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अगर आपके दांत समय से पहले गिरते हैं तो याद्दाश्त घटने का खतरा 1.28 गुना बढ़ता है, अमेरिकी शोधकर्ताओं की सलाह; ओरल हेल्थ का रखें ध्यान

अगर आपके दांत समय से पहले गिरते हैं तो याद्दाश्त घटने का खतरा 1.28 गुना बढ़ता है, अमेरिकी शोधकर्ताओं की सलाह; ओरल हेल्थ का रखें ध्यान

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इंसान के दांतों का कनेक्शन याद्दाश्त से जुड़ा है। अमेरिकी शोधकर्ताओं की नई रिसर्च में यह दावा किया गया है कि जिस इंसान के दांत जल्दी गिरने शुरू हो जाते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ता है। डिमेंशिया यानी ऐसी बीमारी जिसमें इंसान की याद्दाश्त कम होने लगती है। रिसर्च करने वाले न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, दांतों के गिरने से इंसान की याद्दाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। एक-एक दांत गिरने से खतरा बढ़ता है। अब इसकी भी जान लीजिएशोधकर्ता कहते हैं, दांत और याद्दाश्त के बीच इस कनेक्शन की सटीक वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है, लेकिन इनके बीच एक सम्बंध जरूर है। जैसे- दांत टूटने के बाद इंसान को खाना चबाने में दिक्कत होती है। खाना ठीक से न चबा पाने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी ऐसा हो सकता है। या फिर मसूढ़ों की बीमारी और गिरती याद्दाश्त के बीच कोई...
अलग ब्लड ग्रुप वाले डोनर का लिवर 63 साल के अफगानी मरीज को लगाया गया, हेपेटाइटिस-बी के कारण लिवर हो गया था फेल

अलग ब्लड ग्रुप वाले डोनर का लिवर 63 साल के अफगानी मरीज को लगाया गया, हेपेटाइटिस-बी के कारण लिवर हो गया था फेल

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नई दिल्ली देश में पहली बार अलग ब्लड ग्रुप वाले डोनर से लिवर लेकर एक मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया। इस तरह की सर्जरी को एबीओ इन्कम्पैटेबल सर्जरी कहते हैं। हेपेटाइटिस-बी के कारण अफगानिस्तान निवासी 63 साल के मरीज का लिवर फेल हो गया था। सर्जरी के लिए मरीज को भारत लाया गया और द्वारका के एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल में सर्जरी की गई। 12 घंटे चली सर्जरीसर्जरी डॉ. शैलेन्द्र लालवानी और इनकी टीम ने की। डॉ. शैलेन्द्र का कहना है, एबीओ इन्कम्पैटेबल सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए अनुभवी एक्सपर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सीय देखभाल और संक्रमणमुक्त माहौल जरूरी है। मरीज और डोनर का ब्लड ग्रुप एक न होने के कारण ऐसी सर्जरी करनी पड़ी। 12 घंटे चली सर्जरी सफल रही। सर्जरी के बाद रिकवरी में 3 हफ्ते लगते हैं, लेकिन मरीज दो हफ्ते में रिकवर हो गया। कुछ ही हफ्तों में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज के 24...
जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों की लम्बाई घट सकती है और दिमाग सिकुड़ सकता है, इंसानों के 300 जीवाश्मों की जांच में हुआ खुलासा

जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों की लम्बाई घट सकती है और दिमाग सिकुड़ सकता है, इंसानों के 300 जीवाश्मों की जांच में हुआ खुलासा

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वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन का नया खतरा बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है, जलवायु परिवर्तन इंसान की लम्बाई और दिमाग को छोटा कर सकता है। पिछले लाखों सालों में इसका असर इंसान की लम्बाई-चौड़ाई पर पड़ा है। इसका सीधा कनेक्शन तापमान से है। यह दावा कैम्ब्रिज और टबिजेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। जिस तरह से साल-दर-साल तापमान में इजाफा हो रहा है और गर्मी बढ़ रही है, उस पर वैज्ञानिकों की यह रिसर्च अलर्ट करने वाली है। हर जीवाश्म ने जलवायु परिवर्तन की मार झेलीरिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने दुनियाभर से इंसानों के 300 से अधिक जीवाश्म देखे। इनके शरीर और ब्रेन के आकार की जांच की। जांच में सामने आया कि इंसानों के हर जीवाश्म ने जलवायु परिवर्तन की मार झेली है। अफ्रीका में इंसानों की प्रजाति होमो की उत्पत्ति 3 लाख साल पहले हुई थी, लेकिन ये इससे भी ज्यादा पुराने है। इसमें इंसानों की और प्रजा...
कमजोर लिवर वालों में कोविड होने पर मौत का खतरा 30 गुना, 7 दिन के इस डाइट प्लान से लिवर को ऐसे स्वस्थ रखें

कमजोर लिवर वालों में कोविड होने पर मौत का खतरा 30 गुना, 7 दिन के इस डाइट प्लान से लिवर को ऐसे स्वस्थ रखें

