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लाइफस्टाइल

कोरोना टेस्ट के लिए नाक की बजाय मुंह से सैंपल लेना बेहतर, यहां वायरस की मात्रा 3 गुना ज्यादा होती है

कोरोना टेस्ट के लिए नाक की बजाय मुंह से सैंपल लेना बेहतर, यहां वायरस की मात्रा 3 गुना ज्यादा होती है

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना जांच के लिए सैम्पल अगर मुंह से लिया जाए तो नाक से लिए गए सैम्पल की तुलना में ज्यादा बेहतर नतीजे आते हैं। वायरस का पता भी जल्दी लगाया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड के रिसर्चर डॉ. डोनाल्ड मिल्टन ने कुछ शोधों के आधार पर यह दावा किया है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस सबसे पहले मुंह और गले में नजर आता है।...
क्या वैक्सीन लगवाने के बाद आपके पीरियड्स भी हुए लेट? नई रिसर्च के अनुसार- ये देरी टेंपरेरी है

क्या वैक्सीन लगवाने के बाद आपके पीरियड्स भी हुए लेट? नई रिसर्च के अनुसार- ये देरी टेंपरेरी है

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
अगर कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद आपके पीरियड्स लेट आने लगे हैं, तो आप अकेली नहीं हैं। आप जैसी बहुत सारी महिलाएं इस स्थिति का सामना कर रही हैं। माहवारी और वैक्सीन के इस कनेक्शन को समझने के लिए हाल ही में अमेरिका के ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च भी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, वैक्सीनेशन के बाद ऐसा होना बिलकुल नॉर्मल है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। अमेरिकी महिलाओं पर हुई रिसर्चवैज्ञानिकों ने एक फर्टिलिटी ट्रैकिंग ऐप के जरिए अमेरिकी महिलाओं के डेटा को स्टडी किया। इन महिलाओं की उम्र 18 से 45 वर्ष थी। ये न तो गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल कर रही थीं और न ही प्रेग्नेंट थीं। रिसर्च में शामिल 2,403 महिलाओं में से 55% को फाइजर वैक्सीन, 35% को मॉडर्ना वैक्सीन और 7% को जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन लगाई गई। इनके अलावा, लगभग 1,556 महिलाएं ऐसी भी थीं जिन्हें वैक्सीन नहीं लगाई गई...
कोरोना से बचाएगी भांग:रिसर्च में खुलासा- वायरस को शरीर में घुसने से रोकती है भांग

कोरोना से बचाएगी भांग:रिसर्च में खुलासा- वायरस को शरीर में घुसने से रोकती है भांग

What's Hot, टॉप न्यूज़, यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में भांग का पौधा कारगर है। यह दावा जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट्स में प्रकाशित एक नई रिसर्च में किया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भांग के पौधे यानी कैनबिस में कुछ ऐसे कंपाउंड होते हैं, जिनकी मदद से वायरस को शरीर में घुसने से रोका जा सकता है। इससे पहले लेथब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी इस विषय पर शोध किया था। क्या कहती है रिसर्च भांग और कोरोना वायरस का कनेक्शन समझने के लिए ओरेगन स्टेट के ग्लोबल हेम्प इनोवेशन सेंटर, कॉलेज ऑफ फार्मेसी और लिनुस पॉलिंग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने साथ मिलकर रिसर्च पर काम किया।...
फेफड़ों के अलावा कोरोना लिवर पर भी करता है अटैक, ये हो सकता है जानलेवा

