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लॉन्ग कोविड कब हो सकता है:संक्रमण के पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द और सांस से जुड़ी दिक्कत जैसे 5 लक्षण दिखने पर लॉन्ग कोविड होने का खतरा, ब्रिटिश शोधकर्ताओं का दावा

लॉन्ग कोविड कब हो सकता है:संक्रमण के पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द और सांस से जुड़ी दिक्कत जैसे 5 लक्षण दिखने पर लॉन्ग कोविड होने का खतरा, ब्रिटिश शोधकर्ताओं का दावा

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कौन से लक्षण बताते हैं कि मरीज लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकता है, इसे समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण होने के बाद पहले ही हफ्ते में कोरोना से जुड़े 5 लक्षण दिखते हैं तो मरीज को लॉन्ग कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन 5 लक्षणों में थकान, सिरदर्द, सांस से जुड़ी समस्या, बुखार और पेट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं। रिसर्च करने वाली ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, कोरोना पीड़ितों से जुड़े डाटा की मदद से लॉन्ग कोविड के 10 लक्षण भी बताए गए हैं। इनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, स्वाद और खुशबू का न मिल पाना शामिल हैं। क्या है लॉन्ग कोविडलॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दि...
मेडिकल साइंस का कमाल:शादी के 8 साल बाद भी बच्चे नहीं हुए तो आईवीएफ तकनीक अपनाई, 3 भ्रूण से जन्मे 4 बच्चे; एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल से समझिए ऐसा कैसे हुआ

मेडिकल साइंस का कमाल:शादी के 8 साल बाद भी बच्चे नहीं हुए तो आईवीएफ तकनीक अपनाई, 3 भ्रूण से जन्मे 4 बच्चे; एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल से समझिए ऐसा कैसे हुआ

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3 भ्रूण से 4 बच्चों के जन्म होने का मामला सामने आया है। शादी के 8 साल बाद तक बच्चा न होने पर एक महिला ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाई और 4 बच्चों को जन्म दिया। 4 बच्चों के जन्म होने पर इन्हें क्वाड्रप्लेट्स कहा जाता है। ट्रीटमेंट करने वाली इनफर्टिलिटी और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. गौरी अग्रवाल का कहना है, पूरी प्रोसेस से पहले कपल की काउंसिलिंग की गई और उन्हें इसके लिए राजी किया गया। 3 भ्रूण से 4 बच्चे कैसे जन्मे, इसे समझिएडॉ. गौरी अग्रवाल का कहना है, आईवीएफ प्रक्रिया की शुरुआत में महिला में इम्प्लांट करने के लिए 3 भ्रूण तैयार किए गए। भ्रूण इम्प्लांट करने के 16 हफ्तों बाद महिला की सर्विकल स्टिचिंग की गई। गर्भ में पल रहे 3 भ्रूण में से एक भ्रूण दो हिस्सों में बंट गया और एक नए बच्चे में तब्दील हो गया। इस तरह 3 भ्रूण से 4 बच्चे गर्भ में पलने लगे। इसके बाद डिलीवरी तक महिला की जांच और हर छोटे-बड़े बदलाव प...
अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:कोलेस्ट्रॉल की दवा ‘स्टेटिन्स’ कोरोना मरीजों में मौत का खतरा 41% तक घटाती है, यह अंदरूनी सूजन को रोकती है

अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा:कोलेस्ट्रॉल की दवा ‘स्टेटिन्स’ कोरोना मरीजों में मौत का खतरा 41% तक घटाती है, यह अंदरूनी सूजन को रोकती है

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कोलेस्ट्रॉल को घटाने की दवा 'स्टेटिन्स' कोरोना से होने वाली मौत का खतरा 41 फीसदी तक घटा देती है। नेशनल अमेरिकन रजिस्ट्री के आंकड़ों से इसकी पुष्टि भी हुई है। रिसर्च करने वाले सैनडिएगो के शोधकर्ताओं का कहना है, हमनें रिसर्च में ऐसे मरीजों का डाटा शामिल किया है जो कोरोना होने से पहले स्टेटिन्स दवा ले रहे थे। ऐसे लोगों को भी रिसर्च में शामिल हैं जो यह दवा नहीं भी ले रहे थे। रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि यह दवा हॉस्पिटल में भर्ती हुए मरीजों की मौत का खतरा कम करती है। यह दवा कोरोना मरीजों में कैसे असरदार है, अब ये जानिए कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाली दवा 'स्टेटिन्स' गोलियों के रूप में ली जाती है। कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है, गुड और बैड। यह दवा शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कंट्रोल करती है। बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।शोधकर्ता...
पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना:रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लॉन्ग कोविड के मरीजों में 200 से ज्यादा लक्षण दिख रहे; 56 देशों के 3,762 मरीजों पर हुई रिसर्च

पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना:रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लॉन्ग कोविड के मरीजों में 200 से ज्यादा लक्षण दिख रहे; 56 देशों के 3,762 मरीजों पर हुई रिसर्च

