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कैंसर के मरीजों को अलर्ट करने वाली खबर:मूंगफली ज्यादा खाने से पूरे शरीर में कैंसर फैलने का खतरा बढ़ता है, एक दिन में 28 ग्राम से ज्यादा मूंगफली खाना ठीक नहीं

कैंसर के मरीजों को अलर्ट करने वाली खबर:मूंगफली ज्यादा खाने से पूरे शरीर में कैंसर फैलने का खतरा बढ़ता है, एक दिन में 28 ग्राम से ज्यादा मूंगफली खाना ठीक नहीं

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कैंसर के मरीजों में मूंगफली ज्यादा खाने की आदत से इसके फैलने का खतरा बढ़ता है। यह दावा इंग्लैंड की लिवरपूल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, मूंगफली में पीनट एग्लुटिनीन (PNA) नाम का प्रोटीन पाया जाता है। यह प्रोटीन शरीर में दो ऐसे मॉलिक्यूल (IL-6 और MCP-1) को रिलीज करने में मदद करता है जो कैंसर को पूरी बॉडी में फैला सकते हैं। ऐसे बढ़ता है कैंसर फैलने का खतराकार्सिनोजेनेसिस जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, मूंगफली खाने के बाद पीनट एग्लुटिनीन नाम का प्रोटीन ब्लड में मिलकर पूरे शरीर में सर्कुलेट हो जाता है। यह प्रोटीन ब्लड के जरिए ट्यूमर्स तक पहुंचकर इन्हें शरीर के दूसरे हिस्से में फैलने के लिए दबाव डालता है। इस प्रोटीन के कारण कैंसर कोशिकाएं आपस में चिपकने लगती हैं और शरीर के दूसरे हिस्से में फैलने की कोशिश करती है। मौत का खतरा कितना, यह पता...
प्रेग्नेंसी के दौरान कोविड-19 होने पर बच्चे की समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा, बीपी या मोटापा बढ़ने पर रिस्क 160 गुना तक बढ़ जाता है

प्रेग्नेंसी के दौरान कोविड-19 होने पर बच्चे की समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा, बीपी या मोटापा बढ़ने पर रिस्क 160 गुना तक बढ़ जाता है

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प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना का संक्रमण होने पर बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का खतरा बढ़ता है। यह दावा सैन फ्रैन्सिस्को की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। ऐसी महिलाओं में 32 हफ्ते से पहले बच्चे की प्री-मैच्योर डिलीवरी हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कोविड से संक्रमित होने का खतरा 60 फीसदी तक ज्यादा रहता है। ऐसे हुई रिसर्चशोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया में जुलाई 2020 से जनवरी 2021 के बीच जन्मे बच्चों का बर्थ सर्टिफिकेट देखा। इस दौरान 2,40,157 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 9 हजार बच्चों की मांओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना हुआ था। रिसर्च में सामने आया कि सामान्य गर्भवती महिलाओं में 8.7 फीसदी और कोविड से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं में 11.8 फीसदी बच्चों की प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई। बीपी और मोटापा बढ़ा तो रिस्क और ज्यादाशोधकर्ताओं का कहना है, प्रेग्नेंट महिलाओं...
जहर से मिलेगी जिंदगी:मकड़ी के जहर से होगा हार्ट अटैक का इलाज, इसमें मौजूद खास प्रोटीन डैमेज हुई कोशिकाओं को रिपेयर करता है

जहर से मिलेगी जिंदगी:मकड़ी के जहर से होगा हार्ट अटैक का इलाज, इसमें मौजूद खास प्रोटीन डैमेज हुई कोशिकाओं को रिपेयर करता है

