Friday, May 1निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

लाइफस्टाइल

5 हजार साल पहले ‘काली मौत’ महामारी फैलाने वाला बैक्टीरिया प्राचीन शिकारी की खोपड़ी में मिला, जर्मनी के वैज्ञानिकों का दावा

5 हजार साल पहले ‘काली मौत’ महामारी फैलाने वाला बैक्टीरिया प्राचीन शिकारी की खोपड़ी में मिला, जर्मनी के वैज्ञानिकों का दावा

What's Hot, टॉप न्यूज़, यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने 5 हजार साल पुराने उस बैक्टीरिया को खोज लिया है जिसने 14वीं सदी में 'काली मौत' नाम की महामारी फैलाई थी। बैक्टीरिया का नाम यर्सिनिया पेस्टिस है, इसे एक प्राचीन शिकारी की खोपड़ी से खोजा गया है। रिसर्च के दौरान यह साबित भी हो चुका है। अब तक माना जाता था कि 'काली मौत' यानी 'ब्लैक डेथ' प्लेग का बैक्टीरिया एक हजार साल पुराना है, लेकिन नई रिसर्च कहती है कि इसका वंश 7 हजार साल पुराना है। यह दावा जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। मौत के समय शिकारी की उम्र 20 से 30 साल थीकील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता क्रॉस कियोरा का कहना है, हमें जिस शिकारी की खोपड़ी से यह बैक्टीरिया मिला है, मौत के समय उसकी उम्र करीब 20 से 30 साल थी। खोपड़ी को RV2039 नाम दिया गया है। लाटविया के रिन्नूकाल्न्स इलाके में इस शिकारी को करीब 5 हजार साल पहले दफनाया गया था। वैज्ञानिकों...
पहेली और जादुई करतब की ओर ध्यान देने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान हो सकते हैं, चीजों को समझने की जिज्ञासा इनमें सीखने की चाहत बढ़ाती है

पहेली और जादुई करतब की ओर ध्यान देने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान हो सकते हैं, चीजों को समझने की जिज्ञासा इनमें सीखने की चाहत बढ़ाती है

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
पहेली और जादुई करतब की ओर आकर्षित होने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान हो सकते हैं। बच्चों में चीजों को समझने की जिज्ञासा उन्हें अधिक समझदार बना सकती है। यह दावा जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। वैज्ञानिकों ने 11 माह और इससे अधिक उम्र के 65 बच्चों में जिज्ञासा का स्तर समझने के लिए 3 महीने तक रिसर्च की। ऐसे बच्चों के बुद्धिमान होने की संभावना अधिकवैज्ञानिकों का कहना है, जो बच्चे खास तरह के करतब जैसे पानी में तैरता हुआ खिलौना, दीवार से गुजरती हुई गेंद को ध्यान से देखते हैं उनमें अधिक जिज्ञासा होती है। शोधकर्ता लीजा फीगेनसन कहती है, जादुई करतबों को देखकर बच्चों में पैदा होने वाली जिज्ञासा बताती है कि वो कितना चीजों को समझना चाहते हैं। तीन साल तक चली रिसर्चसायकोलॉजिस्ट जैस्मीन पेरेज कहती हैं, बच्चों में जिज्ञासा का स्तर बताता है कि वह पढ़ाई में कैसा होग...
खून की एक जांच से 50 तरह के कैंसर का समय से पहले पता लगाया जा सकेगा, ट्यूमर की लोकेशन भी जानी जा सकेगी; अमेरिकी कम्पनी ने विकसित किया टेस्ट

खून की एक जांच से 50 तरह के कैंसर का समय से पहले पता लगाया जा सकेगा, ट्यूमर की लोकेशन भी जानी जा सकेगी; अमेरिकी कम्पनी ने विकसित किया टेस्ट

