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वैक्सीन क्यों जरूरी, एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझें:वैक्सीन न लेने वाले कोरोना पेशेंट के फेफड़े में दिखे सफेद धब्बे, यही ऑक्सीजन की कमी का कारण; टीका लगवाने वालों में ऐसा नहीं हुआ

वैक्सीन क्यों जरूरी, एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझें:वैक्सीन न लेने वाले कोरोना पेशेंट के फेफड़े में दिखे सफेद धब्बे, यही ऑक्सीजन की कमी का कारण; टीका लगवाने वालों में ऐसा नहीं हुआ

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कोरोना वैक्सीन लगवानी कितनी जरूरी है, इसे अमेरिका के एक डॉक्टर ने एक्सरे की 2 तस्वीरों से समझाया है। वैक्सीन न लेने वाले कोरोना संक्रमित और वैक्सीन लेने वाले मरीज के संक्रमित हुए फेफड़े इसके असर को बताते हैं। कोरोना होने पर वैक्सीन के असर को एक्सरे की दो फोटो से समझते हैं.. कोरोना संक्रमित होने पर वैक्सीन न लगवाने वालों के फेफड़े की एक्सरे रिपोर्ट में सफेद धब्बे दिखते हैं। यह दिखाता है कि फेफड़ों में वायरस लोड काफी है और इनमें से ऑक्सीजन गुजरने की जगह नहीं है। यही स्थिति सांस लेने में परेशानी की वजह बनती है। जिन मरीजों ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी, एक्सरे में उनके फेफड़े पर सफेद स्पॉट दिखे, यह वायरल लोड और सूजन को दिखाता है। दूसरी तरफ, वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में संक्रमण का असर कम दिख रहा है। एक्सरे में ज्यादा काला हिस्सा नजर आने का मतलब यह है कि इनके फेफड़ों में ऑक्सीजन जाने...
हेल्दी हार्ट के लिए वैज्ञानिकों की बुजुर्गों को सलाह:रोजाना 250 कैलोरी घटाकर और एक्सरसाइज करके बढ़ती उम्र में हृदय रोगों का खतरा घटा सकते हैं, धमनी की अकड़न भी घटती है

हेल्दी हार्ट के लिए वैज्ञानिकों की बुजुर्गों को सलाह:रोजाना 250 कैलोरी घटाकर और एक्सरसाइज करके बढ़ती उम्र में हृदय रोगों का खतरा घटा सकते हैं, धमनी की अकड़न भी घटती है

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हार्ट को हेल्दी रखने के लिए वैज्ञानिकों ने बुजुर्गोँ को सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है, हृदय रोगों से बचने के लिए शाम में नाश्ते में कटौती करें, रोजाना 250 कैलोरी कम लें और हल्की-फुल्की एक्ससाइज करें। ये आदतें बढ़ती उम्र में दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। यह रिसर्च नॉर्थ कैरोलिना के वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने की है। 160 ओवरवेट बुजुर्गों पर हुई रिसर्चवैज्ञानिकों ने 60 से 70 साल की उम्र वाले 160 ओवरवेट बुजुर्गों पर 20 हफ्तों तक रिसर्च की। इन्हें तीन ग्रुप में बांटा गया। इनमें से एक तिहाई बुजुर्गों को रेग्युलर डाइट के साथ हफ्ते में 4 दिन 30 मिनट तक ट्रेडमिल करने को कहा गया। वहीं, दूसरे ग्रुप को यही रूटीन फॉलो करने के साथ कैलोरी में कटौती करने को कहा गया। इसमें से आधे लोगों को रोजाना 250 और आधे को 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी गई। दिल की सेहत सुधरी, धमनी क...
साइंस ऑफ लर्निंग:ब्रेन को एक्टिव बनाने के लिए नई भाषा सीखें और दोनों हाथों का इस्तेमाल करें; ऐसी एक्टिविटीज मस्तिष्क को तेज बनाती हैं

साइंस ऑफ लर्निंग:ब्रेन को एक्टिव बनाने के लिए नई भाषा सीखें और दोनों हाथों का इस्तेमाल करें; ऐसी एक्टिविटीज मस्तिष्क को तेज बनाती हैं

