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पिघल रहा आइलैंड:ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर पहली बार हुई मूसलाधार बारिश, बर्फ के पिछलने की दर रोजाना के मुकाबले 7 गुना तक बढ़ी; वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

पिघल रहा आइलैंड:ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर पहली बार हुई मूसलाधार बारिश, बर्फ के पिछलने की दर रोजाना के मुकाबले 7 गुना तक बढ़ी; वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

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ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर पहली बार हुई मूसलाधार बारिश ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल साइंस फाउंडेशन समित स्टेशन के मुताबिक, 14 अगस्त को पहली बार 10,551 फीट ऊंचे शिखर पर 7 करोड़ टन पानी गिरा है। इतनी बारिश होने के कारण यहां बर्फ की चादरें टूटकर बिखर गईं। 1950 से जब से यहां का तापमान रिकॉर्ड करना शुरू किया गया है, तब से पहली बार है जब बर्फ के पिघलने की दर रोजाना से 7 गुना तक ज्यादा थी। ग्रीनलैंड तेज से पिघल रहाअमेरिका के नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर (NSIDC) की रिपोर्ट कहती है, 14 अगस्त बारिश के कारण 8.72 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में बर्फ पिघल गई थी। NSIDC के रिसर्चर टेड स्कैमबोस का कहना है, इतने ऊंचे शिखर पर पहले कभी इतनी बारिश नहीं हुई। इस बारिश के कारण जितनी बर्फ पिछली है, उतनी बर्फ तो आमतौर पर हफ्तों सा सालभर में पिछलती है। पर्यावरण में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं उसस...
खानपान से उम्र का कनेक्शन:हॉटडॉग इंसान की उम्र 36 मिनट घटाता है और पीनट बटर उम्र 33 मिनट तक बढ़ा देते हैं, जानिए उम्र पर असर डालने वाले फूड

खानपान से उम्र का कनेक्शन:हॉटडॉग इंसान की उम्र 36 मिनट घटाता है और पीनट बटर उम्र 33 मिनट तक बढ़ा देते हैं, जानिए उम्र पर असर डालने वाले फूड

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हमारा रोजाना का खानपान हमारी उम्र को बढ़ा रहा या घटा रहा है, इस पर अमेरिकी वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर खाए जाने कई फूड ऐसे हैं जो उम्र को घटा रहे हैं। जैसे- हॉटडॉग खाने से इंसान की उम्र 36 मिनट घट जाती है, वहीं मूंगफली के साल्टेड दाने खाने से उम्र में 26 मिनट तक का इजाफा होता है। खानपान पर रिसर्च करने वाली मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 5 हजार से अधिक खाने की चीजों का अध्ययन किया जो इंसान की स्वस्थ्य पर असर डालते हैं। इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने रोजमर्रा के खाने की चीजों को तैयार होने से लेकर उसके फेंके जाने तक का पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है, इसका भी अध्ययन किया। ऐसे हुई रिसर्चशोधकर्ताओं ने हॉटडॉग, पिज्जा, योगर्ट और चीज जैसे 5,800 फूड पर रिसर्च की। इन फूड का सेहत और पर्यावरण पर असर देखा। इनसे हमारी उम्र बढ़ती है या घटती है इसे समझाने के लिए ...
एक नर्स की अपील:कोरोना के कारण अपने नवजात को खोने वाली नर्स की आपबीती, कहा; वैक्सीन जरूर लगवाएं इसे नजरअंदाज न करें ताकि कोई और मां अपना बेटा न खो सके

एक नर्स की अपील:कोरोना के कारण अपने नवजात को खोने वाली नर्स की आपबीती, कहा; वैक्सीन जरूर लगवाएं इसे नजरअंदाज न करें ताकि कोई और मां अपना बेटा न खो सके