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
एक ब्लड टेस्ट से 50 तरह के कैंसर का पता समय से पहले लगाया जा सकता है। काफी हद तक कैंसर की लोकेशन भी जानी जा सकती है। इंग्लैंड की स्वास्थ्य एजेंसी नेशनल हेल्थ सर्विसेज ने इस ब्लड टेस्ट को पायलट स्टडी के तौर पर शुरू किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, इस ब्लड टेस्ट का लक्ष्य 50 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों में बीमारियों के खतरे को कम करना है। गलत भविष्यवाणी की सम्भावना कमगार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लड टेस्ट की मदद से हेड एंड नेक, ओवेरियन, पेन्क्रियाटिक, इसोफेगल और ब्लड कैंसर का पता समय से पहले लगाया जा सकता है। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि टेस्ट के आधार पर बीमारियों की भविष्यवाणी होने की बात गलत साबित होने की सम्भावना कम ही होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेस्ट की मदद से ब्लड कैंसर जैसे मामलों की 55.1% तक सटीक जानकारी दी जा सकती है। वहीं, बीमारी के गलत साबित होने ...
अब मास्क से होगी कोरोना की जांच, यह सांस में मौजूद कोरोना के कणों का पता लगाकर 90 मिनट में करेगा अलर्ट

अब मास्क से होगी कोरोना की जांच, यह सांस में मौजूद कोरोना के कणों का पता लगाकर 90 मिनट में करेगा अलर्ट

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
अब मास्क की मदद से कोरोना की जांच भी की जा सकेगी। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ऐसा मास्क तैयार किया है जिससे पता लगाया सकता है कि इंसान कोविड-19 से संक्रमित है या नहीं। यह मास्क इंसान की सांस से संक्रमण का पता लगाता है। इस मास्क को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, हम कई सालों से तकनीक की मदद से इबोला और जीका जैसे वायरस का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पिछले साल महामारी के कारण हमने कोरोना वायरस पता लगाने के लिए लक्ष्य को बदला। ऐसा दिखता है सेंसर मास्क। 90 मिनट में बताता है रिजल्टवैज्ञानिकों के मुताबिक, मास्क में मौजूद डिस्पोजेबल सेंसर जब एक्टिवेट हो जाता है तो सांस में मौजूद कोरोना के कणों का पता लगाता है। कोरोना के कण मिलने पर सेंसर का का रंग बदल जाता है और 90 मिनट में जांच का रिजल्ट...
दुनिया का पहला बिना बैटरी वाला वायरलेस पेसमेकर, ओपन हार्ट सर्जरी और हार्ट अटैक होने पर इसे लगाया तो निकलने की जरूरत नहीं, यह घुल जाएगा

दुनिया का पहला बिना बैटरी वाला वायरलेस पेसमेकर, ओपन हार्ट सर्जरी और हार्ट अटैक होने पर इसे लगाया तो निकलने की जरूरत नहीं, यह घुल जाएगा

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला बिना बैटरी वाला वायरलेस पेसमेकर तैयार किया है। खास बात है कि इस इम्प्लांट को शरीर से निकालने की जरूरत नहीं पड़ती, यह अपने आप ही घुल जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ऐसे टेम्प्रेरी पेसमेकर का बेहतर विकल्प है जिसे लगाने के कुछ समय बाद सर्जरी करके निकाला जाता है। इसलिए लगाया जाता है पेसमेकरवैज्ञानिकों का मानना है कि यह डिवाइस एक दिन टेम्प्रेरी पेसमेकर को रिप्लेस कर देगी। ओपन हार्ट सर्जरी, हार्ट अटैक और ड्रग ओवरडोज के बाद कुछ मरीजों को टेम्प्रेरी पेसमेकर की जरूरत होती है। ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान टेम्प्रेरी पेसमेकर को हार्ट की मांसपेशी के साथ सिल दिया जाता है। एक बार हार्ट सामान्य होने के बाद पेसमेकर को निकाल दिया जाता है, लेकिन वर्तमान में तैयार डिवाइस को हटाने की जरूरत नही पड़ेगी। 5 से 7 हफ्ते में घुल जाता हैइस पेसमेकर को तैयार करने वाली नॉर्थवेस्टर...
चावल से तैयार की कॉलरा की वैक्सीन, इसे स्टोर करने के लिए कूलिंग सिस्टम की जरूरत नहीं और न ही सुई का दर्द सहना पड़ेगा