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दिमाग की क्षमताएं बढ़ाने के लिए उसे चुनौती देनी पड़ती है। मानसिक गतिविधियों से मस्तिष्क की सामंजस्य बैठाने की क्षमता बढ़ती है। इससे हियरिंग लॉस और डिप्रेशन से भी बचाव होता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कैथरीन पैप के मुताबिक, न्यूरोजेनेसिस प्रक्रिया से मस्तिष्क में नई कोशिका बनती हैं। जब आप अपनी मानसिक क्षमताओं को चैलेंज करते हैं तो मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच नया कनेक्शन बनाता है। ऐसा होने पर दिमाग अधिक एक्टिव रहता है और तेज काम करता है। दोनों हाथों का इस्तेमाल करेंन्यूरोबायोलॉजिस्ट लॉरेंस कैट्ज के मुताबिक, दोनों हाथों का बराबर इस्तेमाल करने से क्रिएटिव और लॉजिकल थिंकिंग बेहतर होती है। इसके लिए उल्टे हाथ से ब्रश करना, बालों में कंघी या फिर लिखने में दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकते हैं। नई भाषा सीखें, ब्रेन की एक्टिविटी बढ़ती हैकिसी भी दूसरी भाषा में पारंगत होने में व...
कोरोना में ब्रेस्टफीडिंग और वैक्सीनेशन:संक्रमित मां करा सकती है ब्रेस्टफीडिंग; वैक्सीन लगवाना भी जरूरी, इससे मां-बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ेगी

कोरोना में ब्रेस्टफीडिंग और वैक्सीनेशन:संक्रमित मां करा सकती है ब्रेस्टफीडिंग; वैक्सीन लगवाना भी जरूरी, इससे मां-बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ेगी

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नई दिल्ली कोरोना से संक्रमित होने वाली महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए या नहीं और वैक्सीनेशन के बाद बच्चे को दूध पिलाएं या नहीं? ये सवाल कई महिलाओं के जेहन में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है कि ऐसी महिलाएं बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर। जैसे- आपने आसपास की चीजों को डिसइन्फेक्ट करें, बच्चे को गोद में लेने से पहले हाथों को साबुन-पानी या सैनेटाइजर से साफ करें और मास्क लगाएं। अगर संक्रमण ज्यादा है, तो बच्चे के लिए एक्सप्रेस मिल्क का इस्तेमाल कर सकती हैं। अब बात करते हैं मां के वैक्सीनेशन की। मुम्बई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में लेक्टेशन कंसल्टेंट डॉ. मानसी शाह कहती हैं, गर्भवती और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं वैक्सीन लगवा सकती है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में ये ब...
सब्जियों के ‘राजा’ से सेहत को खतरा:आलू अधिक खाने से डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा; इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक, यही बीमारियों की जड़ है

सब्जियों के ‘राजा’ से सेहत को खतरा:आलू अधिक खाने से डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा; इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक, यही बीमारियों की जड़ है

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सब्जियों का राजा कहे जाने वाले आलू से ब्लड शुगर, हृदय रोग और मोटापा बढ़ने का खतरा है। यह दावा हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, आलू में कार्बोहाइड्रेट अधिक होने के कारण सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। आलू की तरह जमीन के अंदर पैदा होने वाली सब्जियों में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं लेकिन इन सभी में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है। आलू क्यों नुकसान पहुंचाता है, इसे ऐसे समझेंवैज्ञानिकों का कहना है, आलू में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है। यह आसानी से पच जाता है, इस कारण शरीर का ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर उतनी ही तेजी से घट जाता है। जो खतरनाक है। आलू के नुकसान पहुंचाने की एक वजह और भी है। जमीन में उगने वाली चीजों में कार्बोहाइड्रेट अधिक होने के कारण उनका ग्लाइसीमिक इंडेक्स भी ज्यादा होता है। ग्लाइसीमिक इंडेक्स ज्यादा होने का म...
मानसून में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा:बाढ़ और जलभराव वाले इलाके में फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस का बैक्टीरिया, इसके लक्षण भी फ्लू जैसे इसलिए गंदे पानी में न जाएं