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कोरोना के कारण अपने बच्चे को खोने वाली अमेरिका की वेनेस्सा अल्फरमैन ने अपनी आपबीती साझा की है। वेनेस्सा कहती हैं, जो लोग वैक्सीन लगवाने से इंकार कर रहे हैं, उनसे मैं वैक्सीन लगवाने की अपील कर रही हूं। मैं जिस समय प्रेग्नेंट हुई उस समय वैक्सीन उपलब्ध होना शुरू हुई थी और मैं नहीं लगवा सकी। वेनेस्सा पेशे से एक नर्स हैं और कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटी थीं, लेकिन वो अपने बच्चे को नहीं बचा सकीं। उन्हें आज भी इसका मलाल है। इस घटना के बाद वो लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील कर रही हैं। वह कहती हैं, वैक्सीन जरूर लगवाएं, इसे नजरअंदाज न करें ताकि कोई और मां अपने बच्चे को न खो सके। जानिए वेनेस्सा की आपबीती... वेनेस्सा अमेरिका के मिस्सौरी बैप्टिस्ट हॉस्पिटल में एक नर्स हैं। नवम्बर 2020 में उन्हें और उनके पति को कोविड का संक्रमण हुआ। उस दौरान वेनेस्सा कोरोना के मरीजों का इलाज कर रही थीं और ...
आंखों से दिमाग का तालमेल समझाएगा मिनी ब्रेन:जर्मनी के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल्स से लैब में विकसित किया कृत्रिम ह्यूमन ब्रेन, इसमें आंखें भी विकसित हुईं; जानिए क्यों है यह खास

आंखों से दिमाग का तालमेल समझाएगा मिनी ब्रेन:जर्मनी के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल्स से लैब में विकसित किया कृत्रिम ह्यूमन ब्रेन, इसमें आंखें भी विकसित हुईं; जानिए क्यों है यह खास

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जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लैब में एक कृत्रिम मानव मस्तिष्क तैयार किया है। इस मिनी ब्रेन में आंखें भी हैं। हालांकि आंखें पूरी तरह विकसित नहीं हैं। इस मिनी ब्रेन को इंसान की स्टेम कोशिकाओं से विकसित किया गया है। इसे जर्मनी के इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन जेनेटिक्स के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, मिनी ब्रेन में आंखें ऐसे विकसित हुई हैं जैसे 5 हफ्ते के भ्रूण की होती हैं। भविष्य में इससे कई नई बातें सामने आ सकेंगी जो कई बीमारियों के इलाज में मदद करेंगी। क्यों खास है यह मिनी ब्रेन, जानिए इसकी 3 बड़ी बातें मिनी ब्रेन 3 मिमी. चौड़ा है। इसमें मौजूद आंखों में कॉर्निया, लेंस और रेटिना है, इसकी मदद से यह रोशनी को देख पाता है। ये आंखें न्यूरॉन और नर्व कोशिकाओं की मदद से यह ब्रेन से कम्युनिकेट भी कर सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, लैब में तैयार यह रेटिना भविष्य में उन लोगों क...
20 सेकंड तक हाथ धोने की नया तरीका:हाथों की सतह से बैक्टीरिया-वायरस हटाने के लिए अधिक एनर्जी और दबाव जरूरी, जो हाथों को तेजी से मलने और पानी की तेज धार से बनता है

20 सेकंड तक हाथ धोने की नया तरीका:हाथों की सतह से बैक्टीरिया-वायरस हटाने के लिए अधिक एनर्जी और दबाव जरूरी, जो हाथों को तेजी से मलने और पानी की तेज धार से बनता है

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महामारी की शुरुआत से ही एक्सपर्ट 20 सेकंड तक हाथ धोने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि 20 सेकंड में हाथों के हर हिस्से तक साबुन पहुंचना जरूरी है, ताकि बैक्टीरिया या वायरस हाथ की सतह से छूट सके। हाल में हुई एक रिसर्च में 20 सेकंड हाथ धोने सलाह तो दी गई है लेकिन इसकी वजह अलग है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाथों से बैक्टीरिया और वायरस का निकलना इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी तेजी हाथों को धोते हैं और नल से आने वाले पानी का फ्लो कितना तेज है। वैज्ञानिकों ने इसे अपने मैथमेटिकल मॉडल से समझाया है। हाथों में बैक्टीरिया या वायरस क्यों फंसे रह जाते हैं, हाथ धोने का नया तरीका क्या है और हाथों को न धोने से संक्रमण कितना फैल सकता है, जानिए इन सवालों के जवाब... सबसे पहले जानिए, हाथों में वायरस-बैक्टीरिया अटकते क्यों है?रिसर्च करने वाले यूके के हैमंड कंसल्टिंग ग्रुप के वैज्ञानिक पॉल हैम...
बेली फैट बड़ा खतरा:कमर की चर्बी से डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ता है, जानिए बेली फैट घटाने के 5 आसान और असरदार तरीके