चावल से तैयार की कॉलरा की वैक्सीन, इसे स्टोर करने के लिए कूलिंग सिस्टम की जरूरत नहीं और न ही सुई का दर्द सहना पड़ेगा

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
जापान के वैज्ञानिकों ने चावल से कॉलरा (हैजा) की वैक्सीन तैयार की है। वैक्सीन का पहला ह्यूमन ट्रायल सफल रहा है। वैक्सीन तैयार करने वाली टोक्यो और चिबा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा है, ट्रायल के दौरान इसके कोई साइडइफेक्ट नहीं दिखे हैं और बेहतर इम्यून रिस्पॉन्स दिखा है। इस वैक्सीन को म्यूको-राइस-सीटीबी नाम दिया गया है। लैंसेट माइक्रोब जर्नल में ट्रायल के पहले चरण के रिजल्ट पब्लिश किए गए हैं। 3 पॉइंट में समझें वैक्सीन की खासियत स्टोरेज के लिए कूलिंग सिस्टम की जरूरत नहीं: शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस वैक्सीन को रूम टेम्प्रेचर पर भी रखा जा सकता है। इसके कहीं भी भेजने के लिए फ्रिज या कूलिंग सिस्टम की जरूरत नहीं होती।सुई का दर्द नहीं झेलना पड़ेगा: कॉलरा की वैक्सीन के लिए सुई का दर्द झेलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह ओरल वैक्सीन है। इसे लिक्विड के साथ मिलाकर पीया जा सकता है।आंतों की...
चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च:एक लाख 40 हजार साल पुरानी इंसानी खोपड़ी से वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, कहा- चौकोर आंख वाले इस ‘ड्रैगन मैन’ का इंसान की नई प्रजाति से सम्बंध

चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च:एक लाख 40 हजार साल पुरानी इंसानी खोपड़ी से वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, कहा- चौकोर आंख वाले इस ‘ड्रैगन मैन’ का इंसान की नई प्रजाति से सम्बंध

What's Hot, टॉप न्यूज़, यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
पूर्वोत्तर चीन में 1930 में 1 लाख 40 हजार साल पुरानी खोपड़ी मिली थी। इसे होमो-लॉन्गी और ड्रैगन मैन का नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है, इस खोपड़ी का सम्बंध मानव की नई प्रजाति से हो सकता है। यह निएंडरथल और होमो इरेक्टस जैसी प्राचीन मानव की प्रजाति में से हमारे सबसे नजदीकी पूर्वज हो सकते हैं। इस पर चीन की हेबेई जियो यूनिवर्सिटी रिसर्च कर रही है। ये चिड़ियों का शिकार करते थेहोमो सेपियंस की तरह, ये भी स्तनधारियों और चिड़ियों का शिकार करते थे। फल और सब्जियां इकट्ठा करते थे। शायद ये मछलियां भी पकड़ते थे। जीवाश्म की जियो-केमिकल एनालिसिस से पता चला है कि यह खोपड़ी 1,46,000 साल पुरानी है। शोधकर्ताओं का कहना है, अब तक यह नहीं पता लगाया जा सका है कि हर्बिन ग्रुप के ये सदस्य कब दिखना बंद हुए। चीन में 1930 में मिली खोपड़ी। चौकोर आंखों वाला इंसानशोधकर्ताओं का कहना है, इसकी आंखें चौको...
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का खुलासा:20 हजार साल पहले भी कोरोना ने मचाई थी तबाही, पूर्वी एशियाई लोगों की DNA जांच में मिले सबूत; वैज्ञानिकों ने बताया, कैसे बेअसर हुआ था वायरस

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का खुलासा:20 हजार साल पहले भी कोरोना ने मचाई थी तबाही, पूर्वी एशियाई लोगों की DNA जांच में मिले सबूत; वैज्ञानिकों ने बताया, कैसे बेअसर हुआ था वायरस