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दुनिया की सबसे खतरनाक मकड़ी के जहर से हार्ट अटैक का इलाज हो सकेगा। वैज्ञानिकों का कहना है, फनेल बेब मकड़ी के जहर में ऐसे मॉलिक्यूल पाए गए हैं जो हार्ट अटैक के बाद दिल में होने वाले डैमेज रोक सकते हैं। इतना ही नहीं, इसकी मदद से ट्रांसप्लांट करवाने वाले मरीजों के हार्ट की लाइफ भी बढ़ाई जा सकेगी। मकड़ी के जहर से इलाज की खोज क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के डॉ. नाथन पल्पंत व प्रो. ग्लेन किंग और विक्टर चेंग कार्डियक रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो. पीटर मैक्डॉनल्ड ने मिलकर की है। ऐसे काम करती है दवाडॉ. नाथन का कहना है, मकड़ी के जहर में Hi1a नाम का एक प्रोटीन पाया जाता है। यह हार्ट से निकलने वाले डेथ सिग्नल को रोकने का काम करता है। ऐसा होने पर कोशिकाओं की मौत होने से रोका जा सकता है। इसके असर के कारण हृदय की कोशिकाओं में सुधार होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अब तक ऐसी दवा नहीं बनाई जा सकी है जो हार...
फोटो स्टोरी:नॉर्थ कैरोलिना में मिली इंसानों जैसे दांत वाली मछली, 3 फीट तक लम्बे हो जाते हैं दांत; ये समुद्र में सख्त खोल वाले जीवों को खाने में मदद करते हैं

फोटो स्टोरी:नॉर्थ कैरोलिना में मिली इंसानों जैसे दांत वाली मछली, 3 फीट तक लम्बे हो जाते हैं दांत; ये समुद्र में सख्त खोल वाले जीवों को खाने में मदद करते हैं

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अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में एक ऐसी मछली मिली है, जिसके मुंह में इंसानों जैसे दांत हैं। इसके मुंह के कई हिस्सों में दांत ही दांत हैं। इसका वजन 4 किलो है। आम भाषा में इसे शीप्सहेड फिश कहते हैं, जो खासतौर पर अटलांटिक महासागर में पाई जाती है। दांत शिकार करने में मदद करते हैंमैरीलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ नेचुरल रिसोर्सस का कहना है, शीप्सहेड फिश दांतों के मामले में काफी अलग है। इसके मुंह में 3 फीट लम्बे दांत निकल सकते हैं और यह कई कतारों में निकलते हैं। यह दांत उसके शिकार के ऊपरी सख्त खोल को तोड़ने में मदद करते हैं। इसे क्रीपी लुकिंग फिश भी कहते हैंमछली की पूरी ग्रे बॉडी पर डार्क स्ट्रिप नजर आती है। इसलिए इसे कंविक्ट फिश भी कहते हैं। न्यूयॉर्क में इसे क्रीपी लुकिंग फिश के नाम से जाना जाता है। शीप्सहेड फिश को साउथ मिल्स के रहने वाले नाथन मार्टिन ने पकड़ा है। मार्टिन कहते हैं, मछली को पकड...
दर्द के 9 स्पॉट:शरीर में 9 जगह रहता है लम्बे समय तक दर्द, वैज्ञानिकों ने मैप बनाकर समझाया, कहा; पीठ के निचले हिस्से से घुटनों तक जाने वाला दर्द ज्यादा परेशान करता है

दर्द के 9 स्पॉट:शरीर में 9 जगह रहता है लम्बे समय तक दर्द, वैज्ञानिकों ने मैप बनाकर समझाया, कहा; पीठ के निचले हिस्से से घुटनों तक जाने वाला दर्द ज्यादा परेशान करता है

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दर्द की भी कई तरह का होता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसकी कैटेगरी तैयार की है। उनका कहना है क्रॉनिक पेन यानी लम्बे तक होने वाला दर्द 9 तरह का होता है। इन्हें समझाने के लिए बॉडी पेन का एक मैप तैयार किया है। इस पर रिसर्च करने वाली पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, मरीज इन्हीं 9 में से एक दर्द से जूझते हैं। यह स्टडी 21,500 लोगों पर की गई है। कौन सा दर्द खतरनाक है, ये पता लगा सकते हैंशोधकर्ताओं के मुताबिक, कम्प्यूटर क्लस्ट्रिंग एनालिसिस के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले दर्द का विश्लेषण किया गया। इसे 9 हिस्सों में बांटा गया। इन हिस्सों में होने वाले दर्द की मदद से यह बताया जा सकता है कि दर्द कितनी तेज है, दर्द का शरीर पर क्या असर होगा और इसका शरीर की एक्टिविटी, मूड और नींद पर क्या असर पड़ सकता है। जैसे- पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर से घुटने तक पहुंचने वा...
कई तरह की खूबियों वाली पट्टी:IIT गुवाहाटी ने ट्रांसपेरेंट पट्टी बनाई, यह नमी बढ़ाकर शरीर को घाव जल्द भरने में मदद करेगी; बाहर से देख सकेंगे घाव भरा या नहीं