बेली फैट बड़ा खतरा:कमर की चर्बी से डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ता है, जानिए बेली फैट घटाने के 5 आसान और असरदार तरीके

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हार्वर्ड मेडिकल हेल्थ के मुताबिक, बेली फैट यानी कमर के आसपास चर्बी जमा होना सेहत के लिए ठीक नहीं है। यह चेतावनी की तरह है। मेडिकल भाषा में इस अनहेल्दी फैट को विसरल फैट कहते हैं। ज्यादा चर्बी से टाइप-2 डायबिटीज़, हृदय रोग, यहां तक कि कैंसर का भी खतरा रहता है। बेली फैट कुछ उपायों से आसानी से कम किया जा सकता है। जानिए 5 तरीके जो कमर की चर्बी को घटाने में मदद करेंगे... 1) कैलोरी मैनेजमेंट: 500 कैलोरी ज्यादा खर्च करेंवजन घटाने के लिए भूखा रखने की जरूरत नहीं है। बस, जितना खाएं, उससे 500 कैलोरी ज्यादा खर्च करें। इसे हेल्दी कैलोरी डेफिसिट कहते हैं। 2) वॉक का नियम: हफ्ते में 3 दिन 50-70 मिनट की वॉकइससे बेली फैट काफी कम होता है। हार्वर्ड इंस्टीट्यूट के मुताबिक, इससे न सिर्फ त्वचा के नीचे का फैट बल्कि एब्डॉमिनल कैविटी में छुपा फैट भी घटता होता है। 3) खाने का फॉर्मूला: 30 फीसदी कैलोरी प्रो...
कोरोना की तेज, सस्ती और सटीक जांच का दावा:पेन्सिल की ग्रेफाइट वाली नोक से हो सकेगी कोरोना की जांच; दावा- लार के सैम्पल से 7 मिनट में 100% सटीक नतीजे बताती है

कोरोना की तेज, सस्ती और सटीक जांच का दावा:पेन्सिल की ग्रेफाइट वाली नोक से हो सकेगी कोरोना की जांच; दावा- लार के सैम्पल से 7 मिनट में 100% सटीक नतीजे बताती है

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना की नई जांच विकसित की है। पेंसिल की नोंक में इस्तेमाल होने वाली ग्रेफाइट की मदद से मात्र 6.5 मिनट में कोविड की जांच की जा सकेगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना की नई जांच सस्ती होने के साथ तेज है और 100 फीसदी तक सटीक नतीजे देती है। कोविड की नई जांच विकसित करने वाली अमेरिका की पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में मौजूद कोरोना की ज्यादातर जांचें महंगी हैं। इसके लिए ट्रेन्ड प्रोफेशनल की जरूरत पड़ती है, लेकिन ग्रेफाइट से होने वाली जांच से इसकी कीमत 100 रुपए तक घटाई जा सकती है। इस जांच का नाम लीड (लो-कॉस्ट इलेक्ट्रोकेमिकल एडवांस्ड डायग्नोस्टिक) टेस्ट रखा गया है। ऐसे करते हैं जांचजांच के लिए ग्रेफाइड की छड़ी को इलेक्ट्रोड की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे सलाइवा या नाक से लिए सैम्पल और ह्यूमन एंजियोटेंसिन कंवर्टिंग एंजाइम-2 के साथ ...
मांओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:डायबिटीज से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों में नजर कमजोर होने का खतरा 39% तक ज्यादा; प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर कंट्रोल करें

मांओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:डायबिटीज से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों में नजर कमजोर होने का खतरा 39% तक ज्यादा; प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर कंट्रोल करें

