जयपुर
राजस्थान राज्य कौशल विकास निगम (RSLDC) में भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अगले दो दिनों में IAS नीरज के. पवन व प्रदीप गवड़े को कल तक नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। शनिवार को 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते ट्रेप हुए स्कीम कॉर्डिनेटर अशोक सांगवान और सहायक आचार्य राहुल कुमार गर्ग से पूछताछ के बाद ACB ने काफी सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। इसमें रिश्वत की रकम दोनों IAS अफसरों तक पहुंचाई जाने के ठोस प्रमाण मिले हैं। दोनों आरोपियों को ACB ने रविवार को कोर्ट में पेशकर पांच दिन के रिमांड पर लिया था। यह रिमांड अवधि आज खत्म होगी।
ACB की इस पड़ताल में पिछले दिनों नगर निगम ग्रेटर जयपुर में 276 करोड़ रुपए के भुगतान को लेकर चर्चाओं में आई BVG कंपनी के एक प्रतिनिधि दिनेश कुमार का नाम भी सामने आया है। ACB ने IAS नीरज के. पवन, प्रदीप गवडे़, अशोक सागवान, राहुल, अमित शर्मा सहित 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि दिनेश को भी आरोपी बनाया है।
बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा- हमने भी ब्लैक लिस्ट से नाम हटाने के लिए दलाल अमित को दिए थे 12 लाख रुपए
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि जब परिवादी ने अपनी फर्म का नाम ब्लैक लिस्ट में से हटाने और भुगतान करवाने के लिए दलाल अमित शर्मा से संपर्क किया। तब अमित ने RSLDC के एमडी और चेयरमैन को देने के लिए 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। उसने परिवादी को उसका काम होने का पक्का आश्वासन दिया। विश्वास दिलाने के लिए दलाल अमित ने फर्म संचालक की बात दिनेश नाम के व्यक्ति से कराई, जो कि बीवीजी कंपनी प्रतिनिधि बता रहा था।
बातचीत में दिनेश ने कहा था कि उनकी कंपनी की ओर से कौशल विकास की ट्रेनिंग कराने के लिए उदयपुर में संचालित सेंटर को RSLDC द्वारा ब्लैक लिस्ट किया गया था। तब फर्म को ब्लैक लिस्ट से हटाकर दोबारा बहाल कराने के लिए अमित शर्मा के मार्फत 12 लाख रुपए की रिश्वत आरोपी IAS अफसरों तक पहुंचाई गई। इसके बाद उनके उदयपुर सेंटर को फिर से बहाल कर दिया गया।
रिश्वत का सौदा तय होने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट से बाहर करने की शुरु हुई प्रक्रिया
ACB के अभी तक हुए अनुसंधान में सामने आया कि दलाल अमित शर्मा की गिरफ्तारी के बाद परिवादी का काम अटक गया। तब RSLDC के स्टेट कोऑर्डिनेटर अशोक सागवान और मैनेजर राहुल ने परिवादी से 10 लाख रुपए में डील की। जिसमें 50 फीसदी रकम पहले और बाकी काम होने के बाद तय हुआ। परिवादी ने पांच लाख रुपए की रकम अशोक और राहुल तक पहुंचाई तब उसके पक्ष में काम होना शुरु हो गया।
उसकी फर्म की बैंक गारंटी रिलीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके अलावा फर्म का टाइम पीरियड भी 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया। साथ ही, फर्म का नाम ब्लैकलिस्ट से बाहर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। ACB की जांच में सामने आया कि ये सब काम सिर्फ IAS नीरज के. पवन, प्रदीप गवडे़ और RSLDC के जनरल मैनेजर RAS करतार सिंह के पास था।
इन तीनों की सहमति से फाइल पर साइन के बिना यह काम पूरा नहीं किया जा सकता था। ACB का मानना है कि सभी की मिलीभगत से यह काम रिश्वत का लेनदेन होने के बाद हुआ। जिसमें 5 लाख रुपए रकम देते वक्त ACB के ASP पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में अशोक सांगवान और राहुल गर्ग को ट्रेप कर लिया।
ACB में IAS नीरज के. पवन के खिलाफ अब तक तीन FIR और एक प्राथमिकी जांच (PE) दर्ज
IAS नीरज के. पवन के खिलाफ ACB अब तक तीन FIR और एक प्राथमिकी जांच दर्ज कर चुकी है। पहली FIR NRHM घोटाले से संबंधित थी, जो कि 2016 में दर्ज की गई थी। दूसरी FIR 2017 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में घोटाले से संबंधित दर्ज की गई।
2017 में नीरज के. पवन के खिलाफ ही ACB ने जन स्वास्थ्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में जिला सलाहकार और लैब टैक्नीशियन की भर्ती में हुई अनियमितता को लेकर प्राथमिक जांच दर्ज की थी। इसके बाद अब RSLDC में रिश्वत लेकर फर्म को ब्लैक लिस्ट से बाहर करने और डेढ़ करोड़ के बिलों का बकाया भुगतान करने को लेकर की है।