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अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी कहती है, लिवर की गंभीर बीमारी सिरोसिस से जूझने वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण होने पर मौत का खतरा 30 गुना अधिक रहा है। कोरोना के दौर में लिवर को स्वस्थ रखने की अहमियत बढ़ गई है। कनैडियन लिवर फाउंडेशन के मुताबिक, लिवर शरीर के लिए 500 तरह के काम करता है। इसमें शरीर को एनर्जी देना, इंफेक्शन और टॉक्सिन से बचाना, खून का थक्का जमने में मदद करना और हार्मोन को कंट्रोल करना जैसे प्रमुख काम शामिल हैं। 7 दिन के एक डाइट प्लान से लिवर को डिटॉक्स किया जा सकता है। यानी इसमें से जहरीले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं। डिटॉक्स डाइट का पहला काम आहार से कैफीन, निकोटीन और रिफाइंड शुगर जैसे हानिकारक पदार्थों को हटाकर उनकी जगह हेल्दी फूड को शामिल करना है। ग्लोबल लीडिंग होलिस्टिक हेल्थ गुरु डॉ. मिकी मेहता से जानिए लिवर को कैसे स्वस्थ रखें... मजबूत लिवर के लिए अप...
10 साल तक रोजाना 17 मिनट मोबाइल इस्तेमाल करते हैं कैंसर की गांठ बनने का खतरा 60% तक बढ़ जाता है, अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

10 साल तक रोजाना 17 मिनट मोबाइल इस्तेमाल करते हैं कैंसर की गांठ बनने का खतरा 60% तक बढ़ जाता है, अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

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स्मार्टफोन कैंसर का खतरा बढ़ाता है। अगर 10 साल तक हर रोज 17 मिनट तक मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं तो कैंसर की गांठ बनने का खतरा 60 फीसदी तक बढ़ जाता है। यह दावा मोबाइल फोन और इंसान की सेहत से जुड़़ी 46 तरह की रिसर्च के विश्लेषण के बाद किया गया है। रिसर्च करने वाली कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, मोबाइल सिग्नल से निकलने वाला रेडिएशन शरीर में स्ट्रेस प्रोटीन को बढ़ाता है जो डीएनए को डैमेज करता है। हालांकि, अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन इस बात से इंकार करता है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी से सेहत को खतरा है। मोबाइल की जगह लैंडलाइन का इस्तेमाल बेहतरकैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अमेरिका, स्वीडन, ब्रिटेन, जापान, साउथ कोरिया और न्यूजीलैंड में हुईं रिसर्च के आधार पर यह दावा किया है। रिसर्च कहती है, दुनियाभर में मोबाइल फोन यूजर्स बढ़ रह...
महिलाओं के मुकाबले पुरुष मीट खाना अधिक पसंद करते हैं; ये मानते हैं कि इससे उनकी मर्दों वाली छवि मजबूत बनती है

महिलाओं के मुकाबले पुरुष मीट खाना अधिक पसंद करते हैं; ये मानते हैं कि इससे उनकी मर्दों वाली छवि मजबूत बनती है

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क्या खाने-पीने का कनेक्शन इंसान के जेंडर से हो सकता है, नई रिसर्च में तो यही साबित हुआ है। महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक मीट खाना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि मीट खाने की आदत उनकी मर्दों वाली छवि को और मजबूत बनाती है। यह दावा कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिल्स की रिसर्च में किया गया है। यह रिसर्च अमेरिका के 1700 लोगों पर की गई है। इसका लक्ष्य यह पता लगाना था कि क्या मर्द वाकई में मीट खाना पसंद करते हैं। इकोफ्रेंडली मीट खाने के लिए प्रेरित होंगे सर्वे में सामने आया है कि पुरुष मर्दांनगी की परंपरागत सोच को मानते हैं और बीफ-चिकन खाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि सर्वे के नतीजे भविष्य में लोगों को इकोफ्रेंडली मीट खाने के लिए प्रेरित करेंगे। रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं की तुलना में पुरुष हर तरह के मीट खाते हैं, इसमें बीफ, पॉर्क, फिश और चिकन शामिल है। शाकाहारी खाने को ये उतना ...
डायबिटीज होने की एक वजह GIGYF1  जीन्स भी, यह 6 गुना तक इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ाता है; हर 3 हजार में से एक इंसान में ये मौजूद

डायबिटीज होने की एक वजह GIGYF1 जीन्स भी, यह 6 गुना तक इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ाता है; हर 3 हजार में से एक इंसान में ये मौजूद

