725 साल से यहां नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन:रक्षा के लिए यवन सेना से जंग लड़ते शहीद हुए थे हजारों क्षत्रिय-ब्राह्मण, रातोंरात छोड़ना पड़ा था शहर; आज के दिन करते हैं पूर्वजों को याद
पाली
भाई बहन के अपार प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन हिन्दू धर्म में सभी समाज और वर्ग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। आदि गौड़ वंशीय पालीवाल ब्राह्मण पिछले करीब सवा सात सौ सालों से यह त्योहार नहीं मना रहा है। आज के दिन पालीवाल समाज के लोग शहीद हुए पूर्वजों की याद में तर्पण करते हैं और पाली के धौला चौतरा पर बने स्मारक पर पुष्पाजंलि अर्पित करते हैं।
क्या है रक्षाबंधन नहीं मनाने की कहानीकहते हैं कि पाली नगर को बसाने वाले पालीवाल ब्राह्मण थे। इनकी समृद्धि की चर्चा चारों और थी। इसके चलते उन्हें कई आक्रमणों का सामना करना पड़ा। फिरोजशाह द्वितीय ने करीब 725 साल पहले पाली पर आक्रमण कर दिया। पाली नगर और अपने धर्म की रक्षा के लिए क्षत्रियों के साथ हजारों ब्राह्मणों ने भी तलवारें उठाईं और युद्ध में कूद पड़े। इस युद्ध में हजारों ब्राह्मण भी शहीद हुए। कहा जाता है कि शहीद हुए ब्राह्मणों की बॉडी से 9 मण (1 ...