कई तरह की खूबियों वाली पट्टी:IIT गुवाहाटी ने ट्रांसपेरेंट पट्टी बनाई, यह नमी बढ़ाकर शरीर को घाव जल्द भरने में मदद करेगी; बाहर से देख सकेंगे घाव भरा या नहीं

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IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने घाव पर बांधने के लिए ऐसी पट्टी विकसित की है, जिसमें कई तरह की खूबियां हैं। यह ट्रांसपेरेंट है और घाव को तेजी से भरने में शरीर की मदद करती है। इसे सिंथेटिक पॉलिमर से तैयार किया गया है और बायोडिग्रेडेबल है। यानी इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंच सकता। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह पट्टी बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगी। कैसे घावों को भरती है यह पट्टीशोधकर्ताओं के मुताबिक, यह पट्टी नमी को बढ़ाती है। यह नमी शरीर में मौजूद एंजाइम की मदद से घावों को भरती है। नतीजा, इस पट्टी को लगाने के साथ शरीर अपने आप ही घावों को भरना शुरू कर देता है। यह दूसरी पट्टियों के मुकाबले 50 फीसदी तक कम दामों पर उपलब्ध हो सकती है। इसलिए ट्रांसपेरेंट पट्टी को तैयार किया गयाघावों को भरने वाली पट्टी बनाने के लिए आमतौर पर कॉटन वूल का प्रयोग किया जाता है। इनसे अक्सर घाव के रिसाव को रोकने और ...
कोख में ही विकसित हुआ ट्यूमर:नवजात के दिल पर मिला दुर्लभ ट्यूमर, फेफड़ों पर इसका दबाव बढ़ा और जन्म के समय बच्चे का सांस लेना मुश्किल हुआ; सर्जरी करके हटाया गया

कोख में ही विकसित हुआ ट्यूमर:नवजात के दिल पर मिला दुर्लभ ट्यूमर, फेफड़ों पर इसका दबाव बढ़ा और जन्म के समय बच्चे का सांस लेना मुश्किल हुआ; सर्जरी करके हटाया गया

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नवजात में ट्यूमर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो दिन के नवजात के दिल पर दुर्लभ ट्यूमर पाया गया। सर्जरी करके ट्यूमर को हटाया गया। बच्चे की सर्जरी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में की गई। डॉक्टर्स का कहना है, बच्चा जन्म के समय ही ट्यूमर के साथ पैदा हुआ था। इस दुर्लभ ट्यूमर को 'इंट्रापेरिकार्डियल टेराटोमा' कहते हैं। इसकी पुष्टि तब ही हो गई थी जब बच्चा मां की कोख में था। ट्यूमर के कारण बीपी कम हो रहा थाहॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ. राजेश शर्मा कहते हैं, नवजात की हालत नाजुक होने के कारण तत्काल सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। बच्चे के ट्यूमर का आकार उसके हार्ट से भी बड़ा था। इसके कारण उसका ब्लड प्रेशर कम हो रहा था। नवजात को हार्ट-लंग मशीन पर रखने के बाद उसकी सर्जरी की गई।इस तरह ट्यूमर को अलग किया गया। ईसीजी से बच्चे के हार्ट पर नजर रखी गईडॉक्टर्स के मुत...
प्यार के लिए पैसा ही सबकुछ नहीं:कमाई और पैसों पर फोकस रखने वाले लोगों की जिंदगी में रहती है प्यार की कमी, ये रिश्तों को मजबूती देने में नाकाम साबित होते हैं

प्यार के लिए पैसा ही सबकुछ नहीं:कमाई और पैसों पर फोकस रखने वाले लोगों की जिंदगी में रहती है प्यार की कमी, ये रिश्तों को मजबूती देने में नाकाम साबित होते हैं

