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लाइफस्टाइल

ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे के लिए है फायदेमंद:मां का पहला दूध नवजात को रोगों से लड़ने की क्षमता देता है और मां में ब्रेस्ट कैंसर व आर्थराइटिस का खतरा घटता है

ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे के लिए है फायदेमंद:मां का पहला दूध नवजात को रोगों से लड़ने की क्षमता देता है और मां में ब्रेस्ट कैंसर व आर्थराइटिस का खतरा घटता है

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नवजात शिशु को स्वस्थ रखने में मां के दूध का सबसे बड़ा रोल होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, मां के दूध से शिशु में एंटीबॉडीज बनती हैं, जो बचपन की कई बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं। स्तनपान से न केवल शिशु को फायदा होता बल्कि मां को भी इसके कई फायदे मिलते हैं। 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले ब्रेस्टफीडिंग वीक के मौके पर इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सारिका गुप्ता बता रही हैं, ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे दोनों के लिए कितना जरूरी है... मां के दूध से नवजात शिशु को 4 बड़े फायदे इम्यून सिस्टम बेहतर होता है: जन्म के पहले घंटे में ही मां का दूध पीने वाले बच्चों की कम उम्र में मौत का खतरा 20% तक कम हो जाता है। बच्चा वैक्सीनेशन के प्रति बेहतर रिस्पॉन्ड करता है।संक्रमण का खतरा घटता है: मां का दूध पीने से बच्चे में ड...
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का दावा:फेफड़ों में कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकती है कलौंजी, यह इम्यून सिस्टम को बेकाबू होने से भी रोक सकती है

ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का दावा:फेफड़ों में कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकती है कलौंजी, यह इम्यून सिस्टम को बेकाबू होने से भी रोक सकती है

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कलौंजी कोरोनावायरस को फेफड़ों तक पहुंचने से रोक सकती है। इसमें थाइमोक्विनोन नाम का तत्व पाया जाता है जो कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन से चिपक कर उसे फेफड़ों तक नहीं पहुंचने देता। भविष्य में कलौंजी का इस्तेमाल कोरोना के इलाज के लिए भी किया जा सकता है। यह दावा ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। 'सायटोकाइन स्टॉर्म' को रोकती हैरिसर्च करने वाली सिडनी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रोफेसर कनीज फातिमा शाह का कहना है, कोरोना से संक्रमित कई मरीजों का इम्यून सिस्टम बेकाबू होने लगता है। नतीजा, रोगों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसे सायटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं। कलौंजी इसी सायटोकाइन स्टॉर्म को रोकने की कोशिश करती है। साथ ही शरीर में सूजन भी कम करती है। थाइमोक्विनोन के कारण अस्थमा, एक्जिमा, आर्थराइटिस के इलाज में कलौंजी असरदार साबित होती है...
पुर्तगाल का अनोखा मामला:बच्चे को जन्म देने के 2 दिन बाद महिला के आर्मपिट से आने लगा ‘दूध’, जानिए क्या है दुनियाभर की 6% महिलाओं को होने वाली यह बीमारी

पुर्तगाल का अनोखा मामला:बच्चे को जन्म देने के 2 दिन बाद महिला के आर्मपिट से आने लगा ‘दूध’, जानिए क्या है दुनियाभर की 6% महिलाओं को होने वाली यह बीमारी

