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सुबह-सुबह खाली पेट पिएं मेथी का पानी, डायबिटीज से लेकर पेट संबंधी समस्याओं को रखें अंडर कंट्रोल

सुबह-सुबह खाली पेट पिएं मेथी का पानी, डायबिटीज से लेकर पेट संबंधी समस्याओं को रखें अंडर कंट्रोल

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
चाहे सब्जी हो या लड्डू, हमारे देश में मेथी किसी न किसी रूप में इस्तेमाल की जाती है। इसका कारण- ये कई तरह के रोग घर बैठे ही ठीक कर देती है। मेथी में बहुत सारे विटामिन्स और मिनरल्स मौजूद होते हैं। यह दवाई से लेकर कॉस्मेटिक तक, हर तरह के घरेलू नुस्खे के रूप में काम आती है। सुबह उठकर सबसे पहले मेथी के दाने का पानी पीने से शरीर के दूषित तत्व बाहर निकल जाते हैं। साथ ही, डायबिटीज और कब्ज जैसी समस्याएं कंट्रोल में रहती हैं। मेथी का पानी कैसे बनाएं मेथी का पानी बनाने में केवल 10 मिनट का समय लगता है। आप एक से डेढ़ चम्मच मेथी के दानों को रात में ही पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इस पानी को अच्छी तरह छान लें। फिर इसे खाली पेट पी जाएं। बचे हुए मेथी दानों को फेकने की जगह बाद में खा भी सकते हैं। ध्यान रखें, मेथी गर्म होती है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।...
साइन्स ऑफ स्लीप:खाने-पीने की आदतों से होता है नींद की क्वालिटी का कनेक्शन

साइन्स ऑफ स्लीप:खाने-पीने की आदतों से होता है नींद की क्वालिटी का कनेक्शन

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
क्या आप दिन भर सुस्त महसूस करते हैं? क्या आपको आजकल कम नींद आती है? यदि इन सवालों का जवाब हां है, तो आपको अपनी डाइट रिव्यू करने की जरूरत है। नींद का ज्यादातर रिश्ता आपकी खाने-पीने की आदतों से होता है। द नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 33% एडल्ट्स नींद की कमी से जूझते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान इस आंकड़े में इजाफा हुआ है। नींद की खराब क्वालिटी हॉरमोन, इम्यून सिस्टम, दिमाग और एनर्जी लेवल पर गलत असर डालती है।...
ओमिक्रॉन VS वैक्सीन:नए वैरिएंट के खिलाफ कोवीशील्ड

ओमिक्रॉन VS वैक्सीन:नए वैरिएंट के खिलाफ कोवीशील्ड

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एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोवीशील्ड वैक्सीन का तीसरा डोज ओमिक्रॉन के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनाने में कारगर है। यह दावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ही एक हालिया रिसर्च में किया गया है। साथ ही, फाइजर के ट्रायल में भी पाया गया है कि उसका बूस्टर शॉट ओमिक्रॉन को बेअसर करता है। मॉडर्ना ने भी दावा किया है कि उसका बूस्टर डोज ओमिक्रॉन से लड़ने में सक्षम है। ये वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी के स्तर को 83% तक बढ़ाता है। नोवावैक्स कंपनी के अनुसार, भारत के सीरम इंस्टीट्यूट में बनी कोवोवैक्स भी इस वैरिएंट के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ाती है। इसके अलावा, रूस में डेव्लप हुई स्पुतनिक-V भी एक स्टडी के मुताबिक ओमिक्रॉन संक्रमण रोकने में सक्षम है। लेकिन हांग कांग के वैज्ञानिकों की मानें, तो चीनी कंपनी सिनोवैक की वैक्सीन कोरोनावैक ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं बनाती है।...
बच्चों पर कोरोना भारी:5 से 11 साल के बच्चों में एडल्ट्स के मुकाबले कोरोना होने की आशंका तीन गुना ज्यादा, वैक्सीन ही है बचाव

बच्चों पर कोरोना भारी:5 से 11 साल के बच्चों में एडल्ट्स के मुकाबले कोरोना होने की आशंका तीन गुना ज्यादा, वैक्सीन ही है बचाव

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लंदन 5 से 11 साल की उम्र के बच्चों में एडल्ट्स के मुकाबले कोरोना होने की आशंका तीन गुना ज्यादा होती है। यह दावा इंग्लैंड के इंपीरियल कॉलेज लंदन की एक रिसर्च में किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में कमी लाने के लिए बच्चों को वैक्सीन लगाना जरूरी है। रिसर्च में कहा गया है कि टीनएज बच्चों और एडल्ट्स को लग रहे बूस्टर डोज के चलते छोटे बच्चे गंभीर रूप से बीमार नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा स्टडी के दौरान ओमिक्रॉन के मामलों में हर दिन 66% इजाफा देखा गया। बता दें कि इंग्लैंड ने हाल ही में खराब इम्यूनिटी वाले बच्चों के लिए वैक्सीन को मंजूरी दे दी है।...
वैक्सीनेशन के बावजूद कोरोना हुआ तो कितने दिन हों आइसोलेट?

वैक्सीनेशन के बावजूद कोरोना हुआ तो कितने दिन हों आइसोलेट?

