैयार करने से बचें। चावल से बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ रहा है, इसे कैसे कम कर सकते हैं और भारतीय लोगों को क्यों अलर्ट करने की जरूरत है, जानिए, इन सभी सवालों के जवाब..... यह खतरा क्यों बढ़ रहा है?वैज्ञानिकों का कहना है, खतरे की सबसे बड़ी वजह है आर्सेनिक। इसके दो कारण है। पहला, यह लगभग हर पेस्टिसाइड्स और इसेक्टिसाइड्स में पाया जाता है। खेती-किसानी में इनका ...
राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली सस्ती और असरदार दवा 'स्टेटिंस' से आंतों की बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज भी किया जा सकता है। इस दवा के जरिए अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है। यह दावा कैलिफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने रोकती है और सर्जरी का खतरा घटाती है। हालांकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि यह दवा कैसे हालत सुधारती है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आंतों की सूजन को बढ़ने से रोकती है। क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिसअल्सरेटिव कोलाइटिस आंतों की समस्या है, जिसमें बड़ी आंत में सूजन और जलन की शिकायत होती है। इस बीमारी में कोलन में छाले हो जाते हैं और उस हिस्से में सूजन रहती है। अगर समय रहते इस बीमारी के लक्षणों को पहच...
राहत देने वाली रिसर्च:कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा ‘स्टेटिंस’ से हो सकेगा अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज, यह आंतों की सूजन घटाने के साथ सर्जरी का खतरा कम करती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली सस्ती और असरदार दवा 'स्टेटिंस' से आंतों की बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज भी किया जा सकता है। इस दवा के जरिए अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है। यह दावा कैलिफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने रोकती है और सर्जरी का खतरा घटाती है। हालांकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि यह दवा कैसे हालत सुधारती है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आंतों की सूजन को बढ़ने से रोकती है। क्या है अल्सरेटिव कोलाइटिसअल्सरेटिव कोलाइटिस आंतों की समस्या है, जिसमें बड़ी आंत में सूजन और जलन की शिकायत होती है। इस बीमारी में कोलन में छाले हो जाते हैं और उस हिस्से में सूजन रहती है। अगर समय रहते इस बीमारी के लक्षणों को पहच...
साइलेंट किलर को ऐसे करें कंट्रोल:ब्लड प्रेशर से देश में हर साल 16 लाख से ज्यादा मौतें, यह दिल, किडनी और ब्रेन के लिए खतरनाक; इसे 2-3-4 फॉर्मूले से करें कंट्रोल

साइलेंट किलर को ऐसे करें कंट्रोल:ब्लड प्रेशर से देश में हर साल 16 लाख से ज्यादा मौतें, यह दिल, किडनी और ब्रेन के लिए खतरनाक; इसे 2-3-4 फॉर्मूले से करें कंट्रोल

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देश में हर साल औसतन 16 लाख से ज्यादा मौतें ब्लड प्रेशर से होने वाली समस्याओं के कारण हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर की समस्या लगातार बनी रहने के कारण मस्तिष्क, दिल और किडनी जैसे अंग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। तनाव, संक्रमण, कुछ दवाइयां और यहां तक कि पानी की कमी के कारण भी ब्लड प्रेशर गड़बड़ हो सकता है। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को इसका पता ही नहीं चलता और आगे चलकर यह गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। इसीलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। लीलावती एंड रिलायंस हॉस्पिटल मुंबई, के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत आर मेनन कहते हैं ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह कई बीमारियों को बढ़ावा देता है। इसे कंट्रोल करने के लिए 2-3-4 का यह फॉर्मूला कारगर साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर क्या है, कौन से लक्षण हाई और लो-ब्लड प्रेशर का इशारा करते ह...
WHO और ILO की चौंकाने वाली रिपोर्ट:देर तक नौकरी करने की मजबूरी और वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन व शोर के कारण 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा

WHO और ILO की चौंकाने वाली रिपोर्ट:देर तक नौकरी करने की मजबूरी और वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन व शोर के कारण 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा

