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लाइफस्टाइल

कोरोना काल में आया ऑनलाइन शादियों का ट्रेंड

कोरोना काल में आया ऑनलाइन शादियों का ट्रेंड

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली साल 2021 भी कोरोना वायरस के खतरे के बीच बीता। इस साल भी संक्रमण से बचाव के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगे। लोग आपस में मिल नहीं सकते थे। किसी तरह का समारोह, शादी पार्टी में कई तरह के प्रतिबंध लगे हुए थे। लोग यात्रा नहीं कर सकते थे, तो वहीं शादी पार्टी में सीमित संख्या में ही लोग शामिल हो सकते थे। इसका असर ये हुआ कि सालों से शादी को लेकर चली आईं परंपराओं में कुछ बदलाव हुआ। भारत में शादी किसी बड़े सेलिब्रेशन से कम नहीं होती है, जहां दूल्हा-दुल्हन के अलावा उनके परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, आस पड़ोस के लोग समेत पंडित पुरोहित आदि शामिल होते हैं। हजारों की संख्या में मेहमानों के बीच लड़का और लड़की एक दूसरे के साथ रहने की कसमें लेते हैं। लेकिन इस साल कोरोना के कारण ऑनलाइन शादी का चलन शुरू हुआ। डिजिटल कार्ड से लेकर ऑनलाइन गिफ्ट देने की तरकीब लोगों ने निकाली। कहीं दुल्हन का भाई वीडियो कॉल के ...
सर्दियों में सूजन, जलन और खुजली से हैं परेशान

सर्दियों में सूजन, जलन और खुजली से हैं परेशान

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली मौसमी बदलाव शरीर पर बुरा असर भी डालते हैं। आमतौर पर सर्दियों के मौसम को सेहत बनाने वाला माना जाता है लेकिन ठंड का आना भी कई तरह की समस्याएं लेकर आता है। इसमें शरीर में आने वाली सूजन, लाली, खुजली और जलन भी शामिल है। इसे चिकित्सकीय भाषा में चिलब्लेंस भी कहा जाता है। यह स्थिति शरीर के बार बार ठंड के सम्पर्क में आने से पनपती है। खासकर हाथों और पैरों में इसकी वजह से सूजन और खुजली के साथ ही लाल धब्बे, फफोले आदि भी हो सकते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में ये फफोले और सूजन मौसम में थोड़ी गर्मी आते ही ठीक भी हो जाते हैं। लगभग एक-तीन हफ्तों में। लेकिन कई बार इनको नजरअंदाज करने से संक्रमण बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि शुरुआत से ही सतर्कता बरती जाए।...
वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा

वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में भी कोरोना के इस नए वैरिएंट से संक्रमितों का संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस वैरिएंट से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है क्योंकि वैरिएंट की प्रकृति काफी चिंतित करने वाली है। ब्रिटेन जैसे देशों में कोरोना के इस संक्रामक वैरिएंट के बढ़ते मामलों के चलते लॉकडाउन जैसे हालात बनने लगे हैं। ओमिक्रॉन से बचाव के लिए वैज्ञानिक कई स्तरों पर अध्ययन कर रहे हैं। अमेरिका स्थित व्हाइट हाउस के शीर्ष चिकित्सा सलाहकार ने रविवार को कहा, कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी फौसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश में अभी भी बड़ी संख्या में लो...
इम्युनिटी को बढ़ावा देने के लिए कीजिए इन योगासनों का अभ्यास

इम्युनिटी को बढ़ावा देने के लिए कीजिए इन योगासनों का अभ्यास

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी का मजबूत होना कितना आवश्यक है, इससे अब सभी लोग भली-भांति वाकिफ हो चुके हैं। इम्युनिटी मजबूत होने से शरीर को संक्रमण से मुकाबले की शक्ति मिलती है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लोग कई तरह की चीजों का सेवन करते हैं, हालांकि सिर्फ खान-पान से ही इम्युनिटी को मजबूत नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इसके लिए नियमित रूप से योग और व्यायाम को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक होता है। योग न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। योग विशेषज्ञों के मुताबिक दैनिक जीवन में योगासनों को शामिल करके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाया जा सकता है। कोरोना के नए नए वैरिएंट्स के इस दौर में प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखना सभी के लिए आवश्यक है। आइए...
ओमिक्रॉन संक्रमण की आसानी से की जा सकेगी पहचान

ओमिक्रॉन संक्रमण की आसानी से की जा सकेगी पहचान

What's Hot, टॉप न्यूज़, यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। देश के 12 राज्यों में अब तक 150 से अधिक लोगों में कोरोना के इस नए वैरिएंट के संक्रमण की पहचान हो चुकी है। ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में विस्तार से जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं, चूंकि अब तक इसके लक्षणों के बारे में ज्यादा पता नहीं चल सका है, ऐसे में संक्रमितों में इसके निदान के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग कराने की जरूरत पड़ रही है। हालांकि अब ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण की पहचान आसान होने वाली है। वैज्ञानिकों ने संक्रमण के निदान के लिए एक खास किट तैयार की है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता लगाने के लिए एक विशेष किट तैयार की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस किट के माध्यम से ओमिक्रॉन संक्रमितों का आसानी से पता लग...
इस बात को लेकर चिंतित है डब्ल्यूएचओ