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कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से वैक्सीन और बूस्टर डोज लेने वाले लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि, इसमें गंभीर रूप से बीमार होने वाले लोगों की संख्या कम है। ऐसे में माइल्ड या बिना लक्षणों वाले वैक्सीनेटिड मरीजों को कितने दिन के लिए क्वारैंटाइन होना चाहिए, ये सवाल दुनिया भर के एक्सपर्ट्स को परेशान कर रहा है। ये कहती हैं आइसोलेशन गाइडलाइंसभारत सरकार के नियमों के अनुसार, यदि किसी मरीज में कोरोना के माइल्ड लक्षण हैं, तो उसे लक्षण दिखने वाले दिन से लेकर अगले 10 दिन तक आइसोलेट रहना चाहिए। साथ ही, कोई लक्षण नहीं होने पर मरीज के लिए टेस्टिंग के दिन से लेकर अगले 10 दिन तक आइसोलेट रहना जरूरी है। फिलहाल मरीजों को यही गाइडलाइंस फॉलो करनी चाहिए। अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के दिशानिर्देश भी कुछ ऐसा ही कहते हैं। इनके अनुसार, पॉजिटिव रिजल्ट मिलने के बाद बिना लक्षण वाले म...
चीन में मिला 7 करोड़ साल पुराने डायनासोर के भ्रूण का कंकाल

चीन में मिला 7 करोड़ साल पुराने डायनासोर के भ्रूण का कंकाल

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दक्षिण चीन में वैज्ञानिकों को डायनासोर के एक अंडे का फॉसिल (जीवाश्म) मिला है। खास बात यह है कि अंडे के अंदर डायनासोर के भ्रूण (embryo) का कंकाल अच्छी तरह से संरक्षित है। इस भ्रूण को 'बेबी यिंगलियांग' नाम दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंडा तकरीबन 7 करोड़ 20 लाख साल पुराना है। साथ ही, यह भ्रूण अब तक का सबसे पूर्ण ज्ञात डायनासोर भ्रूण है। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह भ्रूण ओविराप्टोरोसॉर प्रजाति का है।...
ओमिक्रॉन नेचुरल वैक्सीन की तरह है, इससे कोरोना के खिलाफ लोगों की इम्यूनिटी बढ़ना तय

ओमिक्रॉन नेचुरल वैक्सीन की तरह है, इससे कोरोना के खिलाफ लोगों की इम्यूनिटी बढ़ना तय

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देश में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच भारत के टॉप हेल्थ एक्स्पर्ट्स ने कहा है कि नया वैरिएंट कोरोना की नेचुरल वैक्सीन की तरह काम करता है। इसका कारण- मरीजों में माइल्ड या कोई लक्षण न होना है। ओमिक्रॉन से संक्रमित होने पर लोग गंभीर रूप से बीमार नहीं होते और वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडीज बन जाती हैं। इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. गोवर्धन दास के मुताबिक, ओमिक्रॉन डेल्टा का ही माइल्ड रूप है। भले ही इस वैरिएंट में म्यूटेशन्स ज्यादा हैं, लेकिन ये बहुत ही कम लोगों को अस्पताल पहुंचा रहा है।...
विशेषज्ञों ने चेताया- कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना बेहद मुश्किल

विशेषज्ञों ने चेताया- कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना बेहद मुश्किल

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कोरोना महामारी की शुरुआत से ही 'हर्ड इम्यूनिटी' शब्द चर्चा में रहा है। इसे तब हासिल किया जा सकता है, जब आबादी का बड़ा हिस्सा वायरस से संक्रमित होकर एंटीबॉडी विकसित कर ले। लेकिन, विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड-19 बीमारी के केस में हर्ड इम्यूनिटी को हासिल करना सरल नहीं है। इसके लगातार म्यूटेट होने, जल्दी फैलने और हर वर्ग के लोगों को संक्रमित करने की क्षमता के कारण ये वायरस कॉम्प्लेक्स हो चुका है। कनाडा की एक्सपर्ट कैरोलिन कोलीजिन के मुताबिक, यदि वायरस से बचना है तो उसके साथ अभी से जीना सीख लें।...
10 गुना तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियर, बढ़ा समुद्र का जलस्तर

10 गुना तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियर, बढ़ा समुद्र का जलस्तर

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'तीसरा ध्रुव' नाम से जाना जाने वाला हिमालय अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद ग्‍लेशियर बर्फ का तीसरा सबसे बड़ा सोर्स है। पर ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इसके ग्लेशियर असाधारण गति से पिघल रहे हैं। साइन्स जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुई एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, इससे एशिया में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी के किनारे रहने वाले करोड़ों भारतियों पर पानी का संकट आ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 400 से 700 साल पहले के मुकाबले पिछले कुछ दशकों में हिमालय के ग्लेशियर 10 गुना तेजी से पिघले हैं। यह गतिविधि साल 2000 के बाद ज्यादा बढ़ी है।...
इंग्लैंड में हुई 32 करोड़ साल पुराने दुर्लभ जीव के अवशेषों की खोज

इंग्लैंड में हुई 32 करोड़ साल पुराने दुर्लभ जीव के अवशेषों की खोज

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
ऑस्ट्रेलिया में पिछले हफ्ते 1306 पैर वाला अनोखा मिलीपीड मिलने के बाद, वैज्ञानिकों ने इंग्लैंड के नॉर्थम्बरलैंड बीच पर एक ऐसे ही दुर्लभ जीव के अवशेषों की खोज की है। इस मिलीपीड का नाम है आर्थ्रोप्लेरा। यह 32.6 करोड़ साल पहले धरती पर पाया जाता था। इसके फॉसिल (जीवाश्म) से अंदाजा लगाया गया है कि यह 8 फीट से भी ज्यादा लंबा और 1.8 फीट चौड़ा था। साथ ही, इसका वजन 50 किलोग्राम था। विशेषज्ञों का मानना है कि 8 फीट की लंबाई के साथ ही आर्थ्रोप्लेरा विश्व का सबसे बड़ा मिलीपीड बन गया है। इस जीव के पैर बिच्छू और केकड़ों के पैरों जैसे ही थे। इसके पहले वैज्ञानिकों का दावा था कि आर्थ्रोप्लेरा 6 फीट तक लंबा हो सकता है।...