मानसून में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा:बाढ़ और जलभराव वाले इलाके में फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस का बैक्टीरिया, इसके लक्षण भी फ्लू जैसे इसलिए गंदे पानी में न जाएं

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देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। बारिश के मौसम में जलभराव के कारण कई बीमारियां पनपती हैं, इनमें से ही एक है लेप्टोस्पायरोसिस। यह बीमारी लेप्टोस्पायरा नाम के बैक्टीरिया के कारण फैलती है और अधिकतर संक्रमित जानवरों के जरिए इंसान तक पहुंचती है। एक से दूसरे इंसान में संक्रमण फैलने के मामले कम ही सामने आते हैं। संक्रमित जानवर जैसे चूहे के मल, मूत्र या दूषित पानी, खाने और मिट्टी के सम्पर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो सकता है। इससे सबसे जयादा मामले मानसून में सामने आते हैं। इसकी वजह है जलभराव और नमी। स्किन और आंखों के जरिए संक्रमित करता है बैक्टीरियामुम्बई के मसीना हॉस्पिटल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. सुलेमान लधानी कहते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस का बैक्टीरिया स्किन, मुंह, आंखें और नाक के जरिए शरीर में पहुंचता है। इसके मामले ऐसी जगहों पर पाए जाते हैं जहां साफ-स...
मलेरिया रोकने के लिए नया प्रयोग:मलेरिया फैलाने वाली मादा मच्छर को बांझ बनाकर दुनियाभर में इस बीमारी को रोकेंगे वैज्ञानिक, रिसर्च के दौरान 560 दिन में घटी मच्छरों की संख्या

मलेरिया रोकने के लिए नया प्रयोग:मलेरिया फैलाने वाली मादा मच्छर को बांझ बनाकर दुनियाभर में इस बीमारी को रोकेंगे वैज्ञानिक, रिसर्च के दौरान 560 दिन में घटी मच्छरों की संख्या

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दुनियाभर में हर साल मलेरिया के कारण करीब 5 लाख लोग दम तोड़ रहे हैं। इन मौतों को कम करने और मलेरिया के मामले घटाने के लिए वैज्ञानिकों ने नया प्रयोग किया है। वैज्ञानिक मलेरिया फैलाने वाली मादा मच्छर को CRISPR जीन एडिटिंग तकनीक से बांझ (इनफर्टाइल) बना रहे हैं, ताकि मच्छरों की जनसंख्या को कंट्रोल किया जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है, यह एक 'गेम चेंजर' तकनीक साबित हो सकती है और इससे जानलेवा बीमारी का अंत किया जा सकता है। इस पर लंदन का इम्पीरियल कॉलेज और लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन मिलकर रिसर्च कर रहा है। वैज्ञानिक पहली बार मादा मच्छरों के जीन में इस तरह के बदलाव कर रहे हैं कि वो प्रजनन लायक न रह सकें। इसके लिए वैज्ञानिकों में मच्छरों की एनाफिलीज गैम्बी प्रजाति को चुना है। यही प्रजाति सब-सहारा अफ्रीका में मलेरिया का संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार है। कैसे मादा मच्छरों को बनाते हैं...
इजराइल में चौंकाने वाला मामला:नवजात बच्ची के पेट में मिले एक से ज्यादा भ्रूण, 10 हफ्ते पुराने सभी भ्रूण में हड्डियां और हार्ट विकसित हो चुके थे; सर्जरी करके हटाया

इजराइल में चौंकाने वाला मामला:नवजात बच्ची के पेट में मिले एक से ज्यादा भ्रूण, 10 हफ्ते पुराने सभी भ्रूण में हड्डियां और हार्ट विकसित हो चुके थे; सर्जरी करके हटाया