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प्यारभरे रिश्तों के टूटने की एक वजह पैसा हो सकता है, लेकिन इस विषय पर हुई नई स्टडी इसके दूसरे पहलू से रूबरू कराती है। नई रिसर्च कहती है, अपनी कमाई और पैसों पर फोकस रखने वाले लोग रिश्ते को मजबूती देने में नाकाम साबित होते हैं। ऐसे लोगों की उनके पार्टनर से नहीं बनतीं। नतीजा, उनकी राहें अलग हो जाती हैं। यह रिसर्च मिशिगन और टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है। ऐसे हुई रिसर्च शोधकर्ताओं ने रिसर्च में 434 ऐसे लोगों को शामिल किया जो शादीशुदा हैं, रिलेशनशिप में हैं या फिर लम्बे समय से पार्टनर के साथ रह रहे हैं। इनसे बातचीत करके यह समझने की कोशिश की गई कि कितनी बार इनके पार्टनर के साथ नहीं बनीं। यानी चीजों पर रजामंदी नहीं बनीं।इसके अलावा रिसर्च में शामिल लोगों को या तो ऐसा आर्टिकल पढ़ने को दिया गया जिसमें फाइनेंशियल सक्सेस का जिक्र था। या फिर ऐसा आर्टिकल दिया गया जिसमें बताया गया...
एक साल की ‘मंगल’ यात्रा:कैसा है मंगल जैसा ग्रह जहां 4 लोगों को भेजने के लिए नासा ने मांगे आवेदन, जानिए कैसे करें आवेदन

एक साल की ‘मंगल’ यात्रा:कैसा है मंगल जैसा ग्रह जहां 4 लोगों को भेजने के लिए नासा ने मांगे आवेदन, जानिए कैसे करें आवेदन

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मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में एक साल तक रहने की इच्छा रखने वाले लोगों से अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आवेदन मांगे हैं। 4 लोगों को मंगल जैसे ग्रह पर रहने का मौका मिलेगा। नासा का कहना है कि वो मंगल ग्रह पर सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्टडी करना चाहता है। सभी यात्रियों को जिस मंगल की तरह दिखने वाली परिस्थिति में रखा जाएगा, उसे ह्यूस्टन में बने जॉनसन स्पेस सेंटर में तैयार किया गया है। जानिए, यह जगह कैसी है और यहां लोगों को क्या-क्या चुनौतियां मिलेंगीं... 1700 वर्ग फीट में बने मार्स ड्यून अल्फा में रहेंगे लोगचुने जाने वाले चारों लोग ह्यूस्टन में बने जॉनसन स्पेस सेंटर में रहेंगे। यहां 3डी प्रिंटर से मार्स ड्यून अल्फा बनाया गया है जो 1,700 वर्ग फीट में फैला है। नासा के मुताबिक, पृथ्वी पर बने इस सेंटर में रहने से लोगों को उन शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को समझने और उनका म...
राहत देने वाली रिसर्च:वैज्ञानिकों ने विकसित किया ‘कृत्रिम पेन्क्रियाज’, यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करेगा और बार-बार इंसुलिन इंजेक्शन लेने से मिलेगी मुक्ति

राहत देने वाली रिसर्च:वैज्ञानिकों ने विकसित किया ‘कृत्रिम पेन्क्रियाज’, यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करेगा और बार-बार इंसुलिन इंजेक्शन लेने से मिलेगी मुक्ति

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डायबिटीज के मरीजों को राहत देने के लिए वैज्ञानिक कृत्रिम पेन्क्रियाज की टेस्टिंग कर रहे हैं। इससे खासतौर पर उन मरीजों को राहत मिलेगी जो टाइप-2 डायबिटीज के मरीज हैं और किडनी डायलिसिस की जरूरत है। कृत्रिम पेन्क्रियाज की मदद से मरीज अपने शरीर में हाई और लो ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकेंगे। मरीज को अलग से इंसुलिन के इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह टेस्ट कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और स्विटजरलैंड की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ बर्न के वैज्ञानिक कर रहे हैं। 26 मरीजों पर 13 महीने तक हुई रिसर्च शोधकर्ता डॉ. शेरलोट बॉगटन का कहना है, शरीर में हाई और लो ब्लड शुगर की स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज और किडनी के मरीजों को रहता है। इससे निपटने के लिए कृत्रिम पेन्क्रियाज को तैयार किया गया है।इसके ट्रायल के लिए अक्टूबर 2019 और नवम्बर 2020 के बीच डायबिटीज के 26 ऐसे मरीजों को चुना गया जो डायलिसिस पर...