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प्रकृति के बीच बागवानी या एक्सरसाइज करते हैं तो खुश रहता है मन, दूर होती है बेचैनी

प्रकृति के बीच बागवानी या एक्सरसाइज करते हैं तो खुश रहता है मन, दूर होती है बेचैनी

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
गर मन को प्रसन्न रखना है तो प्रकृति के बीच समय बिताएं। प्राकृतिक जगहों पर बागवानी और एक्सरसाइज करते हैं तो बेचैनी दूर होती है और मन बेहतर महसूस करता है। इंसान मानसिक समस्याओं से दूर रहता है। यह दावा इंग्लैंड की यॉर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, प्रकृति के बीच एक्टिविटी करने से इंसान की मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ता है। यह जानने के लिए रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि 8 से 12 हफ्ते के बीच अगर इंसान 20 से 90 मिनट तक प्रकृति के बीच बिताता है तो मानसिक तौर पर वो बेहतर महसूस करता है।...
छोटी सी टेबलेट पानी को 99.9% तक कीटाणुमुक्त बनाएगी

छोटी सी टेबलेट पानी को 99.9% तक कीटाणुमुक्त बनाएगी

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दुनियाभर में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसी जगहों के लिए वैज्ञानिकों ने खास तरह की हाइड्रोजेल टैबलेट तैयार की है। यह टैबलेट नदियों-तालाबों के पानी को एक घंटे में अंदर पीने लायक बना देगी। इस टैबलेट का एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह टैबलेट पानी 99.9 फीसदी तक बैक्टीरियामुक्त बना देती है। टैबलेट तैयार करने वाली अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर पानी को बैक्टीरियामुक्त बनाने के लिए उबालकर पिया जाता है। इसमें समय और एनर्जी दोनों लगती है, लेकिन नई हाइड्रोजेल टैबलेट से पानी को पीने लायक बनाना आसान है।...
हिमालय में उगने वाली खास किस्म की फफूंद से होगा कैंसर का इलाज

हिमालय में उगने वाली खास किस्म की फफूंद से होगा कैंसर का इलाज

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हिमालय में पाई जाने वाली फफूंद से कैंसर का इलाज किया जा सकेगा। इस फफूंद को वैज्ञानिक भाषा में कॉर्डिसेप्स साइनेसिस कहते हैं। इसमें कैंसर से लड़ने और कैंसर वाली कोशिकाओं को रोकने की क्षमता है। यह बात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और बायोफार्मा कंपनी न्यूकाना की जॉइंट रिसर्च में साबित भी हुई है।
स्मार्टफोन-कम्प्यूटर की स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताने वालों में 80% तक दूर की नजर धुंधली होने का खतरा

स्मार्टफोन-कम्प्यूटर की स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताने वालों में 80% तक दूर की नजर धुंधली होने का खतरा

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लम्बे समय लोगों का स्क्रीन के सामने समय बिताना उन्हें वो बीमारी दे सकता है जो आमतौर पर बुजुर्गों में देखी जाती है। इंग्लैंड के शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, अगर आपका एक लम्बा समय स्मार्टफोन या कम्प्यूटर की स्क्रीन के सामने बीतता है तो दूर की नजर कमजोर हो सकती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे मायोपिया कहते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 3 महीने से लेकर 33 साल तक के लोगों में मायोपिया होने का खतरा 80 फीसदी तक रहता है। यह दावा इंग्लैंड की एंगलिया रस्किन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है।...
यूरोप के 900 शहरों में हरियाली न होने के कारण हर साल हो रहीं 43 हजार अकाल मौतें

यूरोप के 900 शहरों में हरियाली न होने के कारण हर साल हो रहीं 43 हजार अकाल मौतें

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
यूरोप में हर साल 43 हजार अकाल मौतें हो रही हैं। इसकी वजह चौंकाने वाली है। यूरोप के 900 शहरों में होने वाली ऐसी मौतों की वजह है वहां हरियाली न होना। यह दावा बार्सिलोना इंस्टीट्यूट ऑफ फॉर ग्लोबल हेल्थ शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च रिपोर्ट में किया है।
कोविड के हल्के लक्षणों वाले मरीजों में रिकवरी के 1 साल बाद भी 40% हार्ट फेल और 24% तक स्ट्रोक का खतरा, अलर्ट रहें

कोविड के हल्के लक्षणों वाले मरीजों में रिकवरी के 1 साल बाद भी 40% हार्ट फेल और 24% तक स्ट्रोक का खतरा, अलर्ट रहें

