डॉ. कपिलदेव भारद्वाज की विनम्रता को कोई सानी नहीं था
आज रस्म उठाले के अवसर पर विशेषश्रीगंगानगर के प्रसिद्ध भारद्वाज परिवार का हर सदस्य विनम्रता के मामले मेंं अपनी छाप छोड़ता है, लेकिन डॉ. कपिलदेव भारद्वाज की बात ही अलग थी। इस मामले में उनका कोई सानी नहीं था। राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे पं. त्रिलोचनदत्त भारद्वाज के अनुज पं. लखपत राय भारद्वाज के घर 17 सितम्बर 1947 को जन्मे कपिलदेव की प्रारम्भिक शिक्षा श्रीगंगानगर में ही हुई। इसके पश्चात वे अपने बड़े भाई की तरह ही चिकित्सक बनने की इच्छा के साथ एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के लिए पहुंचे। वहां से उन्होंने एमबीबीएस व एमडी की उपाधि प्राप्त की। इसके तुरंत बाद ही सन् 1974 में उनका सरकारी सेवा में चिकित्सक के रूप में चयन हो गया। उनकी प्रथम नियुक्ति अलवर जिले के नौगांव में हुई। पहली नियुक्ति होने और इस गांव का उस समय माहौल बेहतर होने के नाते वे नौगांव को खूब याद...