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लंदन लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीजों पर बीमारी के असर को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, ऐसे मरीजों में 10 अंगों से जुड़े 200 से ज्यादा लक्षण दिख सकते हैं। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जिन मरीजों में लक्षण दिखते रहे हैं, वैज्ञानिकों ने उन पर स्टडी की। इनमें लॉन्ग कोविड से जूझने वाले 56 देशों के 3,762 मरीजों से बात की गई। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने अपनी रिसर्च के दौरान कोविड से उबर चुके मरीजों में दिखने वाले 203 में से 66 लक्षणों पर 7 महीने तक नजर रखी। सभी मरीज 18 साल और इससे ज्यादा उम्र के थे और उनसे कोविड से जुड़े 257 सवाल पूछे गए थे। सबसे पहले जानिए लॉन्ग कोविड क्या है?लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी...
ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका में मंकीपॉक्स:टेक्सास में दुर्लभ मंकीपॉक्स का पहला मरीज मिला, वायरस यह स्ट्रेन नाइजीरिया में देखा जा चुका है; यहीं से मरीज वापस घर लौटा था

ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका में मंकीपॉक्स:टेक्सास में दुर्लभ मंकीपॉक्स का पहला मरीज मिला, वायरस यह स्ट्रेन नाइजीरिया में देखा जा चुका है; यहीं से मरीज वापस घर लौटा था

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टेक्सास टेक्सास में दुर्लभ बीमारी मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है। इसकी पुष्टि अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी ने की है। जिस मरीज में बीमारी पाई ई वो नाइजीरिया से लौटा है। घर आते वक्त वह अटलांटा और जॉर्जिया में रुका था। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सफर के दौरान मरीज के सम्पर्क में कौन-कौन लोग आए। इससे पहले जून में मंकीपॉक्स के दो मामले ब्रिटेन में सामने आए थे। टेक्सास में मंकीपॉक्स वायरस का यह पहला मामला है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, मरीज टेक्सास के डेल्लास लव फील्ड एयरपोर्ट पर 9 जुलाई को पहुंचा था। उसे पास के ही एक हॉस्पिटल में आइसोलेट किया गया था। अब उसकी स्थिति बेहतर है। सीडीसी के मुताबिक, मरीज में मंकीपॉक्स को वो स्ट्रेन मिला है जो खासतौर पर नाइजीरिया समेत पश्चिम अफ्रीका में देखा जा चुका है। मंकीपॉक्स के पिछले 6 मामलों में भी ...
दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है:इस गोभी के फूल पूरी तरह बढ़ नहीं पाते और एक-दूसरे पर चढ़ जाते हैं, इसलिए बनता है पिरामिड जैसा आकार, जानिए क्यों है यह खास

दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है:इस गोभी के फूल पूरी तरह बढ़ नहीं पाते और एक-दूसरे पर चढ़ जाते हैं, इसलिए बनता है पिरामिड जैसा आकार, जानिए क्यों है यह खास

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पिरामिड की तरह दिखने वाली दुनिया की विचित्र गोभी पर वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है। यह गोभी इतनी विचित्र क्यों दिखती है, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। इसे आम भाषा में रोमनेस्को कॉलीफ्लॉवर और रोमनेस्को ब्रॉकली भी कहा जाता है। यह सेलेक्टिव ब्रीडिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी बनावट पर फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। इसलिए होता है पिरामिड जैसा आकारशोधकर्ता फ्रांस्वा पार्सी का कहना है, इस गोभी के विचित्र दिखने की वजह इसका फूल है। गोभी में मौजूद दानेदार फूल दरअसरल बड़े फूल में तब्दील होना चाहते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसका निचला हिस्सा तने में तब्दील हो जाता है और ऊपरी हिस्सा कली बनकर रह जाती हैं। ऐसा इतनी बार होता है कि एक कली के ऊपर दूसरी कली चढ़ती जाती है। इस तरह ये पिरामिड जैसे दिखने लगते हैं। फूल का 3डी-मॉडल तैयार कियाशोधकर्...
नई तरह का टेस्ट:समय से ग्लूकोमा की जानकारी देने में ब्लड जेनेटिक टेस्ट दूसरी जांचों से 15 गुना बेहतर, समय पर इलाज हुआ इसे कंट्रोल करना है आसान

नई तरह का टेस्ट:समय से ग्लूकोमा की जानकारी देने में ब्लड जेनेटिक टेस्ट दूसरी जांचों से 15 गुना बेहतर, समय पर इलाज हुआ इसे कंट्रोल करना है आसान

