नहीं मिल रहे मेहनत के दाम:पूरे परिवार के जुटने के बाद भी दीपक बनाने वालों को नहीं मिलती कीमत
श्रीगंगानगरदिवाली करीब आठ दिन बाद है। ऐसे में शहर में दीपक बनाने वाले पूरी मेहनत से काम में जुटे हैं। घर के मुखिया दीपक बनाने में जुटे हैं वहीं परिवार के अन्य लोग इन पर रंग करने, डिजाइन बनाने, इन्हें भट्ठी में लगाने जैसे काम में जुटे हैं। आलम यह है कि परिवार के युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शहर की दिवाली रोशन करने में लग गए हैं लेकिन इन लोगों की पीड़ा है कि उन्हें मेहनत के लिहाज से दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
जलावन हुआ महंगा
इन लोगों का कहना है कि अब जलावन महंगा हो गया है। भट्ठी में लगाने के लिए लकड़ी का बुरादा, लकड़ियां और अन्य चीजें मिलाकर एक बार भट्टी जलाने का खर्च ही करीब दो हजार रुपए आता है। एक बार में करीब छह से सात हजार दीपक इसमें पकते हैं। इनमें से भी कुछ बनाने के दौरान ही टूट जाते हैं। भट्टी में रखने और निकालने के दौरान इनमें से कई बेकार हो जाते हैं।बिकते हैं 70 रुपए के सौ दीप...