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डायबिटीज से जूझने वाली मांओं के बच्चों को भविष्य में 39 फीसदी तक नजर कमजोर होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे बच्चों की समय-समय पर आंखों की जांच करानी जरूरी है। यह दावा अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, गर्भवती महिला में डायबिटीज का असर भविष्य में बच्चे में दिख सकता है। रिसर्च कितने बच्चों पर हुई, मां में डायबिटीज होने पर बच्चों में खतरा बढ़ता कैसे है, बच्चों में खतरे को कैसे कम करें, जानिए इन सवालों के जवाब... सबसे पहले जानिए, रिसर्च कैसे हुईअंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने डेनमार्क के 553 बच्चों पर स्टडी की। ये ऐसे बच्चे थे जिनकी मांओं को प्रेग्नेंसी से पहले टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज थी। या फिर प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई, जिसे वैज्ञानिक भाषा में जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं। यह रिसर्च पूरी होने के बाद इन 553 बच्चों की तुलन...
इटेलियन शोधकर्ताओं का दावा:चॉकलेट और चीज सीमित मात्रा में लेते हैं तो हार्ट हेल्दी रहता है, हृदय रोगों का खतरा घटता है, जानिए इन्हें कितना खाएं

इटेलियन शोधकर्ताओं का दावा:चॉकलेट और चीज सीमित मात्रा में लेते हैं तो हार्ट हेल्दी रहता है, हृदय रोगों का खतरा घटता है, जानिए इन्हें कितना खाएं

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हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए एक्सपर्ट एक्सरसाइज के साथ हेल्दी डाइट लेने की सलाह देते हैं। हालिया रिसर्च में वैज्ञानिकों ने हार्ट को हेल्दी रखने के लिए चॉकलेट, चीज और योगर्ट सीमित मात्रा खाने की सलाह दी है। यह दावा इटली की नेपल्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, रोजाना 200 ग्राम डेयरी प्रोडक्ट लेते हैं तो इससे दिल को नुकसान नहीं पहुंचता। अगर आप चीज खाना पसंद करते हैं तो एक तिहाई कप चीज खा सकते हैं। 50 ग्राम चीज खाते हैं तो हार्ट हेल्दी रहता है। शोधकर्ताओं का कहना है, अगर चॉकलेट एक तय मात्रा में लेते हैं तो यह हृदय रोगों का खतरा कम करती है। 20 से 45 ग्राम तक चॉकलेट खाते हैं तो फायदा पहुंचता है। डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय को स्वस्थ रखते हैं। अब जानिए हार्ट को कैसे स्वस्थ रखें हृदय रोगों से बचाव के वो दो तरीके...
कोरोनाकाल में बच्चों में बढ़ रहा गैजेट्स का इस्तेमाल:रोजाना गैजेट्स पर 8 से 10 घंटे बिता रहे बच्चे, नतीजा; इनकी ब्रेन सेल्स डैमेज हो रहीं; बिहेवियर हिंसक हो रहा और नींद पूरी नहीं हो रही

कोरोनाकाल में बच्चों में बढ़ रहा गैजेट्स का इस्तेमाल:रोजाना गैजेट्स पर 8 से 10 घंटे बिता रहे बच्चे, नतीजा; इनकी ब्रेन सेल्स डैमेज हो रहीं; बिहेवियर हिंसक हो रहा और नींद पूरी नहीं हो रही

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बच्चों में गैजेट का बढ़ता इस्तेमाल उनके दिमाग पर बुरा असर छोड़ रहा है। एक्सपर्ट कहते हैं, कोरोनाकाल में बच्चे एक दिन में करीब 8-10 घंटे गैजेट्स के साथ बिता रहे हैं, नतीजा इनके दिमाग की ब्रेन सेल्स डैमेज हो रही हैं। मोटापा बढ़ रहा है। नींद नहीं पूरी हो रही। इनका बिहेवियर हिंसक हो रहा है। मुम्बई के मसीना हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. राज अगरबत्तीवाला कहते हैं, महामारी के कारण पेरेंट्स बच्चों को बाहर निकलने से तो बचा रहे हैं, लेकिन वो बच्चों को मोबाइल और टैबलेट खेलने के लिए दे रहे हैं। नतीजा, बच्चे घंटों उस पर समय बिता रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी हुई पुष्टिनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने 47 प्री-स्कूल ऐज वाले बच्चों पर रिसर्च की। ये 2 से 5 साल की उम्र वाले ऐसे बच्चे थे जिन्होंने अभी स्कूल जाना शुरू नहीं किया। ये गैजेट्स पर अधिक समय बिताते थे। इनके ब्र...