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
20 हजार साल पहले भी कोराेनावायरस ने तबाही मचाई थी। तब पूर्वी एशिया में खतरनाक वायरस का प्रकोप फैला था। यहां के पूर्वजों के DNA का विश्लेषण किया गया। जांच में DNA के प्रोटीन में इसके सबूत मिले हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि उस दौर के लोगों में वायरस के कारण DNA में जो बदलाव दिखे थे वैसे अभी कोविड-19 के कारण भी दिख रहे हैं। यह दावा अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में किया गया है। DNA में दिखे बदलाव के निशानरिसर्च के दौरान, इंसानों से जुड़े 1 हजार जीनोम प्रोजेक्ट के डाटा का इस्तेमाल किया गया। यह पता लगाने की कोशिश की गई कि इंसान के किस जीन्स में कोरोना (सार्स-कोव-2) के संक्रमण से जुड़ा प्रोटीन कोड बदला है। रिसर्च के दूसरे हिस्से में, पूर्वी एशिया लोगों के DNA की जांच रिपोर्ट को सामने रखा गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि 20 हजार साल पहले जिस वायरस ने महामारी फैलाई वो...
बच्चों को ऐसे खिलाएं सब्जियां:बच्चों की थाली में उनकी मनपसंद सब्जियों की मात्रा दोगुनी कर दें तो वे 68 फीसदी अधिक खाते हैं, अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

बच्चों को ऐसे खिलाएं सब्जियां:बच्चों की थाली में उनकी मनपसंद सब्जियों की मात्रा दोगुनी कर दें तो वे 68 फीसदी अधिक खाते हैं, अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
ज्यादातर बच्चे हरी सब्जियों से दूर भागते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में बच्चों को अधिक से अधिक हरी सब्जियां खिलाने का तरीका बताया है। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, ट्रायल के दौरान बच्चों की थाली में ब्रॉकली और कॉर्न की मात्रा 60 से बढ़ाकर 120 ग्राम की गई। परिणाम के तौर पर सामने आया कि बच्चों ने 68 फीसदी अधिक सब्जियां खाईं। ऐसे हुई स्टडी बच्चों में खाने की मात्रा का असर देखने के लिए शोधकर्ताओं ने 67 बच्चों पर रिसर्च की। इसमें 26 लड़के और 41 लड़कियां शामिल की गईं। इनकी औसतन उम्र 3 से 5 साल थी।28 दिन तक हर हफ्ते बच्चों को लंच में ब्रॉकली और कॉर्न अलग-अलग तरह से बनाकर दिया गया। इसमें नमक और मक्खन का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ फिश स्टिक, चावल, एपल सॉस और दूध दिया गया।4 हफ्ते तक अलग-अलग तरह से 4 सब्जियां खाने के बाद उनका अनुभव पूछा गया। रिजल्ट में साम...
सीटी स्कोर 1000 से अधिक तो हार्ट अटैक का खतरा 25% ज्यादा; कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर हाई होने पर रिस्क 42% तक रहता है

सीटी स्कोर 1000 से अधिक तो हार्ट अटैक का खतरा 25% ज्यादा; कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर हाई होने पर रिस्क 42% तक रहता है

What's Hot, टॉप न्यूज़, यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हृदय रोग दुनियाभर में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। हर साल करीब 1.79 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से होती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन कहता है, समय-समय पर जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं तो इस खतरे को काफी कम किया जा सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित शोध के अनुसार, कुछ खास जांचों से हार्ट अटैक के खतरों का अनुमान समय से पहले लगाया जा सकता है। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के डायरेक्टर ऑफ मेडिकल अफेयर्स डॉ. विजय डीसिल्वा से जानिए ऐसी जांचों के बारे में... सीटी स्कोर: इसे दिल का सीटी स्कैन भी कहते हैंकोरोनरी कैल्शियम स्कैन को दिल का सीटी स्कैन भी कहा जाता है। अगर कोरोनरी कैल्शियम स्कैन स्कोर 1000 से ज्यादा है तो अगले एक साल में हार्ट अटैक की आशंका 25% अधिक है। वहीं, अगर स्कोर जीरो है तो अगले पांच साल में...