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पुर्तगाल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डिलीवरी के दो दिन बाद से ही 26 साल की महिला के आर्मपिट से दूध निकलना शुरू हो गया। पुर्तगाल के हॉस्पिटल में आर्मपिट की जांच के दौरान यहां पर ब्रेस्ट टिश्यू होने की पुष्टि हुई है। इस हिस्से को दबाने पर सफेद रंग का लिक्विड निकलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला पॉलीमेस्टिया नाम की बीमारी से जूझ रही है। 6 फीसदी महिलाओं में ऐसे मामले देखने को मिलते हैं। ऐसी स्थिति में एक से अधिक जगह पर ब्रेस्ट टिश्यू विकसित हो जाते हैं। ब्रेस्ट टिश्यू विकसित होने के बाद कुछ जगह पर निप्पल दिखाई देते हैं तो कुछ जगहों पर केवल स्पॉट नजर आते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं में ऐसी जगहों पर दर्द होता है। महिला की जांच करने वाले डॉक्टर्स ने उसे सलाह दी है कि जब भी ब्रेस्ट कैंसर के लिए स्क्रीनिंग करवाएं तो आर्मपिट में विकसित हुए ब्रेस्ट टिश्यू की भी टेस्टिंग कर...
कोरोनाकाल में बढ़ती ‘ड्राय आई’ की समस्या:बच्चे औसतन 4 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं, आंखों में लालिमा, खिंचाव और जलन के मामले बढ़ रहे; 20-20-20 का फॉर्मूला अपनाकर इसे रखें स्वस्थ

कोरोनाकाल में बढ़ती ‘ड्राय आई’ की समस्या:बच्चे औसतन 4 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं, आंखों में लालिमा, खिंचाव और जलन के मामले बढ़ रहे; 20-20-20 का फॉर्मूला अपनाकर इसे रखें स्वस्थ

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अगर आप आंखों में चुभन, जलन, लालिमा, थकान या खिंचाव आदि महसूस कर रहे हैं तो यह ड्राय आई का संकेत हो सकता है। ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ. सैम बर्न के मुताबिक, इसके दो कारण हैं। पहला कारण आंखों में सूजन है। अमूमन यह सूजन पलकों या आंसू की ग्रंथियों के पास आती है। वहीं, दूसरा बड़ा कारण डिजिटल आई स्ट्रेन है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC का कहना है, कम्प्यूटर या मोबाइल स्क्रीन में देखने पर आंखें 66 प्रतिशत तक कम झपकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो साल से लॉकडाउन की परिस्थितियों के कारण देश में बच्चे दिनभर में औसतन 4 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं, ऐसे मामलों में 20-20-20 का फार्मूला अपनाएं। हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद आंखों को 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। इससे आंखों को राहत मिलेगी। अगर बच्चे गैजेट का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, ये बातें सावधानियां ध्यान रखें कंप...
पेरेंट्स को राहत देने वाली रिसर्च:बच्चों में लॉन्ग कोविड का खतरा बेहद कम, ज्यादातर संक्रमित बच्चे हफ्तेभर में हो जाते हैं रिकवर; किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च

पेरेंट्स को राहत देने वाली रिसर्च:बच्चों में लॉन्ग कोविड का खतरा बेहद कम, ज्यादातर संक्रमित बच्चे हफ्तेभर में हो जाते हैं रिकवर; किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च

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कोरोना से जूझने वाले ज्यादातर संक्रमित बच्चे हफ्तेभर में ठीक हो जाते हैं। कुछ ही बच्चों में लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखाई देते हैं। यह दावा किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। रिसर्चर्स का कहना है, हर 20 में से 1 से भी कम बच्चे में कोविड के लक्षण लम्बे समय के लिए दिख सकते हैं। ये लक्षण 4 हफ्ते से अधिक समय के लिए दिखते हैं और 8 हफ्तों के अंदर बच्चा पूरी तरह से रिकवर हो जाता है। बच्चों में दिखने वाले सबसे कॉमन लक्षणों में सिरदर्द, थकान, गले में खराश और गंध की पहचान न कर पाना शामिल है। बच्चों में लॉन्ग कोविड के मामले दुर्लभलैंसेट चाइल्ड एंड अडोलेसेंट हेल्थ जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, कोविड-19 से संक्रमित करीब 4.4 फीसदी बच्चों में ही एक महीने से अधिक समय तक लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखाई दिए। किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर एम्मा डंकन का कहना है, संक्रमण के बाद ब...
वैक्सीन का डेल्टा वायरस पर असर:वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद डेल्टा वायरस से संक्रमण का खतरा 60 फीसदी तक घट जाता है, इम्पीरियल कॉलेज लंदन का दावा

वैक्सीन का डेल्टा वायरस पर असर:वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद डेल्टा वायरस से संक्रमण का खतरा 60 फीसदी तक घट जाता है, इम्पीरियल कॉलेज लंदन का दावा

