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लॉकडाउन में कैंसर के मरीजों का इलाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हर 7 में एक कैंसर मरीज की सर्जरी टल गई। निम्न आय वर्ग के देशों में स्थिति और भी बुरी रही है। यह दावा लैंसेट ऑन्कोलॉजी जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च में किया गया है।
मधुमक्खियां खास किस्म का वेगल डांस करके एक-दूसरे से बातें करती हैं। यह बात ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने इनके बारे में नया खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, गांव में दिखने वाली मधुमक्खियां शहरी मधुमक्खियों के मुकाबले ज्यादा मेहनती होती हैं। वो भोजन की तलाश में 50 फीसदी तक ज्यादा सफर तय करती हैं।...
हॉस्पिटल्स में ऐसे सुपरबग्स पाए जाते हैं जिन पर एंटीबायोटिक्स दवाएं बेअसर साबित होती हैं। इन सुपरबग्स बैक्टीरिया से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने नया तरीका निकाला है। वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया तैयार किए हैं जो इनसे लड़ने का काम करेंगे। इन्हें इंजीनियर्ड बैक्टीरिया का नाम दिया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है, स्टेफायलोकोकस ऑरेयस नाम का सुपरबग कैथेटर और ब्रीथिंग ट्यूब के जरिए मरीजों के शरीर में पहुंचता है। इन पर दवाएं असर न होने के कारण मरीजों की हालत बिगड़ती है। मरीजों में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए इंजीनियर्ड बैक्टीरिया इसे रोकने का काम करेंगे।
यह रिसर्च बार्सिलोना का संस्थान सेंटर फॉर जीनोमिक रेग्युलर कर रहा है। शोधकर्ता लुइस सेरानो कहते हैं, इंजीनियर्ड बैक्टीरिया खास तरह का प्रोटीन के जरिए सुपरबग को मात दे सकता है।...
मोतियाबिंद को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया छर्रेनुमा इम्प्लांट तैयार किया है। अगर मोतियाबिंद हो गया है तो यह इम्प्लांट उसे बढ़ने नहीं देता और बिना सर्जरी के इसका इलाज करने में मदद करता है।
यह इम्प्लांट आंखों में कैल्शियम का स्तर बढ़ने से रोकता है। यह किस हद तक असरदार है, इसकी जांच के लिए क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। जल्द ही ह्यूमन ट्रायल शुरू होगा।
वैज्ञानिकों का कहना है यह इम्प्लांट बड़ा बदलाव ला सकता है क्योंकि दुनियाभर के बुजुर्गोँ में मोतियाबिंद एक आम बीमारी बनती जा रही है। यूके में हर साल मोतियाबिंद के 3.50 लाख ऑपरेशन किए जाते हैं। 65 साल की उम्र के हर तीन में से एक इंसान की एक या दोनों आंखों में मोतियाबिंद होता है।...
बढ़ती उम्र में मेमोरी को घटने से रोकना चाहते हैं तो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की हालिया रिसर्च कहती है, हाई ब्लड प्रेशर का असर आपकी मेमोरी पर भी पड़ रहा है। 30 से 40 साल की उम्र में आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है तो इसे कंट्रोल करें क्योंकि यह डिमेंशिया का रिस्क बढ़ाता है।
एक साधारण सी आंखों की जांच दिल की बीमारी के खतरे को बताएगी। इंसान को हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा कितना है, इस जांच से यह पता चल सकेगा। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है, रेटिना की जांच करके यह बताया जा सकता है कि इंसान की आंखों में ब्लड का सर्कुलेशन कितना कम है। यही बात हृदय रोगों का इशारा करती है।
यह दावा अमेरिका के सैनडिएगो की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है।...
ब्रेस्ट कैंसर को मात देने वाली 36 साल की जेसिका बलदाद उन महिलाओं की मदद कर रही हैं, जो इस बीमारी से जूझ रही हैं। जेसिका ने ऐसी ऐप विकसित की है जो ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने में मदद करती है।
जेसिका की ऐप का नाम है 'फील फॉर योर लाइफ'। यह ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति को ट्रैक करती है। यह ऐप महिलाओं को नोटिफिकेशन भेजकर जरूरी जांच और सावधानियों के बारे में बताने का काम करता है। ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। महिलाओं में होने वाली मौत का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है।...
हर बार मोटापे की वजह एक्सरसाइज से दूरी और फैट वाला खाना हो ऐसा नहीं है। अमेरिकी वैज्ञानिकों इसकी एक और वजह बताई है, वो है इंसान के जीन्स। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने ऐसे 14 जीन्स पहचाने गए हैं जो इंसान में बढ़ते मोटापे के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन्हीं जीन्स के कारण इंसान हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझता है।...
कनाडा के वैज्ञानिकों ने ऐसा ग्लास तैयार किया है जो अनब्रेकेबल है। यानी इसका डैमेज होना और इसमें फ्रैक्चर होना मुश्किल है। इसका इस्तेमाल मोबाइल स्क्रीन के लिए किया जाएगा। इस ग्लास को खास तरह के एक्रेलिक मैटेरियल से तैयार किया गया है, जो इसे सख्त बनाने के साथ अधिक मजबूती और ट्रांसपेरेंसी देता है।
एक्रेलिक मैटेरियल से तैयार कियाइस ग्लास को तैयार करने वाली कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, एक्रेलिक मैटेरियल से तैयार ग्लास प्लास्टिक से कुछ हद तक मिलता-जुलता है और टूटकर बिखरता नहीं। अगर इसे बड़े स्तर पर तैयार किया जा सका तो मोबाइल स्क्रीन के टूटने का खतरा कम किया जा सकेगा। ऊंचाई से गिरने पर भी स्क्रीन डैमेज का खतरा नहीं होगा।...
साइलेंट किलर कहे जाने वाले हाई ब्लड प्रेशर पर नई रिसर्च सामने आई है। रिसर्च के नतीजे ऐसे मरीजों को अलर्ट करते हैं जिनका ब्लड प्रेशर घटता-बढ़ता रहता है, खासतौर पर रात में।
रिसर्च करने वाली इटली की पीसा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, अगर टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में रात में ब्लड प्रेशर बढ़ता है तो मौत का खतरा अधिक रहता है। जिन लोगों का रात में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है उनके मुकाबले ब्लड प्रेशर बढ़ने वाले मरीजों में मौत का खतरा दोगुना हो जाता है।...