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वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन, शोर और देर तक काम करने जैसे रिस्क फैक्टर कर्मचारियों की जान ले रहे हैं। जॉब के दौरान होने वाली बीमारियां और इंजरी मौत की वजह बन रही हैं। 2016 में इसके कारण दुनियाभर में 20 लाख लोगों ने दम तोड़ा। वर्कप्लेस पर अलग-अलग दिक्कतों से जूझने वाले कर्मचारियों पर पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) ने जॉइंट रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 से 2016 के बीच काम के दौरान कर्मचारियों को होने वाली बीमारियों और इंजरीज की मॉनिटरिंग की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे ज्यादा कर्मचारियों की मौत सांस और हृदय रोगों से हुईं। सबसे ज्यादा मौतें देर तक काम करने के कारण रिपोर्ट कहती है, 7.50 लाख मौतों का सम्बंध अधिक समय तक काम करने से है। वहीं, 4.50 लाख मौतें वर्कप्लेस पर एयर पॉल्यूशन (पीएम पार्टिकल्स, गैस) के कारण हुईं। सबस...
देश का पहला ऐसा मामला:कोविड से रिकवर हुए 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में हुआ गैंगरीन, डॉक्टर्स की सलाह; बुखार, पेट में दर्द और उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें

देश का पहला ऐसा मामला:कोविड से रिकवर हुए 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में हुआ गैंगरीन, डॉक्टर्स की सलाह; बुखार, पेट में दर्द और उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें

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कोरोना से रिकवर हो चुके दिल्ली के 5 मरीजों के गॉलब्लैडर में गैंगरीन होने का मामला सामने आया है। इनमें 4 पुरुष और एक महिला है। मरीजों की सर्जरी दिल्ली के सरगंगाराम अस्पताल में की गई। डॉक्टर्स का कहना है, संभवत: यह देश का पहला ऐसा मामला है, जब कोरोना को मात देने के बाद मरीज गैंगरीन से जूझ रहे थे। पांचों मरीजों की सर्जरी हुईपांचों मरीजों की उम्र 37 से 75 साल के बीच है। हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड गेस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है, जून से अगस्त के बीच ऐसे मरीज देखे गए हैं। पांचों मरीजों की पित्त की थैली गल गई थी। इसमें से चार मरीज ऐसे थे, जिनकी थैली फट चुकी थी। इसलिए और तुरंत सर्जरी कर इनकी जान बचाई गई। गॉलब्लैडर में सूजन थी डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है, कोविड से रिकवर होने के बाद मरीजों के गॉलब्लैडर में गंभीर सूजन थी। पेट का अल्ट्रासाउंड और सीटी स...
लम्बाई से भी है आपकी बीमारियों का कनेक्शन:कम लम्बाई वालों को डायबिटीज, गंजेपन और हृदय रोगों का खतरा, लम्बे लोगों में कैंसर होने की आशंका ज्यादा, जानिए किसे बीमारियों का खतरा अधिक

लम्बाई से भी है आपकी बीमारियों का कनेक्शन:कम लम्बाई वालों को डायबिटीज, गंजेपन और हृदय रोगों का खतरा, लम्बे लोगों में कैंसर होने की आशंका ज्यादा, जानिए किसे बीमारियों का खतरा अधिक

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इंसान में होने वाली बीमारियों और लम्बाई के बीच भी एक कनेक्शन होता है। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में इस पर मुहर भी लगाई है। रिसर्च के मुताबिक, लम्बी औरतों में कैंसर होने का खतरा अधिक होता है वहीं, कम लम्बाई वाली औरतों में प्री-मैच्योर डिलीवरी की आशंका रहती है। अगर पुरुषों की बात करें तो कम लम्बाई वालों में समय से पहले गंजेपन का रिस्क रहता है और लम्बे पुरुषों में रक्त के थक्के जमने का खतरा रहता है। सेहत के नजरिए से लम्बाई के अपने फायदे और नुकसान हैं। जानिए आपको बीमारियों से कितनी राहत या कितना खतरा है......
ICMR की प्रेग्नेंट महिलाओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:कोरोना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को संक्रमित कर सकता है, पहले से कोविड पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं को तत्काल देखभाल की जरूरत

ICMR की प्रेग्नेंट महिलाओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:कोरोना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को संक्रमित कर सकता है, पहले से कोविड पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं को तत्काल देखभाल की जरूरत