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इजराइल के अशदोद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बच्ची के जन्म लेने के बाद उसके पेट में एक से अधिक भ्रूण मिले हैं। मां के गर्भ में वो इन भ्रूण को पाल रही थी। नवजात बच्ची की सर्जरी करके उसमें से भ्रूण हटा दिए गए हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि 5 लाख नवजात में कोई एक ऐसा मामला सामने आता है। पेट में भ्रूण होने की बात, ऐसे पता चलीबच्ची का जन्म जुलाई के शुरुआती हफ्ते में अशदोद के अस्सुता मेडिकल सेंटर में हुआ था। डॉक्टरों ने बताया कि, प्रेग्नेंसी के अंतिम हफ्तों में मां का अल्ट्रासाउंड करने के दौरान नवजात बच्ची का पेट दूसरे बच्चों के मुकाबले बड़ा दिखा था। नवजात के जन्म के बाद डॉक्टर्स ने उसका अल्ट्रासाउंट और एक्स-रे किया। जांच रिपोर्ट में उसके पेट में एक से अधिक भ्रूण होने की पुष्टि हुई। सर्जरी करके नवजात से भ्रूण हटाए गएअस्सुता मेडिकल सेंटर में नियोनेटोलॉजी के डायरेक्टर ओमर ग्ल...
इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्च:बाजरे से घटा सकते हैं 15% तक ब्लड शुगर, यह स्वस्थ लोगों में भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम करता है

इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्च:बाजरे से घटा सकते हैं 15% तक ब्लड शुगर, यह स्वस्थ लोगों में भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम करता है

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बाजरा टाइप-2 डायबिटीज का खतरा घटाता है और शरीर में ब्लड शुगर का स्तर पर भी कंट्रोल करने में मदद करता है। ऐसे लोग जो स्वस्थ हैं और बाजरे को खानपान में शामिल करते हैं उनमें इस बीमारी की आशंका कम हो जाती है। यह दावा इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एसिड ट्रॉपिक (ICRISAT) ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। 'फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन' जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, बाजारा ब्लड शुगर के लेवल में 12 से 15 फीसदी तक कमी लाता है। ऐसा क्यों है इसकी भी वजह जानिएवैज्ञानिकों का कहना है, बाजरे का औसत ग्लाइसीमिक इंडेक्स 52.7 होता है। यह चावल और रिफाइंड गेहूं के मुकाबले 30 फीसदी तक कम होता है। वहीं, मुक्के के मुकाबले भी बाजरे का ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होता है। किसी चीज का ग्लाइसीमिक इंडेक्स जानकर पता लगाया जा सकता है वो चीज ब्लड शुगर लेवल कितना बढ़ाएगी और कितने समय में बढ़ाएगी। इसीलि...
पश्चिम अफ्रीका का मामला:26 वर्षीय महिला ने 9 बच्चों को जन्म देकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, कइयों के बचने की उम्मीद नहीं थी; शुक्र है डिलीवरी के 3 माह बाद भी ये जिंदा हैं

पश्चिम अफ्रीका का मामला:26 वर्षीय महिला ने 9 बच्चों को जन्म देकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, कइयों के बचने की उम्मीद नहीं थी; शुक्र है डिलीवरी के 3 माह बाद भी ये जिंदा हैं

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26 साल एक महिला ने मोरक्को में 9 बच्चों को जन्म देकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। पश्चिमी अफ्रीकी देश माली की रहने वाली हेलीमा सिसे की डिलीवरी 5 मई को हुई थी। डॉक्टर्स ने 50 फीसदी बच्चों के ही जिंदा रह पाने की आशंका जाहिर की थी, लेकिन सभी बच्चे स्वस्थ हैं। एक साथ जन्म लेने वाले 9 बच्चों को नोनुप्लेट्स कहते हैं। इनमें 5 लड़कियां और 4 लड़के हैं। हलीमा और उनके 35 वर्षीय पति कादेर आर्बे 9 बच्चों को पाकर काफी खुश हैं। हेलीमा कहती हैं, बच्चों की संख्या पता चलने के बाद बेहतर मेडिकल सुविधाओं के लिए मोरोक्को गई और 5 मई को डिलीवरी हुई। प्री-मैच्योर डिलीवरी होने के कारण बच्चों का वजन सामान्य से काफी कम था। 35 लोगों के स्टाफ ने मिलकर डिलीवरी कराईबीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 25वें हफ्ते में महिला को मोरोक्को के हॉस्पिटल लाया गया। यहां महिला की प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई। इसमें 10 डॉक्टर और 25 ल...