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वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद कोरोना के नए रूप डेल्टा वायरस से भी संक्रमण का खतरा 50 से 60 फीसदी तक घट जाता है। यह दावा इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में किया है। रिसर्चर्स के मुताबिक, वैक्सीन न लेने वालों में संक्रमण का खतरा टीका लगवाने वालों के मुकाबले तीन गुना अधिक रहता है। 98,233 लोगों के बीच जाकर रैंडम सैम्पल लिएरिसर्च के लिए 98,233 लोगों के घर जाकर सैम्पल लिए गए। 24 जून से 12 जुलाई के बीच सैम्पल की पीसीआर टेस्टिंग की गई। इनमें से 527 लोग पॉजिटिव आए। इन 527 पॉजिटिव सैम्पल में से 254 सैम्पल में मौजूद वायरस की उत्पत्ति को समझने के लिए दोबारा लैब में जांच की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि इन सैम्पल्स में 100 फीसदी तक डेल्टा वायरस था। रैंडम सैम्पल से वैक्सीन के असर को जांचाइम्पीरियल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ पॉल इलियट का कहना है, हमनें लोगों के बीच से रैंडम सैम्पल...
लैंसेट जर्नल की स्टडी:कोविड होने के अगले 2 हफ्तों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा तीन गुना, इसलिए वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी; स्वीडन के वैज्ञानिकों का दावा

लैंसेट जर्नल की स्टडी:कोविड होने के अगले 2 हफ्तों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा तीन गुना, इसलिए वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी; स्वीडन के वैज्ञानिकों का दावा

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कोविड होने के अगले 2 हफ्तों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा तीन गुना है। यह दावा लैंसेट जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है, रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि कोरोना की वैक्सीन लगवाना कितना जरूरी है। खासतौर पर बुजुर्ग जो पहले ही हृदय रोगों के रिस्क जोन में हैं। 86 हजार से अधिक संक्रमितों पर हुई स्टडीरिसर्च करने वाली स्वीडन की उमिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है, 1 फरवरी से 14 सितम्बर 2020 के बीच स्टडी की गई। स्टडी में शामिल कोरोना के 86,742 मरीज और 3,48,481 सामान्य लोगों के बीच हार्ट अटैक और स्ट्रोक पड़ने की तुलना की गई। तुलना करने पर सामने आया कि कोविड के मरीजों में संक्रमण के 15 दिनों के अंदर इन बीमारियों का खतरा 3 गुना तक बढ़ता है। बीमारी, उम्र और जेंडर भी रिस्क बढ़ाते हैं रिसर्चर्स के मुताबिक, संक्रमित मरीजों में पहले से मौजूद बीमारियां, उम्र,...
वैक्सीन क्यों जरूरी, एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझें:वैक्सीन न लेने वाले कोरोना पेशेंट के फेफड़े में दिखे सफेद धब्बे, यही ऑक्सीजन की कमी का कारण; टीका लगवाने वालों में ऐसा नहीं हुआ

वैक्सीन क्यों जरूरी, एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझें:वैक्सीन न लेने वाले कोरोना पेशेंट के फेफड़े में दिखे सफेद धब्बे, यही ऑक्सीजन की कमी का कारण; टीका लगवाने वालों में ऐसा नहीं हुआ