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कोविड से रिकवरी के 1 साल बाद भी मरीज इसके खतरों और साइड इफेक्ट्स से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजों पर हुई नई रिसर्च अलर्ट करने वाली है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है, कोविड के हल्के लक्षणों वाले ऐसे मरीज जो हॉस्पिटल में भर्ती नहीं हुए उनमें भी सालभर बाद हृदय रोगों का खतरा कम नहीं हुआ है। इन मरीजों में 39 फीसदी तक हार्ट फेल और 24 फीसदी तक स्ट्रोक होने का रिस्क है। इतना ही नहीं, इनमें 119 फीसदी पल्मोनरी एम्बोलिज्म (ब्लड क्लॉटिंग का एक प्रकार) और 277 फीसदी तक दिल में सूजन होने की आशंका बनी हुई है।...
सोने का गलत तरीका, खाने में अधिक शक्कर और स्क्रीन टाइम बनाता है आपको उम्रदराज

सोने का गलत तरीका, खाने में अधिक शक्कर और स्क्रीन टाइम बनाता है आपको उम्रदराज

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
ज्यादातर लोग मानते हैं, चेहरे पर दिखने वाली एजिंग के लिए आपका खानपान जिम्मेदार होता है। कुछ हद तक यह बात सच भी है, लेकिन नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इसके दूसरे कारण भी बताए हैं। जिस पर ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते। सोने का गलत तरीका: नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल की रिसर्च कहती है, करवट के बल सोते समय तकिए से चेहरा रगड़ता है जिससे झुर्रियां बढ़ने लगती हैं। ऐसा करने से बचें।चीनी का अधिक सेवन: जर्नल स्प्रिंगर लिंक का अध्ययन कहता है, चीनी सेवन के बाद ग्लाइकेशन की प्रक्रिया के दौरान खतरनाक फ्री-रेडिकल्स में बदल जाती है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।स्क्रीन टाइम: पबमेड जीओ जर्नल के मुताबिक, अगर आप सप्ताह में 4 दिन 8-8 घंटे की शिफ्ट में कम्प्यूटर पर काम करते हैं तो यह दोपहर की धूप में 20 मिनट तक समय बिताने के बराबर होता है। जो नुकसानदेह है।...
कच्चे नहीं, पके अंडे में होता है ज्यादा प्रोटीन

कच्चे नहीं, पके अंडे में होता है ज्यादा प्रोटीन

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अंडा पहले आया या मुर्गी इस बहस का भले ही कोई नतीजा न निकला हो, लेकिन रिसर्च में कई नई बातें जरूर सामने आई हैं। जैसे, कच्चे अंडे के मुकाबले उबले हुए अंडे में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। जैसे-जैसे मुर्गी की उम्र बढ़ती है, उसके अंडे का आकार भी बढ़ता है।
ICMR ने विकसित की सिलीकोसिस का पता लगाने वाली किट

ICMR ने विकसित की सिलीकोसिस का पता लगाने वाली किट

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने फेफड़ों से जुड़ी बीमारी सिलिकोसिस का पता लगाने के लिए नई टेस्ट किट विकसित की है। टेस्ट किट की मदद से इस बीमारी को गंभीर होने से पहले पता लगाया जा सकेगा। सिलिकोसिस का समय से पता लगाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि एक बार हालत बिगड़ने पर मरीज को पहले की तरह स्वस्थ कर पाना मुश्किल हो जाता है।...
पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा:पुरुषों के जीन में बदलाव और महिलाओं का देरी से मां बनना भी ब्रेस्ट कैंसर की एक वजह

पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा:पुरुषों के जीन में बदलाव और महिलाओं का देरी से मां बनना भी ब्रेस्ट कैंसर की एक वजह

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ब्रेस्ट कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं में होता है, लेकिन यह पुरुषों में भी हो सकता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर 8 में से एक महिला में ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका रहती है। इस कैंसर के कुल आंकड़ों में 1 फीसदी तक ब्रेस्ट कैंसर से जूझने वाले पुरुष शामिल हैं। इसका खतरा भले ही महिला और पुरुष दोनों में रहता है, लेकिन इसके कुछ खास रिस्क फैक्टर हैं, जो दोनों को समझने जरूरी हैं। हर साल अक्टूबर मंथ को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है, ताकि लोगों को इसके खतरे से आगाह किया जा सके।...