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हैवी मेटल्स की जांच की सुविधा नहीं, फिर पानी पीने योग्य कैसे

श्रीगंगानगर। पंजाब से नहरों में आ रहे दूषित और कैमिकल युक्त पानी में आने वाले हैवी मैटल्स की जांच के लिए जिला मुख्यालय पर कोई मशीन नहीं है। ऐसे में पानी फिल्टर होने के बाद यह पीने योग्य है या नहीं इसकी क्या प्रमाणिकता है। कुछ ऐसे ही सवालों और नहरों में आ रहे कैमिकल युक्त पानी को बन्द करवाने की मांग को लेकर काला पानी बन्द करो संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा जलदाय विभाग पर प्रदर्शन किया गया।
इस दौरान लोगों ने कहा कि भारी मात्रा में पंजाब से कैमिकल युक्त पानी नहरों में डाला जा रहा है। इसमें आने वाले हेवी मेटल्स की जांच करने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर जिले भर में कहीं भी कोई ंसुविधा है। ऐसे में लोगों के घरों में यहीं पानी सप्लाई किया जा रहा है। मौके पर मौजूद विभाग के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि जलदाय विभाग के पास हेवी मेटल्स जाँच करने की कोई मशीन नहीं है। ऐसे में इसकी जांच केवल जयपुर से करवाई जाती है।
संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि जब यहाँ हेवी मेटल्स जाँच करने की मशीनें ही नहीं है तो जलदाय विभाग सरकार को यह रिपोर्ट कैसे भेज रहा है कि यह पानी फिल्टर होने के बाद पीने योग्य होता है। इतना ही प्रदर्शनकारियों जब पूछा गया कि पंजाब से नहरों में फैक्ट्रीयों का कैमिकल युक्त पानी डाला जा रहा है इस सबंन्ध में सरकार को कोई रिपोर्ट भेजी या नहीं। इस पर अधिकारी कोई जबाव नहीं दे पाए। लोगों के सवालों से विभाग का बचाव करते हुए अधिशाषी अभियंता रवि बवेजा ने कहा कि जल्द ही इस मामले में सरकार को पत्र लिखा जाएगा साथ ही फिल्टर होने के बाद पानी में कैमिकल रहता है या नहीं इसकी रिपोर्ट 15 दिनों में बता दिया जाएगा। इस दौरान देवकरण नायक, सुरेन्द्र स्वामी, मनिंदरसिंह मान, अशोक डागला, प्रेम नायक, मनजीत सिंह राणा, नीरज शर्मा, श्याम सोनी, शुभम अरोड़ा, सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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