फेफड़ों के अलावा कोरोना लिवर पर भी करता है अटैक, ये हो सकता है जानलेवा

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
वैसे तो कोरोना वायरस सबसे पहले हमारे फेफड़ों को टारगेट करता है, लेकिन इससे हमारे लिवर को भी कोई कम खतरा नहीं है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेनेसी की एक नई रिसर्च के अनुसार, कोरोना के शिकार हुए 11% मरीजों को लिवर संबंधित परेशानियां हैं। डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना के खिलाफ विकसित की गईं वैक्सीन्स भी हमारे लिवर को बचाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे करता है कोरोना वायरस लिवर पर वाररिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना वायरस लिवर में मौजूद महत्वपूर्ण एंजाइम्स की मात्रा बढ़ा देता है। इन एंजाइम्स का नाम एलेनिन एमिनोट्रांस्फरेज (ALT) और एस्परटेट एमिनोट्रांस्फरेज (AST) है। रिसर्च के मुताबिक कोरोना के 15 से 53 फीसदी मरीजों में इन लिवर एंजाइम्स को अधिक मात्रा में पाया गया। ऐसा कहा जा सकता है कि इन लोगों का लिवर टेम्परेरी रूप से खराब हो चुका था।...
डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन से मौत का खतरा 91% कम; ये वैरिएंट ज्यादा गंभीर नहीं

डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन से मौत का खतरा 91% कम; ये वैरिएंट ज्यादा गंभीर नहीं

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
दुनिया भर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट डेल्टा के मुकाबले 91% कम जानलेवा है। इसका मतलब, ओमिक्रॉन से मौतें तो होंगी, लेकिन डेल्टा की तुलना में 91% कम। फिलहाल अमेरिका में कोरोना के 90% मामले ओमिक्रॉन के हैं। 50% ओमिक्रॉन मरीजों को ही पड़ती है हॉस्पिटलाइज होने की जरूरत CDC के वैज्ञानिकों ने कैलिफोर्निया के 70,000 कोरोना मरीजों के डेटा को एनालाइज किया। इसमें 52,257 ओमिक्रॉन मरीजों और 16,982 डेल्टा मरीजों को शामिल किया गया। रिसर्च में पाया गया कि केवल 50% ओमिक्रॉन मरीजों को ही हॉस्पिटलाइज होने की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही, 25% मरीजों को ही ज्यादा देख-रेख की जरूरत होती है।...
क्या होती है ट्यूबरकुलर पेरिकार्डाइटिस की बीमारी?

क्या होती है ट्यूबरकुलर पेरिकार्डाइटिस की बीमारी?

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
केस - 1 45 वर्ष के संजय (परिवर्तित नाम) को पिछले कुछ दिनों से सांस में तकलीफ हो रही थी। एक दिन अचानक तकलीफ काफी बढ़ गई तो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां जांच करने पर पता चला की उसके हार्ट का आकार काफी बढ़ गया है। हार्ट में काफी मात्रा में पानी भर गया। साथ ही हार्ट की दीवारों में भी सूजन आ गई थी। उसे तुरंत कैथ लैब ले जाकर उसका पानी निकाला गया तब जाकर राहत महसूस हुई। बाद में जांच में पता चला की उसे टीबी थी। केस - 2 सतना की मंजूबाला (परिवर्तित नाम) को 2 महीने पहले खांसी और बुखार की शिकायत थी। जांच कराने पर टीबी की बीमारी का पता चला। इलाज बीच में ही बंद कर देने के कुछ दिनों बाद उसकी छाती में तेज दर्द की शिकायत हुई साथ ही धड़कनें भी तेज हो गई। भर्ती करने पर पता लगा की उसे हार्ट की झिल्ली (मेम्ब्रेन) की टीबी हो गई, साथ ही हार्ट के चारों ओर पानी भी भर गया था।...
ओमिक्रॉन से बचना है तो दो मास्क लगाना जरूरी

ओमिक्रॉन से बचना है तो दो मास्क लगाना जरूरी

यात्रा, लाइफस्टाइल, स्पोर्ट्स
दुनिया भर में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच हॉन्ग-कॉन्ग के वैज्ञानिकों ने कहा है कि नए वैरिएंट से बचने के लिए दो मास्क पहनना जरूरी है। ये सलाह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो आए दिन कोरोना मरीजों के संपर्क में आते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डबल मास्क लगाने से हमें कोरोना के खिलाफ 91% तक सुरक्षा मिल सकती है। हाई रिस्क पर हैं तो डबल मास्क लगाना बेहद जरूरीमाइक्रोबायोलॉजिस्ट यूएन क्वोक-युंग कहते हैं कि जो लोग पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें दो मास्क पहने रहना चाहिए। इनके अलावा, वैक्सीन न लगवाने वाले लोग, डॉक्टर्स और एयरपोर्ट वर्कर्स को भी संक्रमण का रिस्क ज्यादा होता है। इन्हें भी डबल मास्किंग फॉलो करनी चाहिए।...
नए वैरिएंट से रिकवरी के बाद भी मरीजों को हो रहा गंभीर पीठ और कमर दर्द