इस बात को लेकर चिंतित है डब्ल्यूएचओ

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक ओर ब्रिटेन जैसे देशों में जहां संक्रमण के कारण दिन-ब-दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं, वहीं भारत में भी ओमिक्रॉन का संकट बढ़ता दिख रहा है। यहां अब तक 100 से अधिक लोगों में ओमिक्रॉन के संक्रमण की पहचान की जा चुकी है। ओमिक्रॉन के बारे में विस्तार से जानने के लिए दुनियाभर के तमाम वैज्ञानिक अध्ययन रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि कोरोना का यह नया वैरिएंट, पिछले वैरिएंट्स की तुलना में काफी तेजी से फैल रहा है। जल्द ही अगर इसकी रफ्तार पर काबू न पाया गया तो पूरी दुनिया को यह अपनी चपेट में ले सकता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां करीब 11 राज्यों में ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का ...
ऑफिस में काम करते समय आती है नींद

ऑफिस में काम करते समय आती है नींद

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली। अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि उन्हें ऑफिस में काम करते समय बहुत नींद आती है। लगातार बैठे बैठे काम करने से आपका शरीर सुस्त होने लगता है, जिससे आप बार बार जम्हाई लेते हैं और पलकें भारी होने लगती हैं। आंखें बंद होने लगती है। यह नींद आने के लक्षण होते हैं। ऑफिस में नींद आना काम में लापरवाही नहीं बल्कि शरीर की सुस्ती है। अधिकतर लंच के बाद या दोपहर में नींद आती है। ऑफिस में आप किसी जरूरी मीटिंग में हो या फिर किसी कॉन्फ्रेंस में, नींद कभी भी आ सकती है। ऐसे में आप जो भी काम कर रहे हैं, उसमें तो गलती हो ही सकती है, साथ ही अगर आपके सीनियर या बाॅस ने सोते हुए देख लिया तो डांट भी पड़ सकती है। इसलिए ऑफिस में नींद आने की समस्या का समाधान निकाल लें, इससे आप काम के दौरान ऊर्जावान तो रहेंगे ही, साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहेगा।...
दांतों और मसूड़ों के लिए बहुत नुकसानदायक हैं ये चीजें

दांतों और मसूड़ों के लिए बहुत नुकसानदायक हैं ये चीजें

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
नई दिल्ली। शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भोजन का सही तरीके से पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण होना आवश्यक माना जाता है। इसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ अच्छे से चबा-चबाकर भोजन करने का सलाह देते हैं। पर अगर आपके दांत ही स्वस्थ नहीं हैं, तो भोजन को चबाना और फिर इसका पाचन हो पाना, सबकुछ कठिन हो जाता है। अपने दैनिक व्यस्त जीवन में, हम अक्सर अपने मौखिक स्वास्थ्य का उचित ध्यान देना भूल जाते हैं। यही कारण है कि लोगों को दांतों और मसूड़ों से संबंधित कई तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों को दांत निकलवाने तक पड़ जाते हैं। दंत रोग विशेषज्ञ बताते हैं, खाने से लेकर बोलने तक, हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली में दांतों की अहम भूमिका होती हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमारे दांत मजबूत और स्वस्थ रहें। मौखिक स्वास्थ्य को प्र...
आसानी से सजाना है क्रिसमस ट्री

आसानी से सजाना है क्रिसमस ट्री

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नई दिल्ली। नया साल आने वाला है, उसके पहले दिसंबर में क्रिसमस डे मनाया जाता है। 25 दिसंबर को हर साल क्रिसमस डे होता है, जिसे दुनिया भर में लोग उत्साह से मनाते हैं। इस बड़े दिन की लोगों को बेसब्री से इंतजार होता है। क्रिसमस डे पर प्रभु यीशु का जन्म हुआ था। ईसाई धर्म से जुड़े लोग इस दिन चर्च जाते हैं और पूजा करते हैं। वहीं प्रभु यीशु का जन्मदिन धूमधाम से मनाने के लिए घर पर सजावट करते हैं। क्रिसमस की सजावट में सबसे खास होता है, क्रिसमस ट्री। क्रिसमस ट्री को लाइट्स, रंग बिरंगे गिफ्ट और कैंडी आदि से सजा कर लोग खुशियां मनाते हैं। बच्चे और बड़े क्रिसमस ट्री को सजाने के लिए उत्सुक तो होते हैं लेकिन उन्हें ये समझ नहीं आता कि क्रिसमस ट्री को आसानी से कैसे सजाएं ताकि वह अच्छा दिखे।...
एड्स, कैंसर के लिए जल्द तैयार हो सकती है वैक्सीन; वैज्ञानिक mRNA टेक्नोलॉजी को बना रहे हथियार

एड्स, कैंसर के लिए जल्द तैयार हो सकती है वैक्सीन; वैज्ञानिक mRNA टेक्नोलॉजी को बना रहे हथियार

यात्रा, लाइफस्टाइल, साइंस
कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर फाइजर और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन्स मैसेंजर-RNA यानी mRNA टेक्नोलॉजी से विकसित की गई हैं। वैज्ञानिक अब इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर एड्स, कैंसर और जीका वायरस जैसी बीमारियों को खत्म करना चाहते हैं। उनकी मानें, तो mRNA से बनी वैक्सीन्स इन घातक बीमारियों पर असरदार साबित हो सकती हैं। क्या होती है mRNA टेक्नोलॉजी? mRNA टेक्नोलॉजी से हमारे सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनता है। यह जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा होता है। सरल भाषा में, जब हमारे शरीर पर कोई भी वायरस या बैक्टीरिया अटैक करता है, तब ये टेक्नोलॉजी हमारे सेल्स को एक मैसेज भेजती है। इससे उस वायरस या बैक्टीरिया के प्रोटीन जैसा ही प्रोटीन हमारे शरीर में प्रोड्यूस होता है। फिर इसके खिलाफ हमारे इम्यून सिस्टम में जरूरी एंटीबॉडीज बन जाती हैं।...