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इंसान ग्लूकोमा से पीड़ित है या नहीं, इसका पता जेनेटिक ब्लड टेस्ट से भी लगाया जा सकता है। वर्तमान में होने वाली जांचों से यह 15 गुना तक बेहतर है। यह जांच लोगों को ग्लूकोमा की शुरुआती अवस्था में ही अलर्ट कर देती है। इस नई तरह की जांच को ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, जेनेटिक ब्लड टेस्ट बीमारी की जानकारी समय से देने में कितना सफल है इसे जानने के लिए 4,13,844 लोगों का टेस्ट किया गया। इनमें ग्लूकोमा के मरीज और स्वस्थ, दोनों तरह के लोग शामिल थे। क्या है ग्लूकोमादुनियाभर में दृष्टिहीनता की बड़ी वजह है ग्लूकोमा। ग्लूकोमा होने पर आंख में नसों में प्रेशर काफी अधिक बढ़ जाता है। इसका बुरा असर आंखों की रोशनी पर पड़ने लगता है। सही समय पर इलाज ना किया जाए तो मरीज अंधा भी हो सकता है। देश में 40 साल और इससे अधिक उम्र के 11 लाख से अधिक मरी...
समझें वजन बढ़ने और घटने का साइंस:सिर्फ 1 हफ्ते कम नींद लेने से भी वजन एक किलो तक बढ़ सकता है

समझें वजन बढ़ने और घटने का साइंस:सिर्फ 1 हफ्ते कम नींद लेने से भी वजन एक किलो तक बढ़ सकता है

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अधिक वजन हृदय रोग, डायबिटीज, स्ट्रोक और कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण है। ऐसे में वजन को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम से एक माह में 3 किलो तक वजन को कम किया जा सकता है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी इसकी पुष्टि करता है। फोर्टिस हॉस्पिटल की चीफ क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. सीमा सिंह से जानिए, 5 तरीकों जो आपको वजन घटाने में मदद करेंगे... 1. नाश्ते में लें हाई प्रोटीन: 60% तक घटेगी भोजन की इच्छायूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश रिसर्च कहती है, कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रोटीन को पचाने के लिए शरीर को अधिक कैलोरी खर्च करनी पड़ती है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी कहती है, दिन भर ली जाने वाली कुल कैलोरी में यदि प्रोटीन की मात्रा 25 फीसदी तक बढ़ा दी जाए तो भूख की इच्छा 60 प्रतिशत तक कम हो जाती है,...
वैज्ञानिकों ने बनाई प्रेग्नेंसी रोकने वाली गर्भनिरोधक एंटीबॉडी, यह स्पर्म को 15 सेकंड में कमजोर करके निष्क्रिय कर देगी

वैज्ञानिकों ने बनाई प्रेग्नेंसी रोकने वाली गर्भनिरोधक एंटीबॉडी, यह स्पर्म को 15 सेकंड में कमजोर करके निष्क्रिय कर देगी

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने खास तरह की गर्भनिरोधक एंटीबॉडी विकसित की है। यह स्पर्म को कमजोर करेगी ताकि जन्म दर को कंट्रोल किया जा सके। इसे बॉस्टन यूनिवर्सिटी और सैनडिएगो की कंपनी जैबबायो ने मिलकर तैयार किया है। वैज्ञानिकों ने इसे ह्यूमन कंट्रासेप्शन एंटीबॉडी नाम दिया है। नई गर्भनिरोधक एंटीबॉडी का इंसान के अलग-अलग क्वालिटी वाले स्पर्म पर ट्रायल भी किया गया है। ट्रायल में सामने आया है कि यह 15 सेकंड में स्पर्म की कमजोर करके निष्क्रिय कर देती है। दावा; सूजन का खतरा नहींबॉस्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देबोरह एंडरसन कहते हैं, इस गंर्भनिरोधक एंटीबॉडी को महिला की डिमांड पर उसकी वेजाइना में डाला जा सकता है। यह एंटीबॉडी महिला के प्राइवेट पार्ट में किसी तरह की सूजन नहीं पैदा करती। इंसानों पर पहले फेज का ट्रायल किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 15 से 49 साल की उम्र वाली 65 फीसदी म...
स्मार्टफोन से ली गई आंखों के निचले हिस्से की फोटो से होगी एनीमिया की जांच, AI से लैस कैमरा फोटो जांचकर बताएगा बीमारी है या नहीं

स्मार्टफोन से ली गई आंखों के निचले हिस्से की फोटो से होगी एनीमिया की जांच, AI से लैस कैमरा फोटो जांचकर बताएगा बीमारी है या नहीं

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वैज्ञानिकों ने एनीमिया की जांच करने का नया तरीका बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है, स्मार्टफोन की मदद से आंखों के सबसे निचले हिस्से की फोटो खींचकर एनीमिया का पता लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो पलकों के पीछे आंखों के निचले हिस्से की फोटो की एनालिसिस करता है। जांच के बाद बताता है कि इंसान एनीमिया से पीड़ित है या नहीं। यह रिसर्च ब्राउन यूनिवर्सिटी और अमेरिका के रोह्ड आइलैंड हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है। ऐसे होगी एनीमिया की जांचशोधकर्ताओं का कहना है, जिस तकनीक से फोटो की जांच की जा रही है, इसे एक ऐप में बदला सकता है। ऐसा करने के बाद इंसान को अपनी आंखों की फोटो खींचनी होगी। इसके बाद ऐप पर फोटो अपलोड करना होगा। ऐप फोटो की जांच करके एनीमिया पर रिपोर्ट देगी। जांच का नया तरीका सभी के लिए उपलब्ध होने के बाद एनीमिया की जांच के लिए ब्...