नए वैरिएंट से रिकवरी के बाद भी मरीजों को हो रहा गंभीर पीठ और कमर दर्द

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
वैसे तो दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ओमिक्रॉन को एक माइल्ड इन्फेक्शन बता रहे हैं, लेकिन इससे रिकवर होने के बाद भी लोगों को शरीर में दर्द और हरारत का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर मरीज पीठ और कमर में गंभीर दर्द की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो इस तरह के मामले हर दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। कितना गंभीर है ये पीठ दर्द? फिजीशियन डॉ. हेमंत ठाकर के अनुसार, जिस तरह लोगों को डेंगू होने पर शरीर में असहनीय दर्द होता है, ओमिक्रॉन के मरीजों को रिकवरी के बाद उसी तरह का पीठ दर्द हो रहा है।जेजे हॉस्पिटल के डॉ. हेमंत गुप्ता का कहना है कि जिन लोगों को पहले से ही पीठ और कमर दर्द होता है, ओमिक्रॉन होने पर उनकी ये परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। संक्रमण से रिकवर होने के बाद भी वे इस दर्द से जल्दी रिकवर नहीं हो पाते।मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉ. हरीश चाफले के अनुसार, वायरल इन्फेक्शन के दौरान शरीर में ...
ओमिक्रॉन होने पर नवजातों और छोटे बच्चों का ख्याल कैसे रखें?

ओमिक्रॉन होने पर नवजातों और छोटे बच्चों का ख्याल कैसे रखें?

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के बीच नवजातों और छोटे बच्चों के पेरेंट्स की चिंता बढ़ गई है। जहां दुनिया भर में एडल्ट्स को बूस्टर डोज लगाया जा रहा है, वहीं ये बच्चे वैक्सीन न लगने के कारण इस वायरस के शिकार हो रहे हैं। अमेरिका जैसे देशों में तो ऐसे बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने तक की नौबत आ रही है। ऐसे में बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचाएं और लक्षण होने पर उनका ख्याल कैसे रखें, ये जानना बेहद जरूरी है। द क्विंट से बात करते हुए डॉ. मनिंदर सिंह धालीवाल ने बताया कि 80% मामलों में ओमिक्रॉन के शुरुआती लक्षण सर्दी-खांसी होते हैं। इनके अलावा, 10% को कंपकंपी और 10% को उल्टी, दस्त और हरारत का अनुभव होता है।...
हवा में 20 मिनट के अंदर ही 90% तक कमजोर हो जाता है वायरस

हवा में 20 मिनट के अंदर ही 90% तक कमजोर हो जाता है वायरस

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच एक चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है। इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक, हवा के संपर्क में आने के 20 मिनट के अंदर ही कोरोना वायरस 90% तक कमजोर हो जाता है। साथ ही, शुरुआती 5 सेकंड में ही वायरस अपनी आधी ताकत खो देता है। रिसर्चर्स ने इसका कारण हवा में नमी और कार्बन डाइऑक्साइड की कमी को बताया है। कैसे फैलता है कोरोना का संक्रमण? कोविड-19 की बीमारी हवा के जरिये फैलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार हवा फ्लूइड (तरल) होती है। इसमें तरह-तरह के कण मौजूद होते हैं, जो समय के साथ वातावरण में फैलते जाते हैं। कोरोना वायरस भी इस हवा के साथ फैलने में सक्षम होता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है और हम उसके करीब रहकर उसी हवा में सांस लेते हैं, तब वायरस हमारे शरीर में ट्रांसफर हो जाता है।...