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डायबिटीज होने की एक वजह इंसान के जीन्स भी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, GIGYF1 नाम का जीन्स टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 6 गुना तक बढ़ाता है। यह इंसुलिन को कंट्रोल करता है और हर 3 हजार में से एक इंसान में पाया जाता है। टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति में ब्लड शुगर का लेवल शरीर में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसे कंट्रोल करने के लिए शरीर में इंसुलिन नहीं बन पाता। ज्यादातर लोगों में बढ़ता मोटापा और फैमिली हिस्ट्री इसकी वजह होती है। एक से दूसरी पीढ़ी में पहुंचता है जीन्सवैज्ञानिकों का कहना है, परिवार में किसी को डायबिटीज होने पर यह अगली पीढ़ी के लोगों में हो सकती है। बीमारी को एक से दूसरी पीढ़ी में ले जाने का काम जीन्स करते हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने GIGYF1 जीन्स को डायबिटीज होने का एक कारण बताया है। हालांकि, इस पर अभी और रिसर्च होनी बाकी है। बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं ज...
हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

हैंड सैनेटाइजर से शरीर में मेथेनॉल जैसे जहरीले केमिकल पहुंचते हैं; इससे अमेरिका में 15 में से 4 की आंखों की रोशनी गई, 3 की मौत हुई

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सैनेटाइजर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है। मेयो क्लीनिक के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करते हैं आंखों की रोशनी जाने के साथ मौत भी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। सैनेटाइजर में मौजूद जहरीले केमिकल स्किन के जरिए बच्चों के शरीर में पहुंच सकते हैं। ऐसा क्यों है, इसकी वजह भी जानिए हैंड सैनेटाइजर में तीन तरह के अल्कोहल इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से एक है, मेथेनॉल। इसका अधिक इस्तेमाल करने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है या मौत भी हो सकती है।अमेरिका में मेथेनॉल वाले हैंड सैनेटाइजर बनाने पर बैन लगा दिया गया है। मेथेनॉल की जगह एथेनॉल और आइसोप्रोपेनॉल को सुरक्षित विकल्प माना गया है। वहीं, कई देशों में इस्तेमाल हो रहे सैनेटाइजर में मेथेनॉल मौजूद है।बच्चों की स्किन के जरिए मेथेनॉल शरीर में पहुंचकर लम्बे समय स...
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण 10 साल पहले ही दिखने लगते हैं, याद्दाश्त घटना और रोजमर्रा के कामों को करने क्षमता कम होती है तो अलर्ट हो जाएं

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण 10 साल पहले ही दिखने लगते हैं, याद्दाश्त घटना और रोजमर्रा के कामों को करने क्षमता कम होती है तो अलर्ट हो जाएं

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ब्रेन स्ट्रोक का खतरा घटाना चाहते हैं तो उसके लक्षणों पर नजर रखें। नई रिसर्च कहती है, ब्रेन स्ट्रोक होने से 10 साल पहले ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं। जैसे, याद्दाश्त कम होने लगती है और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता घटने लगती है। यह दावा नीदरलैंड्स की एरेसमस यूनिवर्सिटी वैज्ञानिकों ने 28 साल तक चली रिसर्च के बाद किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, ऐसे लक्षण दिखते हैं तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके, दवाएं लेकर और खानपान में सुधार करके स्ट्रोक का खतरा घटा सकते हैं। ऐसे हुई रिसर्चवैज्ञानिकों का कहना है, रिसर्च में 14,712 लोग शामिल किए गए। 28 साल तक इन पर नजर रखी गई। इनका फिजिकल और मेंटल टेस्ट लिया गया। जिसमें मेमोरी टेस्ट भी शामिल था। इसके अलावा इनके रोजमर्रा के काम जैसे बैंकिंग, कपड़े धोना, खाना बनाने के तरीके की एनालिसिस भी की गई। इन 28 सालों में जिन 1,662 लोगों को पहली बार ब्रेन स्ट्रोक ह...
स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लेकर कोविड टेस्ट किया जा सकेगा, दावा; 81 से 100 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है

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लंदन के वैज्ञानिकों ने कोरोना की जांच का नया तरीका ढूंढा है। इसका नाम फोन स्क्रीन टेस्टिंग रखा गया है। अब जांच के लिए स्वैब स्टिक से नाक या गले से सैम्पल लेने की जरूरत नहीं। स्मार्टफोन की स्क्रीन से सैम्पल लिया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि फोन स्क्रीन टेस्टिंग से जांच के नतीजे आरटी-पीसीआर की तरह ही सटीक आते हैं और खर्च भी कम आता है। शोधकर्ता डॉ. रोड्रिगो यूंग कहते हैं, इस जांच को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और डायग्नोसिस बायोटेक स्टार्टअप के साथ मिलकर तैयार किया है। स्मार्टफोन को ही क्यों चुनाजांच करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है, जब कोई इंसान खांसता है या बात करता है तो मुंह से ड्रॉप्लेट्स यानी लार की बूंदें निकलकर आसपास की सतह पर इकट्ठा हो जाती हैं। कोरोना से संक्रमित इंसान के ड्रॉप्लेट्स में वायरस के कण होते हैं। मुंह से निकलने वाले ये ड्रॉप्लेट्स स्मार्टफोन की स्क्रीन पर इक...