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कोरोना वैक्सीन लगवानी कितनी जरूरी है, इसे अमेरिका के एक डॉक्टर ने एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझाया है। वैक्सीन न लेने वाले कोरोना संक्रमित और वैक्सीन लेने वाले मरीज के संक्रमित हुए फेफड़े इसके असर को बताते हैं। कोरोना होने पर वैक्सीन के असर को एक्सरे की दो फोटो से समझते हैं.. कोरोना संक्रमित होने पर वैक्सीन न लगवाने वालों के फेफड़े की एक्सरे रिपोर्ट में सफेद धब्बे दिखते हैं। यह दिखाता है कि फेफड़ों में वायरस लोड काफी है और इनमें से ऑक्सीजन गुजरने की जगह नहीं है। यही स्थिति सांस लेने में परेशानी की वजह बनती है। जिन मरीजों ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी, एक्सरे में उनके फेफड़े पर सफेद स्पॉट दिखे, यह वायरल लोड और सूजन को दिखाता है। दूसरी तरफ, वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में संक्रमण का असर कम दिख रहा है। एक्सरे में ज्यादा काला हिस्सा नजर आने का मतलब यह है कि इनके फेफड़ों में ऑक्सीजन जाने...
हेल्दी हार्ट के लिए वैज्ञानिकों की बुजुर्गों को सलाह:रोजाना 250 कैलोरी घटाकर और एक्सरसाइज करके बढ़ती उम्र में हृदय रोगों का खतरा घटा सकते हैं, धमनी की अकड़न भी घटती है

हेल्दी हार्ट के लिए वैज्ञानिकों की बुजुर्गों को सलाह:रोजाना 250 कैलोरी घटाकर और एक्सरसाइज करके बढ़ती उम्र में हृदय रोगों का खतरा घटा सकते हैं, धमनी की अकड़न भी घटती है

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हार्ट को हेल्दी रखने के लिए वैज्ञानिकों ने बुजुर्गोँ को सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है, हृदय रोगों से बचने के लिए शाम में नाश्ते में कटौती करें, रोजाना 250 कैलोरी कम लें और हल्की-फुल्की एक्ससाइज करें। ये आदतें बढ़ती उम्र में दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। यह रिसर्च नॉर्थ कैरोलिना के वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने की है। 160 ओवरवेट बुजुर्गों पर हुई रिसर्चवैज्ञानिकों ने 60 से 70 साल की उम्र वाले 160 ओवरवेट बुजुर्गों पर 20 हफ्तों तक रिसर्च की। इन्हें तीन ग्रुप में बांटा गया। इनमें से एक तिहाई बुजुर्गों को रेग्युलर डाइट के साथ हफ्ते में 4 दिन 30 मिनट तक ट्रेडमिल करने को कहा गया। वहीं, दूसरे ग्रुप को यही रूटीन फॉलो करने के साथ कैलोरी में कटौती करने को कहा गया। इसमें से आधे लोगों को रोजाना 250 और आधे को 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी गई। दिल की सेहत सुधरी, धमनी क...
साइंस ऑफ लर्निंग:ब्रेन को एक्टिव बनाने के लिए नई भाषा सीखें और दोनों हाथों का इस्तेमाल करें; ऐसी एक्टिविटीज मस्तिष्क को तेज बनाती हैं

साइंस ऑफ लर्निंग:ब्रेन को एक्टिव बनाने के लिए नई भाषा सीखें और दोनों हाथों का इस्तेमाल करें; ऐसी एक्टिविटीज मस्तिष्क को तेज बनाती हैं

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दिमाग की क्षमताएं बढ़ाने के लिए उसे चुनौती देनी पड़ती है। मानसिक गतिविधियों से मस्तिष्क की सामंजस्य बैठाने की क्षमता बढ़ती है। इससे हियरिंग लॉस और डिप्रेशन से भी बचाव होता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कैथरीन पैप के मुताबिक, न्यूरोजेनेसिस प्रक्रिया से मस्तिष्क में नई कोशिका बनती हैं। जब आप अपनी मानसिक क्षमताओं को चैलेंज करते हैं तो मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच नया कनेक्शन बनाता है। ऐसा होने पर दिमाग अधिक एक्टिव रहता है और तेज काम करता है। दोनों हाथों का इस्तेमाल करेंन्यूरोबायोलॉजिस्ट लॉरेंस कैट्ज के मुताबिक, दोनों हाथों का बराबर इस्तेमाल करने से क्रिएटिव और लॉजिकल थिंकिंग बेहतर होती है। इसके लिए उल्टे हाथ से ब्रश करना, बालों में कंघी या फिर लिखने में दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकते हैं। नई भाषा सीखें, ब्रेन की एक्टिविटी बढ़ती हैकिसी भी दूसरी भाषा में पारंगत होने में व...