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कोविड बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को संक्रमित कर सकता है। इनमें हल्के या गंभीर लक्षण दिख सकते हैं। कोरोना से संक्रमित गर्भवती महिलाओं को तत्काल इलाज की जरूरत है। इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने अपनी हालिया रिसर्च में गर्भवती महिलाओं के लिए अलर्ट जारी किया है। ICMR ने यह स्टडी महाराष्ट्र में गर्भवती महिलाओं पर की है। आईसीएमआर ने क्यों की यह स्टडी?गर्भवती महिलाओं में कोविड का संक्रमण होने पर क्या असर हो सकता है, इसे समझने के लिए ICMR ने पहली इस तरह की स्टडी की। रिसर्च के लिए PregCovid रजिस्ट्री पोर्टल पर मौजूद आंकड़ों की एनालिसिस की गई। यह पोर्टल गर्भवती महिलाएं और कोविड से संक्रमित गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड रखता है रिसर्च की 6 बड़ी बातें 4203 गर्भवती महिलाओं पर हुई रिसर्च: रिसर्च के लिए महामारी की पहली लहर (मार्च 2020-जनवरी 2021) के दौरान रजिस्टर्ड हुईं 4,203 गर्भव...
फ्रांस के शोधकर्ताओं का दावा:झुर्रियां रोकने वाला बोटॉक्स इंजेक्शन कोविड भी रोक सकता है, यह इंजेक्शन उस केमिकल को रोकता है जो कोरोना को संक्रमण फैलाने में मदद करता है

फ्रांस के शोधकर्ताओं का दावा:झुर्रियां रोकने वाला बोटॉक्स इंजेक्शन कोविड भी रोक सकता है, यह इंजेक्शन उस केमिकल को रोकता है जो कोरोना को संक्रमण फैलाने में मदद करता है

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झुर्रियों को रोकने वाला बोटॉक्स इंजेक्शन कोविड होने से रोक सकता है। यह दावा फ्रांस के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, पिछले साल जुलाई में बोटॉक्स का इंजेक्शन लेने वाले करीब 200 मरीजों पर रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि मात्र 2 लोगों ही कोरोना के लक्षण दिखे। रिसर्च करने वाली फ्रांस के मॉन्टिपेलियर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों का कहना है, बोटॉक्स इंजेक्शन कोरोना से बचाने में मदद कर सकता है। इस पर और स्टडी की जा रही है। बोटॉक्स कैसे कोरोना को रोकता है?शोधकर्ताओं का कहना है, एसिटिलकोलीन केमिकल के कारण मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और झुर्रियां दिखती हैं। बोटॉक्स इंजेक्शन इसी केमिकल को बढ़ने से रोकता है और मांसपेशियों को रिलैक्स करता है। रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोनावायरस इसी एसिटिलकोलीन केमिकल के साथ जुड़कर कोशिकाओं को संक्रमित करता...
आंख के रोगों से डिमेंशिया का कनेक्शन:आंखों की बीमारी होने पर 61 फीसदी तक याद्दाश्त घटने का खतरा, दिल की बीमारी या डिप्रेशन होने पर रिस्क और बढ़ता है; जानिए ऐसा क्यों होता है

आंख के रोगों से डिमेंशिया का कनेक्शन:आंखों की बीमारी होने पर 61 फीसदी तक याद्दाश्त घटने का खतरा, दिल की बीमारी या डिप्रेशन होने पर रिस्क और बढ़ता है; जानिए ऐसा क्यों होता है

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आंखों में समस्या होने पर डिमेंशिया यानी याद्दाश्त घटने का खतरा बढ़ता है। ऐसे मरीज जिनकी आंखों की रोशनी घट रही है उनकी मेमोरी और सोचने-समझने की क्षमता घट सकती है। यह रिसर्च करने वाली चीन की गुआंगडोंग एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस के शोधकर्ताओं का कहना है, बढ़ती उम्र में आंखों की बीमारियों का कनेक्शन बुजुर्गों की घटती याद्दाश्त से है, लेकिन ऐसा क्यों है यह बात साफतौर पर सामने नहीं आ पाई है। 12,364 बुजुर्गों पर ऐसे हुई रिसर्चआंख और ब्रेन के इस कनेक्शन को समझने के लिए स्टडी की गई। रिसर्च में 55 से 73 साल के 12,364 लोगों को शामिल किया गया। रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया कि बढ़ती उम्र में होने वाली आंखों की बीमारी से याद्दाश्त घटने का खतरा बढ़ता है। जैसे- मैकुलर डीजेनेरेशन के मरीजों में 26 फीसदी तक डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था। वहीं, मोतियाबिंद के मरीजों में 11 फीसदी और डायबिटीज व आंखों की समस्या से जू...