छात्रों में बढ़ता अवसाद और इसके समाधान पर संगोष्ठी
जयपुर (वार्ता). कोचिंग संस्थाओं में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को अवसाद में जाने एवं आत्महत्या करने से बचाने के लिए बच्चों के अभिभावक , शिक्षण संस्थान, कोचिंग संस्थान मनौविज्ञानी तथा समाज शास्त्रियों के परस्पर तालमेल से इसका व्यावहारिक समाधान खोजा जा सकता है।छात्रों में बढ़ता अवसाद, निदान और समाधान विषय पर सम्मन्न मुक्त मंच जयपुर की 70वीं मासिक संगोष्ठी में वक्ताओं ने यह राय व्यक्त की। संगोष्ठी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी अरुण ओझा मुख्य अतिथि थे।अपने अध्यक्षीय भाषण में अंग्रेजी, हिन्दी एवं संस्कृत मर्मज्ञ डा नरेन्द्र शर्मा ह्लकुसुमह्व ने कहा कि नयी पीढ़ी के छात्रों में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा और असीमित महत्वाकांक्षाएं बढ़ती जा रही है। इसलिए युवा छात्र कोचिंग संस्थाओं का दामन थाम रहे है। फलत: वे मनस्तापों से पीड़ित होने न्यूरोसिस, साइकोसिस, डिप्रेशन जैसी आत्मघाती बीमारियों से ग्रस्...








